चाईबासा अदालत का सख्त फैसला, पोक्सो एक्ट के तहत हुई कठोर सजा
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू थाना कांड संख्या-09/2024 में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। यह मामला दिनांक 09 अप्रैल 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) एवं पोक्सो एक्ट 2012 की धारा 4/6 के तहत दर्ज किया गया था।

क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करमपदा निवासी दिलीप गुडिया (पिता-पियुस गुडिया) पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए किरीबुरू पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूत हुई केस
अनुसंधान के दौरान चाईबासा पुलिस ने सभी आवश्यक साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र किया। मेडिकल जांच, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मजबूत चार्जशीट तैयार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत की।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान चिल्ड्रेन केस संख्या-03/2024 (दिनांक 06 मई 2026) में माननीय अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने आरोपी दिलीप गुडिया को पोक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई।
संदेश: अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी
यह फैसला समाज में एक स्पष्ट संदेश देता है कि नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार का यौन अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की सक्रियता और न्यायालय की तत्परता से पीड़िता को न्याय मिला है।
पुलिस की भूमिका सराहनीय
चाईबासा पुलिस की त्वरित कार्रवाई, साक्ष्यों का वैज्ञानिक संकलन और मजबूत अनुसंधान के चलते यह मामला कम समय में निष्पादन तक पहुंचा, जो कानून व्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।














