राम मंदिर चंदे में पारदर्शिता और खान-खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन, उमड़ी भीड़ ने बदले सियासी समीकरण के दिए संकेत
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस में लंबे समय से पसरी राजनीतिक निष्क्रियता और गुटबाजी के बीच गुरुवार का दिन पार्टी के लिए नई ऊर्जा और नई राजनीतिक करवट का गवाह बना। सदर अनुमंडल कार्यालय के समक्ष राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्र चंदे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, चंदे के संग्रह एवं उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग को लेकर कांग्रेस द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन में जिस तरह कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी, उसने जिले की सियासत में कांग्रेस की वापसी के संकेत दे दिए।

धरना नहीं, कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर आयोजित इस धरना-प्रदर्शन को पार्टी के नए जिलाध्यक्ष-सह-जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु ने नेतृत्व दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग, महिला और पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में लंबे अरसे बाद ऐसा उत्साह दिखाई दिया, जिसने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक चर्चा तेज कर दी।
कांग्रेस के इस प्रदर्शन को महज एक विरोध कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पश्चिमी सिंहभूम में संगठन की जमीन दोबारा मजबूत करने की दिशा में सोनाराम सिंकु की पहली बड़ी परीक्षा और बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

वर्षों बाद याद आया बागुन सुम्ब्रुई और विजय सिंह सोय का दौर
जिले के पुराने कांग्रेसियों और राजनीतिक जानकारों के बीच गुरुवार के कार्यक्रम की चर्चा कुछ अलग ही अंदाज में होती रही। लंबे समय बाद जिला कांग्रेस के किसी धरना-प्रदर्शन में इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पुराने दौर की यादें ताजा कर दीं।
कई कांग्रेसियों का कहना है कि कभी बागुन सुम्ब्रुई और विजय सिंह सोय जैसे दिग्गज नेताओं के दौर में पश्चिमी सिंहभूम कांग्रेस की पहचान मजबूत जनाधार और सड़क पर संघर्ष करने वाली पार्टी के रूप में थी। समय के साथ संगठन कमजोर पड़ा, गुटबाजी बढ़ी और कांग्रेस की गतिविधियां सीमित होती चली गईं। लेकिन सोनाराम सिंकु के जिलाध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में जिस तरह नई हलचल दिखाई दे रही है, उससे पुराने कांग्रेसियों में भी उम्मीद जगी है।

जिलाध्यक्ष बनते ही बदली संगठन की तस्वीर
सोनाराम सिंकु के जिला कांग्रेस की कमान संभालने के बाद सबसे बड़ा बदलाव संगठन के भीतर दिखाई देने का दावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। लंबे समय से अलग-अलग खेमों में बंटे नजर आने वाले कांग्रेसियों के एक मंच पर जुटने से यह संदेश गया कि संगठन में गुटबाजी को पीछे छोड़कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने की कोशिश शुरू हो गई है।
पुराने कांग्रेसियों के बीच भी पार्टी में दोबारा सक्रिय होने की चर्चा तेज है। वर्षों से संगठन से दूरी बनाए रखने वाले कई चेहरे अब फिर से कांग्रेस के कार्यक्रमों में नजर आने लगे हैं। ऐसे में गुरुवार का प्रदर्शन पार्टी के लिए केवल वर्तमान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार करने की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

‘मृतप्राय’ जिला कांग्रेस में आई जान!
राजनीतिक गलियारों में कभी-कभी तीखी आलोचनाओं का सामना करने वाली जिला कांग्रेस को लेकर यह चर्चा आम रही कि संगठन की गतिविधियों में पहले जैसी धार नहीं रही। लेकिन गुरुवार के कार्यक्रम में जुटी भीड़ ने इस धारणा को चुनौती दी।
धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं का उत्साह, लगातार नारेबाजी और नेताओं के समर्थन में उठती आवाजें यह संकेत दे रही थीं कि जिला कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियों को फिर से गति देने की कोशिश रंग ला रही है।
युवा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। इसके साथ ही बुजुर्ग और पुराने कांग्रेसियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और व्यापक रूप दिया।
सोनाराम सिंकु ने संभाला मोर्चा
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सांसद काली चरण मुंडा ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास के साथ योगदान दिया है। ऐसे में चंदे की राशि के संग्रह और उसके उपयोग का पूरा विवरण जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता।
खान-खनिज संशोधन विधेयक पर उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा और राज्य के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। कांग्रेस जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संघर्ष जारी रखेगी।

सोनाराम सिंकु का सीधा संदेश
जिलाध्यक्ष-सह-जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर जनता से प्राप्त चंदे का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। जनता ने श्रद्धा और विश्वास के साथ योगदान दिया है, इसलिए चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करना नैतिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने झारखंड की खनिज संपदा को राज्य की जनता की धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसी किसी नीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे राज्य के अधिकार कमजोर हों या प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों के हित प्रभावित हों।
उनके तेवरों से साफ दिखाई दिया कि जिला कांग्रेस अब केवल कार्यालय की राजनीति तक सीमित रहने के बजाय सड़क पर उतरकर मुद्दों की लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।
‘24 कैरेट’ नेतृत्व की चर्चा
कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सोनाराम सिंकु को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। उनके समर्थकों का कहना है कि जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अपनी कार्यक्षमता का परिचय देना शुरू कर दिया है।
कुछ कार्यकर्ता तो यह कहते नजर आए कि “सोनाराम सिंकु ने अपनी कार्यक्षमता से खुद को 24 कैरेट का सोना साबित करना शुरू कर दिया है।”
हालांकि आगे संगठन को लगातार सक्रिय रखना और इस भीड़ को स्थायी जनसंगठन में बदलना सोनाराम सिंकु के लिए बड़ी चुनौती होगी। लेकिन पहला बड़ा जिला स्तरीय धरना जिस तरह सफल रहा, उसने निश्चित रूप से उनके नेतृत्व को मजबूती दी है।
चंदे की निष्पक्ष जांच की मांग
धरना-प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राम मंदिर चंदा संग्रह से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच, चंदे की राशि एवं उसके उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
खान-खनिज विधेयक पर भी आर-पार की तैयारी
कांग्रेस ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग करते हुए झारखंड के खनिज संसाधनों और राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। नेताओं ने साफ किया कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े सवाल पर पार्टी लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेगी।
जिला प्रभारी समेत पूरी टीम मैदान में
जिला प्रभारी धर्मेन्द्र सोनकर ने पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष नीतिमा बारी ने भी धार्मिक आस्था से जुड़े चंदे का पूरा हिसाब जनता के सामने रखने की मांग की।
कार्यक्रम का संचालन जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सेवादल मुख्य संगठक लक्ष्मण हासदा ने किया। प्रदेश महासचिव सुनित शर्मा, प्रदेश सचिव मायाधर बेहरा, नजर हुसैन, चंद्रशेखर दास, राम सिंह सावैयां, अम्बरराय चौधरी, अशरफुल होदा, मासूम रजा समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

क्या यह कांग्रेस की वापसी का संकेत है?
गुरुवार का प्रदर्शन एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या पश्चिमी सिंहभूम में कांग्रेस फिर अपने पुराने जनाधार की ओर लौट रही है?
सिर्फ एक कार्यक्रम के आधार पर इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि लंबे समय बाद जिला कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी का अहसास कराया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार्यक्रम में युवा और बुजुर्ग दोनों वर्गों की भागीदारी दिखाई दी।
सोनाराम सिंकु के सामने अब चुनौती इस भीड़ को संगठन की स्थायी ताकत में बदलने की है। यदि यह सक्रियता लगातार जारी रही, पुराने कांग्रेसियों की घर वापसी हुई और गुटबाजी वास्तव में संगठन के पीछे छूट गई, तो आने वाले दिनों में पश्चिमी सिंहभूम की राजनीति में कांग्रेस एक बार फिर मजबूत ताकत के रूप में उभर सकती है।
गुरुवार का धरना इसलिए सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था। यह लंबे समय से सुस्त पड़ी जिला कांग्रेस के भीतर उठती नई राजनीतिक हलचल का संकेत था—और इस हलचल का चेहरा फिलहाल सोनाराम सिंकु बनकर सामने आए हैं।














