केंद्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु में रक्षाबंधन उत्सव ने बांधा प्रेम और विश्वास का अटूट रिश्ता
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास, स्नेह और सुरक्षा के अटूट रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन भले ही एक दिन बाद मनाया जाना था, लेकिन इसकी भावनाओं की मिठास 27 अगस्त को ही केंद्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु के परिसर में उतर आई। विद्यालय में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव ने देखते ही देखते ऐसा भावुक और आत्मीय माहौल बना दिया कि राखी के छोटे-छोटे धागों में मानो रिश्तों की पूरी दुनिया सिमट गई।

छात्राओं ने अपने हाथों से बुना प्रेम का धागा
रक्षाबंधन उत्सव को खास बनाने के लिए विद्यालय की छोटी-बड़ी छात्राओं और शिक्षिकाओं ने स्वयं अपने हाथों से आकर्षक राखियां तैयार कीं। रंग-बिरंगे धागों, सुंदर सजावट और बच्चों की कल्पनाशीलता से तैयार इन राखियों में केवल कला नहीं, बल्कि आत्मीयता और सम्मान की भावना भी झलक रही थी।

जब छात्राओं ने परंपरागत तरीके से विद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों की कलाई पर राखियां बांधीं, तो पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा। किसी के चेहरे पर मुस्कान थी तो किसी की आंखों में बच्चों के प्रति स्नेह साफ दिखाई दे रहा था।

अधिकारियों की कलाई पर सजा विश्वास
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन सह मेघाहातुबुरु के सीजीएम संजय कुमार सिंह, प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार, महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम, महाप्रबंधक नवीन कुमार सोनकुश्रे, महाप्रबंधक अमित कुमार विश्वास सहित कई वीएमसी सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

छात्राओं ने एक-एक कर सभी अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। अधिकारियों ने भी बच्चों को केवल उपहार ही नहीं दिए, बल्कि उनके उज्ज्वल, सुखमय, स्वस्थ और सफल भविष्य की मंगलकामना की।

राखी बंधी तो खिल उठे चेहरे
राखी बांधने के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का अद्भुत संगम देखने को मिला। छात्राओं के लिए यह पल इसलिए भी खास था क्योंकि जिन अधिकारियों और शिक्षकों को वे विद्यालय परिवार के मार्गदर्शक के रूप में देखती हैं, उन्हीं की कलाई पर अपने हाथों से तैयार राखी बांधकर उन्होंने अपने स्नेह का इजहार किया।
उपहार पाकर छात्राओं के चेहरे पर खिली मुस्कान इस पूरे आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर बन गई।

फिर पहुंचीं CISF परिसर, जवानों को बांधी राखी
विद्यालय में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रक्षाबंधन की भावनाएं विद्यालय की चारदीवारी से निकलकर सुरक्षा में तैनात जवानों तक पहुंचीं। दर्जनों छात्राएं प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार एवं कुछ महिला शिक्षिकाओं के साथ पास स्थित CISF कार्यालय परिसर पहुंचीं।
यहां पहुंचते ही छात्राओं ने देश की सुरक्षा में दिन-रात डटे CISF जवानों और पदाधिकारियों को राखी बांधनी शुरू की। छात्राओं के हाथों से राखी बंधवाते समय जवानों के चेहरे पर भी आत्मीय मुस्कान दिखाई दी।

राखी के धागे ने मिटाई दूरी
किसी जवान के लिए यह पल अपने घर से दूर रहकर बहन की याद दिलाने वाला था, तो छात्राओं के लिए देश की सुरक्षा करने वाले जवानों को भाई के रूप में सम्मान देने का अवसर। राखी के कुछ धागों ने अनजान चेहरों को भी भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते में जोड़ दिया।
कई क्षण ऐसे आए, जब वातावरण पूरी तरह भावुक हो गया। छात्राओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुरक्षित रहने की कामना की, वहीं जवानों और अधिकारियों ने बच्चियों को आशीर्वाद देते हुए उपहार प्रदान किए।
‘आप देश की रक्षा करते हैं, हम आपको राखी बांधते हैं’
इस आयोजन का सबसे सुंदर संदेश यही रहा कि रक्षाबंधन केवल परिवार के भीतर मनाया जाने वाला पर्व नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा, सम्मान, विश्वास और भाईचारे का रिश्ता मजबूत करने वाला पर्व भी है। CISF जवानों की कलाई पर बंधी राखियां उन बहनों की भावनाओं का प्रतीक बनीं, जो अपने भाइयों की तरह देश के इन सुरक्षा प्रहरी जवानों के सुरक्षित और स्वस्थ जीवन की कामना कर रही थीं।

विद्यालय से निकला भाईचारे और सम्मान का संदेश
केंद्रीय विद्यालय मेघाहातुबुरु का यह रक्षाबंधन उत्सव बच्चों के लिए मनोरंजन या उपहार पाने का अवसर मात्र नहीं रहा। इसने उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा, रिश्तों की पवित्रता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी सिखाया।
विद्यालय परिवार से लेकर CISF परिसर तक बंधी राखियों ने यह संदेश दिया कि प्रेम का रिश्ता खून से ही नहीं, भावनाओं से भी बनता है। कहीं छात्राओं ने अधिकारियों को भाई का सम्मान दिया तो कहीं सुरक्षा जवानों ने इन बच्चियों में अपनी बहनों की झलक महसूस की।
अंततः राखी के उन नाजुक धागों ने एक मजबूत संदेश छोड़ा—जहां स्नेह है, वहां रिश्ता है; जहां विश्वास है, वहां अपनापन है और जहां सुरक्षा का संकल्प है, वहां रक्षाबंधन की भावना हमेशा जीवित रहती है।














