लोकेश्वरनाथ धाम से लेकर गुवा और छोटानागरा तक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
रिपोर्ट : शैलेश सिंह, संदीप गुप्ता
किरीबुरू/गुवा। सावन माह की पहली सोमवारी पर सारंडा और लोहांचल क्षेत्र पूरी तरह शिवमय हो गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। किरीबुरू स्थित लोकेश्वरनाथ धाम मंदिर, ओम शांति स्थल, मेघाहातुबुरु स्थित मां काली मंदिर परिसर के शिवालय, गुवा के तीनों प्रमुख शिव मंदिरों तथा छोटानागरा शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

अहले सुबह से लगी भक्तों की लंबी कतार
गुवा बाजार स्थित कुसुम घाट शिवालय, गुवा रेलवे कॉलोनी शिवालय तथा योग नगर शिवालय में सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार किया और भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
गंगाजल, दूध और बेलपत्र से हुआ अभिषेक
श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, फल एवं अन्य पूजन सामग्रियों के साथ भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से अभिषेक किया। इस दौरान भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, शांति और खुशहाली की कामना की।
‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा वातावरण
पूरे दिन मंदिर परिसरों में “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष गूंजते रहे। भक्ति गीतों और शिव भजनों से मंदिरों का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गुवा प्रशासन ने सभी प्रमुख शिवालयों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। मंदिर परिसरों में पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि जलाभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

योग नगर शिवालय में बंटा खिचड़ी भोग
योग नगर स्थित शिवालय में मंदिर समिति की ओर से दोपहर 12 बजे से श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी भोग का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक आयोजन में भागीदारी निभाई।

दिनभर बना रहा भक्तिमय माहौल
पूरे दिन क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। सावन की पहली सोमवारी पर उमड़ी आस्था ने एक बार फिर सारंडा और लोहांचल के धार्मिक वातावरण को शिवमय बना दिया।












