राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर राज्यों के खनिज अधिकार, वित्तीय स्वायत्तता और आदिवासी-मूलवासी हितों की रक्षा की मांग
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा, जगन्नाथपुर प्रखंड कमेटी ने विरोध का स्वर तेज कर दिया है। पार्टी की प्रखंड कमेटी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को संबोधित ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचलाधिकारी, जगन्नाथपुर के माध्यम से भेजते हुए संशोधन के प्रावधानों को लेकर झारखंड के संवैधानिक अधिकारों, वित्तीय स्वायत्तता तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन एवं खनिज अधिकारों की रक्षा की मांग की है।

धारा 9D को लेकर उठाए संवैधानिक सवाल
ज्ञापन में झामुमो ने कहा है कि MMDR अधिनियम में जोड़ी गई धारा 9D के तहत राज्यों की खनिज अधिकारों अथवा खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने की शक्ति को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन किया गया है। पार्टी का कहना है कि इससे राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और संघीय व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
झामुमो ने अपने ज्ञापन में 25 जुलाई 2024 को Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India मामले में नौ सदस्यीय संविधान पीठ के महत्वपूर्ण फैसले का उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस मामले में 25 जुलाई 2024 को फैसला दर्ज है।
ज्ञापन में कहा गया है कि इसी संवैधानिक पृष्ठभूमि में झारखंड विधानसभा ने Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act, 2024 पारित किया था। झारखंड सरकार के रिकॉर्ड में इस अधिनियम के तहत 2024 में नियमों को मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख है।
खनिज राजस्व को बताया राज्य की आर्थिक ताकत
झामुमो ने कहा कि झारखंड की वित्तीय क्षमता का खनन क्षेत्र से गहरा संबंध है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का लगभग 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आया। वहीं Mineral Bearing Land Cess से विभिन्न वित्तीय वर्षों में बड़ी राशि प्राप्त होने तथा आगे भी राजस्व की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि खनिज संसाधनों से जुड़े वित्तीय अधिकार राज्य की विकास क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
“झारखंड सिर्फ संसाधन देने वाला राज्य नहीं”
पार्टी ने कहा कि देश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा में झारखंड की खनिज संपदा की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन इसके साथ विस्थापन, भूमि से वंचित होने, पर्यावरणीय क्षति, प्रदूषण और पारंपरिक आजीविका प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना भी राज्य के लोगों ने किया है।
झामुमो का कहना है कि झारखंड के खनिज देश के विकास में योगदान दें, लेकिन राज्य केवल संसाधन उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र बनकर न रह जाए। खनिजों से होने वाले विकास का लाभ झारखंड और यहां के लोगों को भी मिले, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, विस्थापित परिवारों के अधिकार सुरक्षित रहें तथा पर्यावरण एवं आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा हो।
जल-जंगल-जमीन के अधिकार पर जोर
ज्ञापन में आदिवासी-मूलवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। झामुमो ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, पहाड़ और नदियां आदिवासी-मूलवासी समाज के लिए केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, पहचान, जीवन और अस्तित्व का आधार हैं।
पार्टी ने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और तिलका मांझी के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड की धरती और उसके संसाधनों पर यहां के लोगों के अधिकार और सम्मान की रक्षा जरूरी है।
₹1.36 लाख करोड़ के लंबित दावों का मुद्दा
ज्ञापन में झारखंड के लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये के लंबित खनन संबंधी आर्थिक दावों का भी उल्लेख किया गया है। झामुमो ने कहा कि जब राज्य अपने वैध आर्थिक दावों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है, तब भविष्य की खनिज आधारित राजस्व क्षमता को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
पार्टी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा भी केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को उठाया गया है और नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में लंबित बकायों के शीघ्र निपटारे की मांग रखी गई है।


राष्ट्रपति से छह प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से झामुमो ने राष्ट्रपति से छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें धारा 9D के राज्यों के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीर परीक्षण, खनिज उत्पादक राज्यों के साथ संस्थागत परामर्श, राज्यों के वित्तीय अधिकारों और विकास आवश्यकताओं के बीच संवैधानिक संतुलन तथा झारखंड के लंबित खनन संबंधी आर्थिक दावों के शीघ्र निपटारे की पहल शामिल है।
इसके अलावा आदिवासी-मूलवासी समाज, विस्थापित परिवारों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को खनिज नीति एवं विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने तथा 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
“विकास में भागीदार बने झारखंड”
झामुमो प्रखंड कमेटी ने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधन राष्ट्रीय विकास में योगदान देते रहेंगे, लेकिन इसके साथ राज्य की आर्थिक स्वायत्तता, स्थानीय रोजगार, विस्थापितों के अधिकार और पर्यावरणीय हित भी सुरक्षित रहना चाहिए।
पार्टी ने राष्ट्रपति से इस पूरे मामले के संवैधानिक, संघीय, वित्तीय, सामाजिक और पर्यावरणीय पक्षों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए संविधान के अंतर्गत उपलब्ध उपयुक्त विकल्पों पर आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है।
















