पश्चिमी सिंहभूम में सौ करोड़ से अधिक की योजनाओं पर उठे सवाल; संवेदक हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
राज्य स्तर की योजनाओं में नए SOR पर रिवाइज एस्टीमेट, तो जिला योजनाओं में पुराने दर क्यों? कार्यपालक अभियंताओं की कार्यशैली सवालों के घेरे में
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
राज्य सरकार द्वारा नया SOR 2026 लागू किए जाने के बाद भी पश्चिमी सिंहभूम जिले में कथित तौर पर पुराने SOR 2022 के आधार पर तैयार प्राक्कलनों पर प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर जिले के संवेदकों में भारी आक्रोश है और वे पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता से कानूनी राय लेकर लीगल नोटिस भेजने और जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में जुट गए हैं।
संवेदकों का आरोप है कि जब राज्य सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के दर निर्धारण कोषांग द्वारा 31 अगस्त 2026 से SOR 2026 लागू कर दिया गया और इसकी सूचना संबंधित विभागों एवं जिलों को भी दी जा चुकी है, तो इसके बाद भी जिला स्तर पर पुराने SOR 2022 की दरों पर योजनाओं को आगे बढ़ाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

सौ करोड़ से अधिक की योजनाएं पुराने SOR पर!
संवेदक सूत्रों के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिले में उपलब्ध DMFT फंड से सौ करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं के प्राक्कलन पुराने SOR 2022 की दरों पर तैयार किए गए हैं। इन योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान किए जाने तथा ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, NREP एवं लघु सिंचाई प्रमंडल द्वारा निविदाएं आमंत्रित किए जाने की बात सामने आ रही है।
यही मुद्दा अब संवेदकों के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
संवेदकों का सवाल है कि जब सरकार ने चार वर्ष बाद महंगाई, निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य लागतों में वृद्धि का आकलन करते हुए नया SOR जारी किया है, तो उसके लागू होने के बाद भी पुराने दर पर योजनाओं को आगे बढ़ाने का औचित्य क्या है?
एक नियम राज्य स्तर पर, दूसरा जिला स्तर पर क्यों?
संवेदकों ने मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना से संबंधित पुलों की निविदा प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया है। उनके अनुसार 31 अगस्त 2026 से पहले कुछ पुल योजनाओं की स्वीकृति SOR 2022 के आधार पर हुई थी और उसी आधार पर निविदा भी आमंत्रित की गई थी।
लेकिन जैसे ही SOR 2026 लागू हुआ, संबंधित निविदा की तिथि आगे बढ़ाई गई तथा प्राक्कलन को नए SOR के अनुसार रिवाइज कर पुनः स्वीकृति एवं निविदा की कार्रवाई की जा रही है।
ऐसे में संवेदकों का सीधा सवाल है—जब राज्य स्तर की योजना में नया SOR लागू होने के बाद प्राक्कलन को रिवाइज किया जा सकता है, तो जिला स्तर की योजनाओं में यही प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही है?
कार्यपालक अभियंताओं की भूमिका पर उठ रहे सवाल
संवेदकों का आरोप है कि जिला प्रशासन के स्तर से पुराने SOR पर स्वीकृत योजनाओं की निविदाएं आगे बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को 31 अगस्त 2026 से लागू नए SOR के अनुसार प्राक्कलन रिवाइज करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
इसी कारण ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, NREP और लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
संवेदकों का तर्क है कि जब राज्य सरकार का दर निर्धारण कोषांग एक नई दर निर्धारित कर चुका है और विभागों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है, तो जिला स्तर पर पुराने दर को आधार बनाकर निविदा प्रक्रिया जारी रखना नियमों की भावना पर सवाल खड़ा करता है।
नए SOR में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की चर्चा
संवेदक सूत्रों का कहना है कि SOR 2022 की तुलना में SOR 2026 की दरों में लगभग 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में पुराने और नए SOR के बीच का अंतर संवेदकों के लिए सीधे तौर पर लागत और संभावित लाभ-हानि से जुड़ा विषय है।
संवेदकों का कहना है कि निर्माण सामग्री, मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्चों में पिछले वर्षों के दौरान लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार के स्तर पर दर निर्धारण कोषांग द्वारा नए SOR की दरें तय की जाती हैं।
फिर सवाल यह है कि नया SOR लागू होने के बाद भी पुराने SOR पर निविदा आमंत्रित कर संवेदकों को पुराने दर पर काम करने के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है?
दर निर्धारण कोषांग की जरूरत ही क्या रह जाएगी?
आक्रोशित संवेदकों का कहना है कि यदि नए SOR को लागू करने के बाद भी जिला स्तर पर पुराने SOR के आधार पर ही योजनाओं का प्राक्कलन और निविदा प्रक्रिया जारी रखी जाएगी, तो फिर राज्य सरकार के दर निर्धारण कोषांग द्वारा नई दर निर्धारित करने का उद्देश्य ही क्या रह जाएगा?
उनका कहना है कि सरकार का कोई विभाग यदि नए SOR को स्वीकार करते हुए पुराने प्राक्कलन को रिवाइज कर सकता है, तो यही व्यवस्था जिला स्तर की योजनाओं पर भी लागू होनी चाहिए।
संवेदक एक मंच पर आने की तैयारी में
आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए जिले के सभी संवेदक अब अपने हितों की रक्षा के लिए एक मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं। संवेदक सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर जल्द ही सामूहिक बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि पुराने SOR पर निविदा प्रक्रिया जारी रहने से प्रत्येक संवेदक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए सभी संवेदक मिलकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखने और जरूरत पड़ने पर सामूहिक कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं।
संवेदकों ने कानूनी विकल्प तलाशना शुरू किया
मामले को लेकर संवेदक अब केवल विरोध तक सीमित रहने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार संवेदकों की ओर से उच्च न्यायालय के अधिवक्ता से लीगल नोटिस एवं संभावित न्यायिक कार्रवाई के संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है।
संवेदक यह जानना चाहते हैं कि SOR 2026 लागू होने के बाद पुराने SOR 2022 की दरों पर स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया जारी रखने की वैधानिक स्थिति क्या है।
यदि मामला न्यायालय तक पहुंचता है तो प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन की तिथि, SOR 2026 के लागू होने की अधिसूचना, विभागीय दिशा-निर्देश और निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज अहम आधार बन सकते हैं।
‘कानून से ऊपर कोई नहीं’—संवेदक
संवेदक सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि कानून और सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से ऊपर कोई नहीं है। यदि राज्य स्तर पर नए SOR के अनुसार प्राक्कलन रिवाइज किया जा सकता है तो जिला स्तर पर भी उसी नियम का पालन होना चाहिए।
संवेदकों का आरोप है कि पुराने SOR पर निविदा आमंत्रित किए जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि जिस दर पर आज से चार वर्ष पहले काम की गणना की गई थी, उसी दर पर वर्तमान लागत के साथ काम करना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
क्या जिला प्रशासन देगा जवाब?
पूरा मामला अब कई सवालों के बीच खड़ा है—
* 31 अगस्त 2026 से SOR 2026 लागू होने के बाद पुराने SOR 2022 के आधार पर नई निविदाएं क्यों?
* सौ करोड़ रुपये से अधिक की DMFT योजनाओं का प्राक्कलन नए SOR पर रिवाइज क्यों नहीं किया गया?
* राज्य स्तर की योजनाओं में नए SOR पर प्राक्कलन रिवाइज हो रहा है तो जिला स्तर पर अलग प्रक्रिया क्यों?

* क्या संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को नए SOR के अनुसार प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं?
* पुराने SOR पर निविदा जारी रखने से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी?
इन सवालों का जवाब अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा।
अब नजर लीगल नोटिस पर
नए SOR 2026 के लागू होने के बाद पुराने SOR 2022 की दर पर निविदा आमंत्रित किए जाने को लेकर संवेदकों ने कानूनी लड़ाई की पहल शुरू कर दी है। अधिवक्ता से राय-मशविरा के बाद यदि लीगल नोटिस जारी होता है तो मामला प्रशासनिक स्तर से निकलकर न्यायिक प्रक्रिया की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल संवेदकों का रुख स्पष्ट है—नए SOR के लागू होने के बाद प्राक्कलन रिवाइज किया जाए और निविदा प्रक्रिया को वर्तमान निर्धारित दरों के अनुरूप किया जाए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और संवेदकों द्वारा प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।






















