ओझा-गुनी के चक्कर में जा रही जान, अंधविश्वास और डायन-प्रथा के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करने निकला सामाजिक संगठन
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
नोवामुंडी/जगन्नाथपुर।
आज भी जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गंभीर बीमारियों, सर्पदंश और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के बजाय झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के चक्कर में पड़ जाते हैं। कई मामलों में इलाज में देरी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। अंधविश्वास के कारण होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक संगठनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज किया है।

अंधविश्वास के कारण इलाज में होती है देरी
नोवामुंडी प्रखंड की पोखरपी पंचायत अंतर्गत गितिकेन्दु गांव के मुण्डासाई एवं दियूरीसाई में अंधविश्वास, कुरीति और डायन-प्रथा के खिलाफ नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। सभा में ग्रामीणों को बीमारी, सर्पदंश और अन्य आपात परिस्थितियों में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की गई।
बोंगा-बुरू को दोष देने से नहीं बचेगी जान
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने कहा कि जागरूकता के अभाव में लोग बीमारी या किसी अनहोनी को लेकर अंधविश्वास का सहारा लेते हैं। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। इसके बाद परिवार और समाज में बोंगा-बुरू को दोष देने जैसी मान्यताएं मजबूत होती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां सामाजिक रूप से गंभीर संकट पैदा करती हैं और कई बार लोग अपनी पारंपरिक प्राकृतिक आस्था एवं मूल संस्कृति से दूर होने लगते हैं। जरूरत है कि समाज वैज्ञानिक सोच, शिक्षा और जागरूकता के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए।
अंधविश्वास के खिलाफ लगातार अभियान
गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने बताया कि बड़े सामाजिक संगठनों के सहयोग से सिंगी एण्ड सिंगी फाउंडेशन तथा नेशनल आदिवासी रिवाइवल एसोसिएशन की ओर से अंधविश्वास, कुरीति और सामाजिक बुराइयों के नाम पर होने वाली आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाने से सामाजिक कुरीतियां खत्म नहीं होंगी। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक भागीदारी जरूरी है।

डायन-प्रथा के खिलाफ ग्रामीणों को किया जागरूक
नुक्कड़ सभा में स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अंधविश्वास, कुरीति और डायन-प्रथा से जुड़े मामलों को उदाहरण सहित समझाया। ग्रामीणों से अपील की गई कि किसी बीमारी, दुर्घटना या आपात स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय चिकित्सकीय सहायता लें तथा किसी व्यक्ति को डायन बताकर प्रताड़ित करने जैसी घटनाओं का विरोध करें।
जागरूक ग्रामीणों से अभियान में जुड़ने की अपील
संगठन के प्रतिनिधियों ने शिक्षित एवं जागरूक ग्रामीणों से ऐसे सामाजिक अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि समाज में बदलाव केवल कुछ लोगों के प्रयास से संभव नहीं है। गांव के युवाओं, महिलाओं और जागरूक लोगों को आगे आकर अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
नुक्कड़ सभा में आदिवासी हो समाज युवा महासभा के अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, सदस्य सागर हेम्ब्रम, उर्मिला लागुरी, विमला कुई, बलेमा कुई, मंजु कुई, मुक्ता कुई, रोयबारी कुई, सीमा कुई, सोमवारी अंगरिया, मादे सिरका, कानूराम हेम्ब्रम, गोरा लागुरी, गुरा गागराई, सुरेश लागुरी, सोमा लागुरी, बल्लेश्वर लागुरी, माधो लागुरी, देवेन्द्र लागुरी, बबलू लागुरी, गंगाराम लागुरी, शिव कुमार लागुरी सहित अन्य लोग मौजूद थे।










