भ्रष्टाचार नक्सल खदान अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम
---Advertisement---

चार महीने पहले अपनाया ईसाई धर्म, अब पांच सदस्यीय परिवार की सरना धर्म में वापसी

---Advertisement---

नोवामुंडी के बुरुसाई में पारंपरिक रीति-रिवाज से हुआ शुद्धिकरण, ग्रामीणों ने किया स्वागत

बीमारी से परेशान होकर धर्म बदला था, अब मूल संस्कृति और परंपरा के साथ जीवन जीने का लिया स्वैच्छिक निर्णय

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू : पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत पेटेएता गांव के बुरुसाई टोला में आदिवासी हो समाज की मूल संस्कृति, परंपरा और सरना धर्म में वापसी का एक मामला सामने आया है। यहां लगभग 35 वर्षीय टुपरा पुरती ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों समेत पांच सदस्यीय परिवार के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शुद्धिकरण अनुष्ठान कर सरना धर्म में वापसी की। बुधवार शाम आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण मुंडाओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों की उपस्थिति रही। ग्रामीणों ने परिवार के फैसले का स्वागत करते हुए समाज में आपसी सहयोग और एकजुटता बनाए रखने पर सहमति जताई।

बीमारी से परेशान होकर अपनाया था दूसरा धर्म

शुद्धिकरण अनुष्ठान से पहले टुपरा पुरती ने ग्रामीणों के बीच अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि लगभग चार महीने पहले उनका परिवार बीमारी से परेशान था। बीमारी से राहत पाने के लिए विभिन्न पुजारियों से पूजा-पाठ कराने के बावजूद परिवार को काफी परेशानी हो रही थी। इसी परिस्थिति में बीमारी ठीक होने की उम्मीद से उनके परिवार ने ईसाई धर्म अपनाया था।

टुपरा पुरती के अनुसार, अब उनका परिवार स्वैच्छिक रूप से अपनी मूल आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सरना धर्म में वापस लौटने का निर्णय ले रहा है। परिवार ने प्रकृति के प्रति अपनी आस्था और पारंपरिक सामाजिक जीवन के साथ आगे बढ़ने की इच्छा जताई।

पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न हुआ शुद्धिकरण अनुष्ठान

बुरुसाई टोला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टुपरा पुरती, उनकी पत्नी शंकरी पुरती (32 वर्ष), पुत्री सुनिका पुरती (9 वर्ष), पुत्री बसंती पुरती (5 वर्ष) और एक वर्षीय पुत्र लक्ष्मण पुरती ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सरना धर्म में वापसी की।

गांव के पुजारी सुखराम पुरती ने हो समाज की पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप शुद्धिकरण अनुष्ठान संपन्न कराया। इस दौरान घर के आंगन में लाल मुर्गे की बलि देने की पारंपरिक रस्म भी निभाई गई। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने परिवार के इस निर्णय का समर्थन किया और समाज की मूल संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने पर जोर दिया।

ग्रामीण मुंडाओं की मौजूदगी में परिवार ने लिया फैसला

इस अवसर पर पेटेएता के ग्रामीण मुंडा बिरसा पुरती, लम्पाहेस्सा के ग्रामीण मुंडा विभीषण लागुरी तथा आदिवासी हो समाज युवा महासभा के विभिन्न पदाधिकारी उपस्थित थे। ग्रामीणों ने कहा कि समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और आपसी भाईचारे को बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने परिवार को सामाजिक सहयोग देने और सुख-दुख में साथ खड़े रहने की बात कही।

गब्बरसिंह हेम्ब्रम बोले—जागरूकता के साथ दूर करनी होंगी सामाजिक कुरीतियां

आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने परिवार की सरना धर्म में वापसी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन परिस्थितियों पर भी गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है, जिनके कारण लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति से दूर होने का निर्णय लेते हैं।

उन्होंने डायन-प्रथा, ओझा-तंत्र और झाड़-फूंक जैसी कुरीतियों के कारण लोगों को होने वाली परेशानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के दौरान पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने से लोग असहाय महसूस करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में वे विभिन्न धार्मिक विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने कहा कि आदिवासी समाज को जागरूक करने के साथ सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

सामाजिक संगठनों से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील

गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने सभी सामाजिक संगठनों से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हो समाज की मूल संस्कृति, परंपरा और पहचान के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इसके साथ ही अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता तथा जरूरतमंद परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में संगठनों को आगे आना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी परिवार को बीमारी और असहायता के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित

शुद्धिकरण कार्यक्रम में जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, उपाध्यक्ष पुतकर लागुरी, सदस्य राजेन्द्र हेम्ब्रम, ग्रामीण मुंडा बिरसा पुरती, लम्पाहेस्सा के मुंडा विभीषण लागुरी, डाकुवा कुंदरा अंगरिया, गंगाराम लागुरी, बिरसा लागुरी, सतारी पुरती, डुरसु पुरती, सुबोध पुरती, सीनू पुरती, तुरी पुरती, लादु पुरती, दिनेश पुरती, सोमा पुरती, लाघोराम पुरती, मानी पुरती, पालो तिरिया, सूर्यमणि पुरती, बसंती पुरती, मनीता पुरती और सोना पुरती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता—बुरुसाई में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए इन मुद्दों पर सामूहिक पहल करने का संदेश दिया गया।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

error: Content is protected !!