कोंगरा नदी में कथित अवैध बालू खनन से किसानों की रैयत भूमि बर्बाद; ग्रामीणों के विरोध के बावजूद धड़ल्ले से जारी कारोबार, पुलिस और खनन विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू। कुमारडूंगी थाना क्षेत्र के आमदा गांव में अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। गड़केशना गांव के समीप कोंगरा नदी से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर बालू निकालकर परिवहन किए जाने तथा आमदा गांव के किसानों की रैयत कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाए जाने से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार अहले सुबह कार्रवाई करते हुए बालू लदे एक ट्रैक्टर को आमदा के खेत से गुजरते हुए पकड़ लिया। वहीं, नदी में बालू लोड कर रहे दो अन्य ट्रैक्टरों को उनके चालकों समेत ग्रामीणों ने पकड़ लिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध बालू कारोबार को लेकर हड़कंप मच गया है।

ग्रामीणों ने यह कदम तब उठाया, जब उनके अनुसार, बार-बार मना करने के बावजूद बालू ढुलाई में लगे ट्रैक्टर चालक किसानों की जमीन से होकर गुजरना बंद नहीं कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से बालू निकालने और उसे दूसरे स्थानों तक पहुंचाने के इस कथित कारोबार में कृषि भूमि को रास्ते के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे खेतों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

खेतों को बालू ढुलाई का रास्ता बनाना पड़ा भारी
सुदर्शन पान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बालू लदे एक ट्रैक्टर को आमदा गांव की रैयत कृषि भूमि से गुजरते हुए पकड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक, बालू माफिया गड़केशना गांव के समीप कोंगरा नदी से दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू निकालकर ढुलाई करते हैं। इस दौरान आमदा गांव के किसानों के खेतों से वाहनों की आवाजाही होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि को इस तरह रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने से खेतों की मिट्टी और जमीन की संरचना प्रभावित हो रही है। जिस जमीन पर किसान खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, उसी जमीन को कथित अवैध बालू कारोबार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन उनके अनुसार, ट्रैक्टरों की आवाजाही पर रोक नहीं लगी। आखिरकार, ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालते हुए बालू लदे ट्रैक्टर को पकड़ लिया।

नदी में बालू लोडिंग करते दो ट्रैक्टर भी पकड़ाए
ग्रामीणों की कार्रवाई केवल खेत से गुजर रहे ट्रैक्टर तक सीमित नहीं रही। ग्रामीणों ने कोंगरा नदी में बालू लोड कर रहे दो अन्य ट्रैक्टरों को भी उनके चालकों समेत पकड़ लिया। इस तरह ग्रामीणों के हाथ तीन ट्रैक्टर लगे—एक आमदा गांव के खेत से बालू लादकर गुजरते हुए और दो नदी में बालू लोड करते समय।

ग्रामीणों की इस कार्रवाई से नदी में बालू लोडिंग और उसके परिवहन की गतिविधियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इन वाहनों के मालिकों की पहचान, बालू के स्रोत तथा खनन और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेजों की जांच जरूरी है। यदि बिना वैध अनुमति के बालू का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा था, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस और खनन विभाग की निगरानी पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि कोंगरा नदी से बालू का कथित अवैध उत्खनन और परिवहन लंबे समय से जारी है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने पुलिस और खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

सवाल यह है कि यदि नदी में बड़े पैमाने पर बालू की लोडिंग और ट्रैक्टरों से ढुलाई हो रही है, तो संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या नदी से बालू निकालने और उसके परिवहन की अनुमति की नियमित जांच की जा रही है? ग्रामीणों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

किसानों की जमीन की सुरक्षा हो, अवैध बालू कारोबार पर लगे रोक
आमदा गांव के ग्रामीणों की मांग है कि कोंगरा नदी में कथित अवैध बालू खनन की जांच कराई जाए, पकड़े गए तीनों ट्रैक्टरों के मालिकों और चालकों की पहचान की जाए तथा खनन एवं परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, किसानों की रैयत कृषि भूमि से होकर बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन को किसी भी कीमत पर बालू ढुलाई का रास्ता नहीं बनने दिया जाएगा। अब देखना यह है कि कुमारडूंगी थाना पुलिस और खनन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और कोंगरा नदी से कथित अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
आमदा में ग्रामीणों की यह कार्रवाई प्रशासन के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि किसानों की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।









