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किरीबुरू में सुरुचि सिंह के भक्ति गीतों पर रातभर झूमे भक्त, महाकाल की धुन पर थिरका पूरा टाउनशिप।

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नवमी की रात भक्ति, संगीत, मस्ती और ठहाकों का संगम बना सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल

भोजपुरी भक्ति गायिका की मनमोहक अदाओं ने बांधा समां, महाप्रबंधक राम सिंह और योगेश प्रसाद राम समेत सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू। मां दुर्गा की भक्ति, भोजपुरी संगीत का जादू, कलाकारों की शानदार प्रस्तुति और श्रद्धालुओं का बेमिसाल उत्साह—इन सबका ऐसा संगम बना कि किरीबुरू टाउनशिप का सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल नवमी की रात भक्ति और मस्ती के रंग में पूरी तरह सराबोर हो गया। सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमेटी, टाउनशिप, किरीबुरू के तत्वावधान में आयोजित भव्य भक्ति संध्या में महाकाल म्यूजिकल ग्रुप ने ऐसा समां बांधा कि रात कब बीतने लगी, इसका एहसास तक लोगों को नहीं हुआ।

मशहूर भोजपुरी भक्ति गायिका सुरुचि सिंह और उनकी टीम के कलाकारों ने मां दुर्गा, भगवान श्रीराम, बजरंगबली हनुमान और छठी मैया की महिमा से जुड़े गीतों की ऐसी झड़ी लगाई कि पूजा पंडाल तालियों, जयकारों और संगीत की गूंज से देर रात तक गुंजायमान रहा। महिला हो या पुरुष, अधिकारी हों या कर्मचारी—भक्ति संगीत की लहर उठते ही हर कोई अपने स्थान से उठकर झूमने को मजबूर हो गया।

सुरुचि सिंह की आवाज का जादू, भक्तों के सिर चढ़कर बोला भक्ति का सुरूर

भक्ति संध्या की मुख्य आकर्षण भोजपुरी भक्ति गायिका सुरुचि सिंह रहीं। अपनी मधुर आवाज, ऊर्जावान अंदाज और आकर्षक मंचीय प्रस्तुति से उन्होंने शुरुआत से ही दर्शकों का दिल जीत लिया। एक के बाद एक भक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को ऐसा रंग दिया कि पंडाल में मौजूद श्रद्धालु माता रानी की भक्ति में डूबते चले गए।

कभी मां दुर्गा की महिमा का गुणगान, कभी प्रभु श्रीराम के नाम की महिमा, तो कभी संकटमोचन हनुमान की भक्ति—सुरुचि सिंह ने अपने गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आस्था के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराया। उनके गीतों पर तालियां बजती रहीं, जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों के कदम लगातार थिरकते रहे।

सुरुचि सिंह की गायकी में जहां भक्ति का भाव था, वहीं उनकी प्रस्तुति में ऐसा उत्साह था कि दर्शक खुद को नाचने से रोक नहीं पा रहे थे। मंच से उठती संगीत की लहरें सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच रही थीं।

मंच से सीधे भीड़ के बीच पहुंचीं सुरुचि, भक्तों को नचाकर बढ़ाया उत्साह

सुरुचि सिंह की खासियत केवल उनकी गायकी ही नहीं, बल्कि दर्शकों से जुड़ने का उनका अनोखा अंदाज भी रहा। वह मंच पर खड़े होकर केवल गीत सुनाने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि महिलाओं और पुरुषों के बीच पहुंचकर उन्हें भी नृत्य करने के लिए प्रेरित करती नजर आईं।

उनकी इस चुलबुली और ऊर्जावान प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। जो श्रद्धालु शुरुआत में बैठकर कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे, वे भी धीरे-धीरे उठकर संगीत की धुन पर थिरकने लगे। देखते ही देखते पंडाल में जगह-जगह नृत्य करते श्रद्धालुओं की टोली नजर आने लगी।

किसी के हाथ भक्ति में ऊपर उठे हुए थे, तो कोई तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कदम मिलाकर नाच रहा था। सुरुचि सिंह की एक मुस्कान, एक इशारा और गीतों के बीच उनका उत्साह बढ़ाने वाला अंदाज लोगों को बार-बार झूमने पर मजबूर कर रहा था।

कहने का अंदाज कुछ यूं था कि माता रानी की भक्ति में दिल खोलकर झूमिए! फिर क्या था—पंडाल में बैठे-बैठे कार्यक्रम देखने आए कई श्रद्धालुओं के पैर भी मानो खुद-ब-खुद नाचने लगे। भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि दर्शक और कलाकार के बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई।

महाप्रबंधक भी नहीं रोक पाए अपने कदम, अधिकारी और आम श्रद्धालु एक रंग में रंगे

इस भक्ति संध्या में किरीबुरू के महाप्रबंधक राम सिंह, महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम समेत शहर के सैकड़ों महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक, सभी ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया।

भक्ति संगीत ने ऐसा माहौल बनाया कि पद, प्रतिष्ठा और औपचारिकता पीछे छूट गई। हर कोई माता रानी के भजनों और संगीत की धुनों में खोया नजर आया। तालियों की गूंज और नृत्य करते लोगों का उत्साह कार्यक्रम की लोकप्रियता को बयां कर रहा था।

नवमी की रात सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं रहा, बल्कि श्रद्धा, सांस्कृतिक उल्लास और सामूहिक आनंद का जीवंत मंच बन गया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।

नन्हे कलाकार ने भी लूटी महफिल, ऑक्टोपैड पर थाप सुनकर लोग रह गए हैरान

कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा दृश्य भी सामने आया, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सुरुचि सिंह का लगभग तीन वर्षीय नन्हा बेटा दोनों हाथों में डंडियां पकड़कर ऑक्टोपैड बजाता रहा। इतनी कम उम्र में संगीत की धुन के साथ उसकी सक्रियता और वाद्ययंत्र बजाने के अंदाज ने लोगों को खूब आकर्षित किया।

एक ओर मां अपनी आवाज से भक्तों को झुमा रही थीं, तो दूसरी ओर उनका नन्हा बेटा अपनी छोटी-छोटी थापों से संगीत की दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था। यह दृश्य कार्यक्रम की यादगार झलकियों में शामिल हो गया।

नन्हे कलाकार को देखकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। संगीत, भक्ति और पारिवारिक आत्मीयता का यह छोटा-सा दृश्य पूरी शाम के आकर्षक पलों में से एक रहा। बड़े कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच इस नन्हे सितारे ने भी अपनी अलग पहचान बना ली।

प्रिया राज, नवीन, गोविंद और समीर राय ने भी बांधा समां

महाकाल म्यूजिकल ग्रुप की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सुरुचि सिंह के साथ उनकी टीम के गायक प्रिया राज, नवीन, गोविंद और समीर राय ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मनोरंजन किया। कलाकारों ने विभिन्न भक्ति गीतों के माध्यम से माहौल को लगातार ऊर्जावान बनाए रखा।

टीम के कलाकारों की गायकी और संगीत संयोजन ने कार्यक्रम को विविधता प्रदान की। हर प्रस्तुति के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। कहीं भक्ति की गंभीरता महसूस हुई, तो कहीं गीतों की लय पर लोग झूमते और तालियां बजाते नजर आए।

पूरे कार्यक्रम में भक्ति और मनोरंजन का ऐसा तालमेल बना रहा कि श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर संगीत, आस्था और उल्लास के अनेक रंग देखने को मिले।

20 अक्टूबर को फिर सजेगी भक्ति की महफिल, शाम 7:30 बजे से कार्यक्रम

नवमी की रात मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद श्रद्धालुओं के लिए एक और अवसर है। सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमेटी, टाउनशिप, किरीबुरू के पूजा पंडाल में आज 20 अक्टूबर को शाम 7:30 बजे से सुरुचि सिंह एंड टीम की भक्ति संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

पिछली रात की शानदार प्रस्तुति को देखते हुए संगीत प्रेमियों और मां दुर्गा के भक्तों में अगले कार्यक्रम को लेकर भी उत्साह रहने की उम्मीद है। सुरुचि सिंह और उनकी टीम एक बार फिर भक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आनंदित करने के लिए उपस्थित होंगी।

इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम के दौरान दिलीप झा, अरबिंद चौहान, दीपक ठाकुर, विनोद सिंह, जलेश्वर गिरी, सुरेश पात्रों, सूरज लाल, अनिल पांडे, सूरज सिंह, उज्जेश्वर राय, संजीत मिश्रा, संजीव सिंह, धीरेंद्र कुमार, निश्चय, जगमोहन सामद समेत अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, किरीबुरू टाउनशिप में नवमी की रात आयोजित भक्ति संध्या ने दुर्गापूजा के उल्लास को नई ऊंचाई दी। मां दुर्गा की आराधना के साथ संगीत, नृत्य और सामूहिक उत्साह का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया। सुरुचि सिंह की गायकी, उनकी मंचीय चंचलता और नन्हे बेटे की ऑक्टोपैड पर थाप ने इस शाम को ऐसा रंग दिया कि भक्ति के साथ मुस्कान और खुशी भी हर चेहरे पर नजर आई।

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