बड़ाजामदा थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव की पहल से बनी नई राह, भक्तों की धार्मिक भावनाओं को मिलेगा सम्मान
40 फीट ऊंचे पुल से प्रतिमाएं गिराने की मजबूरी होगी खत्म
स्थानीय व्यवसायियों के सहयोग से जेसीबी की व्यवस्था, रैयत ग्रामीणों के सहयोग से तैयार हुआ रास्ता
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
बड़ाजामदा। मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़ा पवित्र अनुष्ठान है। इसी आस्था को सम्मान देने की दिशा में बड़ाजामदा थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव ने सराहनीय पहल की है। अब बड़ाजामदा क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन हाथी चौक स्थित कारो नदी में सम्मानजनक और सुगम तरीके से किया जा सकेगा। इसके लिए नदी तट तक पहुंचने का रास्ता तैयार कराया गया है।

पुल से प्रतिमाएं गिराने की पुरानी व्यवस्था होगी समाप्त
अब तक बड़ाजामदा क्षेत्र की विभिन्न पूजा समितियां कारो नदी के लगभग 40 फीट ऊंचे पुल से मां दुर्गा की प्रतिमाओं को नीचे नदी में गिराकर विसर्जित करने को मजबूर थीं। नदी में पानी कम रहने और तल में लौह अयस्क के पत्थरों की चट्टानें मौजूद होने के कारण प्रतिमाएं नीचे गिरते ही बुरी तरह खंडित हो जाती थीं। इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती थी और विसर्जन के दौरान मन में पीड़ा बनी रहती थी।

थाना प्रभारी की पहल से निकला समाधान
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों ने थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव से प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित और धार्मिक मर्यादा के अनुरूप बनाने का आग्रह किया था। पूजा समितियों की इस मांग पर पहल करते हुए थाना प्रभारी ने स्थानीय व्यवसायियों के सहयोग से जेसीबी मशीन की व्यवस्था कराई। वहीं, बोलानी गांव के रैयत ग्रामीणों से बातचीत कर उनके खेतों से होकर नदी तट तक पहुंचने के लिए रास्ता तैयार कराया गया।
व्यवस्था में जनसहयोग की दिखी मिसाल
इस पहल में स्थानीय व्यवसायियों और रैयत ग्रामीणों का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। आपसी समन्वय से मुख्य सड़क के किनारे से नदी तट तक पहुंचने का मार्ग तैयार होने से अब प्रतिमाओं को पुल की ऊंचाई से नीचे गिराने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इससे विसर्जन की प्रक्रिया अधिक सहज होगी और मां दुर्गा की प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ जल में प्रवाहित करने का अवसर मिलेगा।

आस्था का सम्मान, प्रशासन की संवेदनशील पहल
दुर्गा पूजा समितियों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान धार्मिक आस्था के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण है। थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव की पहल ने यह संदेश दिया है कि प्रशासन, स्थानीय व्यवसायियों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से धार्मिक परंपराओं को सम्मानजनक स्वरूप दिया जा सकता है। नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं में संतोष है और उम्मीद है कि इस बार मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा, सम्मान और धार्मिक मर्यादा के साथ संपन्न होगा।









