सीजीएम संजय कुमार सिंह और महिला समिति की अध्यक्षा रंजिता सिंह ने नाभि में बारूदी तीर मारकर किया रावण दहन
झारखंड और ओड़िशा से पहुंचे हजारों दर्शक, ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजा फुटबॉल मैदान
देश के छह प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों समेत सेल के कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
सेल कर्मी राज नारायण शर्मा की टीम ने तैयार किया 65 फीट ऊंचा विशाल रावण, पुलिस और सीआईएसएफ ने संभाली सुरक्षा की कमान
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर मर्यादा की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मेघाहातुबुरु में भव्यता, उत्साह और आकर्षण के साथ मनाया गया। मेघाहातुबुरु दुर्गा पूजा कमेटी के तत्वावधान में स्थानीय फुटबॉल मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा मैदान और आसपास का इलाका श्रद्धालुओं एवं दर्शकों से गुलजार हो उठा। लगभग 65 फीट ऊंचे विशाल रावण के दहन और आसमान को रंग-बिरंगी रोशनी से भर देने वाली शानदार आतिशबाजी को देखने के लिए झारखंड और ओड़िशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 10 हजार लोग पहुंचे।

शाम ढलते ही मैदान में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। बच्चों में रावण दहन देखने का उत्साह था, तो बड़े-बुजुर्गों और युवाओं में विजयादशमी के इस पारंपरिक आयोजन को लेकर खासा उमंग दिखाई दिया। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मैदान में उत्साह का माहौल और अधिक गहराता गया। अंततः वह बहुप्रतीक्षित क्षण आया, जब विशालकाय रावण अग्नि की लपटों में समा गया और पूरा मैदान जय श्री राम के नारों से गूंज उठा।

मुख्य अतिथियों ने नाभि में बारूदी तीर मारकर किया रावण दहन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेल मेघाहातुबुरु के मुख्य महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह और महिला समिति की अध्यक्षा रंजिता सिंह ने रावण की नाभि में बारूदी तीर मारकर रावण दहन की परंपरा को संपन्न किया। जैसे ही बारूदी तीर रावण की नाभि पर लगा, दर्शकों की निगाहें विशालकाय पुतले पर टिक गईं। देखते ही देखते रावण दहन का दृश्य आकर्षण का केंद्र बन गया और मैदान में मौजूद लोगों ने जय श्री राम के जयघोष के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का आनंद लिया।
रावण दहन केवल एक विशाल पुतले को जलाने का आयोजन नहीं था, बल्कि यह संदेश भी दे रहा था कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी ही शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। इसी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा ने मेघाहातुबुरु के इस आयोजन को विशेष बना दिया।

घंटों चली आतिशबाजी, रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया आसमान
रावण दहन से पहले घंटों तक आतिशबाजी का दौर चलता रहा। आसमान में उठती रंग-बिरंगी रोशनी, चमकते पटाखों और आतिशबाजी के मनमोहक नजारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मैदान में मौजूद लोग बार-बार आसमान की ओर नजरें उठाकर इस नजारे का आनंद लेते दिखाई दिए। बच्चों और परिवारों के लिए यह दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

आतिशबाजी और रावण दहन के बीच मैदान में उत्साह लगातार बना रहा। हर शानदार दृश्य के साथ लोगों की तालियां और जयघोष वातावरण में नई ऊर्जा भर रहे थे। मेघाहातुबुरु का फुटबॉल मैदान देर शाम तक विजयादशमी के उल्लास, धार्मिक आस्था और उत्सवी उमंग का साक्षी बना रहा।
छह प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
इस वर्ष के आयोजन की खास बात यह रही कि देश के छह प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने समारोह को एक अलग पहचान दी। इसके अलावा सेल प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों में महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम, महाप्रबंधक के. बी. थापा, महाप्रबंधक नवीन कुमार सोनकुश्रे, महाप्रबंधक मनोज कुमार, उप महाप्रबंधक सरस कुमार साहू, डॉ. मनोज कुमार, अवधेश कुमार, सीआईएसएफ के उप समादेष्टा तथा किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
सेल के वरिष्ठ अधिकारियों, सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को सामुदायिक सहभागिता का व्यापक स्वरूप प्रदान किया। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ यह अवसर विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों के आपसी मेल-मिलाप का माध्यम भी बना।

सेल कर्मी राज नारायण शर्मा की टीम ने तैयार किया 65 फीट का विशाल रावण
मेघाहातुबुरु के रावण दहन कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण लगभग 65 फीट ऊंचा विशाल रावण रहा। इस भव्य पुतले का निर्माण सेल कर्मी राज नारायण शर्मा के नेतृत्व में उनकी टीम ने किया था। विशालकाय रावण को तैयार करने में टीम की मेहनत, तकनीकी कौशल और आयोजन के प्रति समर्पण की झलक साफ दिखाई दी।
रावण दहन के लिए तैयार इस विशाल पुतले ने मैदान में प्रवेश करते ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। बच्चे हों या बड़े, हर कोई इसकी ऊंचाई और बनावट को देखने के लिए उत्सुक नजर आया। आतिशबाजी के बीच जब रावण दहन हुआ, तो वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा आधुनिक उत्सवी आकर्षण के साथ जीवंत हो उठी।
इस आयोजन की सफलता में पुतले के निर्माण से जुड़े कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। राज नारायण शर्मा के नेतृत्व में टीम द्वारा तैयार किया गया रावण समारोह की भव्यता का प्रमुख केंद्र बना रहा।
मेले में खाने-पीने से लेकर खिलौनों तक की दुकानें, बच्चों ने भी उठाया आनंद
रावण दहन कार्यक्रम के साथ फुटबॉल मैदान और आसपास के इलाके में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। खाने-पीने की दुकानों से लेकर ग्रोसरी, खिलौने, फास्ट फूड और आइसक्रीम की दुकानें सजी थीं। इन दुकानों पर लोगों की आवाजाही बनी रही। आतिशबाजी और रावण दहन देखने आए परिवारों ने मेले में घूमने-फिरने और खरीदारी का भी आनंद उठाया।
बच्चों के लिए खिलौनों और आइसक्रीम की दुकानें खास आकर्षण बनी रहीं, वहीं युवाओं और अन्य दर्शकों की भीड़ फास्ट फूड एवं खाने-पीने के स्टॉलों पर दिखाई दी। इस तरह धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय स्तर पर अस्थायी दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी अपनी दुकानें लगाने का अवसर मिला।

पुलिस और सीआईएसएफ ने संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी
लगभग 10 हजार लोगों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था इस आयोजन का महत्वपूर्ण पहलू रही। झारखंड पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाली। भारी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी के बावजूद आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती अहम रही।
इस बार आयोजन कमेटी की ओर से भी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई थी। दर्शकों की भारी भीड़, आतिशबाजी और रावण दहन जैसे कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए आयोजन को सफल बनाने में कमेटी की व्यवस्था और सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

‘जय श्री राम’ के जयघोष के साथ विजयादशमी का संदेश
रावण दहन के दौरान पूरा मेघाहातुबुरु क्षेत्र जय श्री राम के नारों से गूंजता रहा। विशाल रावण का अग्नि में समाना और आसमान में आतिशबाजी की चमक लोगों के लिए यादगार दृश्य बन गया। झारखंड और ओड़िशा से आए दर्शकों की भारी मौजूदगी ने इस आयोजन को क्षेत्रीय स्तर पर विशेष आकर्षण प्रदान किया।
मेघाहातुबुरु दुर्गा पूजा कमेटी का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा, सामूहिक सहभागिता और उत्सवी उल्लास का सुंदर संगम बनकर सामने आया। 65 फीट ऊंचे रावण का दहन, घंटों चली आतिशबाजी, हजारों लोगों की भागीदारी, वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने विजयादशमी की शाम को यादगार बना दिया।

संदेश स्पष्ट था—अहंकार का अंत निश्चित है और सत्य की विजय ही सनातन परंपरा का मूल आधार है। इसी विश्वास के साथ मेघाहातुबुरु में विजयादशमी का उत्सव संपन्न हुआ और लोग अपने साथ आतिशबाजी, रावण दहन तथा सामूहिक उल्लास की यादें लेकर लौटे।










