ग्रामीणों ने पकड़ी गोवंश से लदी पिकअप, तस्कर ने फोन पर थानेदार से कराई बात; सूचना देने वालों को ही मिली धमकी
ओडिशा से बंगाल तक गो-तस्करी के सुरक्षित कॉरिडोर का आरोप, बालू तस्करी, जुआ, नशा और रेलवे स्क्रैप चोरी के संगठित नेटवर्क पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट शैलेश सिंह
मनोहरपुर (पश्चिमी सिंहभूम)। मनोहरपुर थाना क्षेत्र में कथित गो-तस्करी, अवैध बालू कारोबार और संगठित आपराधिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय जागरूक नागरिकों एवं ग्रामीणों ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि क्षेत्र में अवैध कारोबार का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि कानून का भय समाप्त होता दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर आरोप स्थानीय थाना प्रभारी की कथित भूमिका और तस्करों को संरक्षण मिलने को लेकर लगाए गए हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि लगातार शिकायतें और साक्ष्य सामने आने के बावजूद संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच 30 अक्टूबर की देर रात ऊंधन क्षेत्र में ग्रामीणों ने ओडिशा से बंगाल की ओर जा रही गोवंश से लदी एक पिकअप वैन (JH 22E 6721) को रोक लिया। इस घटना के बाद कथित तौर पर तस्कर और थाना प्रभारी के बीच फोन पर हुई बातचीत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना शेष है।
रात 1:09 बजे पकड़ी गई पिकअप, फोन कॉल से खुला कथित नेटवर्क
स्थानीय नागरिकों की ओर से जारी विवरण के अनुसार, 30 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 1:09 बजे ऊंधन क्षेत्र में ग्रामीणों ने पिकअप वैन संख्या JH 22E 6721 को रोका। वाहन में गोवंश को कथित रूप से बेहद अमानवीय तरीके से ठूंसकर ले जाया जा रहा था।

दिए गए विवरण में घटनास्थल के जीपीएस निर्देशांक 22.378974° उत्तरी अक्षांश और 85.186328° पूर्वी देशांतर दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि वाहन रोके जाने के बाद चालक ने बेखौफ होकर मनोहरपुर थाना प्रभारी को फोन लगाया।
आरोप है कि चालक ने फोन पर कहा कि तय रकम देने के बावजूद कुछ लोगों ने उसकी गाड़ी रोक दी है। इसके बाद कथित तौर पर फोन के माध्यम से मौके पर मौजूद ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों को वहां से हट जाने तथा परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
यदि फोन पर हुई बातचीत और भुगतान संबंधी आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला महज गो-तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही का भी गंभीर विषय बन जाएगा।
तस्कर का दावा- हर रात गुजरती हैं 6 से 7 गाड़ियां!
ग्रामीणों द्वारा जारी आरोपों में सबसे चौंकाने वाला दावा गो-तस्करी के कथित नियमित नेटवर्क को लेकर है। बताया गया है कि पकड़े गए वाहन के चालक के कथित बयान के अनुसार, हर रात लगभग 6 से 7 वाहन ओडिशा से बंगाल की ओर मनोहरपुर के रास्ते गुजरते हैं।

यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के बावजूद पुलिस की नियमित जांच और रात्रि गश्ती व्यवस्था प्रभावी क्यों नहीं है?
क्या इन वाहनों के परिचालन के लिए कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? क्या सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस की निगरानी कमजोर है? इन सभी बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच की जरूरत है।
वरीय अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया, ड्राइवर से संपर्क करने की बात क्यों?
मामले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों और एक सामाजिक संस्था के प्रतिनिधियों का दावा है कि घटनास्थल से थाना प्रभारी और वरीय पुलिस अधिकारियों को फोन कर सूचना देने का प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आरोप है कि सूचना देने वालों को संबंधित अधिकारी के ड्राइवर से बात करने के लिए कहा गया।
यदि किसी गंभीर आपराधिक घटना की सूचना देने के लिए नागरिकों को सीधे जिम्मेदार पुलिस पदाधिकारी के बजाय निजी ड्राइवर के माध्यम से संपर्क करने को कहा जाता है, तो यह पुलिस की जवाबदेही और शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
आखिर अपराध की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है या सूचना देने वालों को इधर-उधर भटकाना?
अवैध बालू कारोबार पर भी संरक्षण के गंभीर आरोप
मनोहरपुर थाना क्षेत्र में अवैध बालू उत्खनन और परिवहन को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि डीपा पंचायत में अवैध बालू से जुड़े ट्रैक्टरों की जब्ती के मामले के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों का दावा है कि आज भी बिना वैध चालान के प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टरों से बालू का उत्खनन, परिवहन और डंपिंग की जा रही है। इस पूरे कारोबार में कथित रूप से कुछ प्रभावशाली लोगों और पुलिसकर्मियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी और प्राकृतिक संसाधनों का भी लगातार दोहन हो रहा है।
जुआ, नशा और रेलवे स्क्रैप चोरी का भी कथित अड्डा
स्थानीय नागरिकों ने सरगीडीह क्षेत्र में खुलेआम जुआ संचालन का आरोप लगाया है। दावा किया गया है कि इस संबंध में जीपीएस आधारित साक्ष्य भी उपलब्ध हैं।
इसके अलावा बच्चों के माध्यम से नशीले पदार्थों की बिक्री कराए जाने और मुख्य सड़क के किनारे स्थित कुछ कबाड़ी ठिकानों पर रेलवे ट्रैक से कथित रूप से चोरी किए गए लोहे तथा चोरी की मोटरसाइकिलों को जमा करने और काटने का आरोप भी लगाया गया है।
यदि इन गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो यह स्थानीय कानून-व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चुनौती होगी। खासकर नाबालिग बच्चों को नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जाने का आरोप बाल संरक्षण और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।
बैंक खातों, वीडियो और जीपीएस साक्ष्यों की जांच की मांग
स्थानीय जागरूक नागरिकों एवं प्रत्यक्षदर्शी प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उनके पास कथित अवैध गतिविधियों से संबंधित वीडियो, डिजिटल लोकेशन और बैंक खातों के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इन साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी पुलिसकर्मी या पदाधिकारी के खाते में अवैध कारोबार से जुड़ी रकम पहुंचने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले की जांच स्थानीय थाना स्तर से कराने के बजाय किसी स्वतंत्र वरीय पुलिस अधिकारी या विशेष जांच दल से कराने की मांग भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
पुलिस मुख्यालय और सरकार से सीधे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने पुलिस प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
- यदि हर रात 6 से 7 गो-तस्करी वाहनों के गुजरने का दावा सही है, तो पुलिस की रात्रि गश्ती व्यवस्था क्या कर रही है?
- पिकअप चालक द्वारा कथित रूप से थाना प्रभारी को फोन करने और तय रकम देने की बात कहने की सच्चाई क्या है?
- ग्रामीणों द्वारा वाहन पकड़े जाने के बाद पुलिस ने तत्काल क्या कार्रवाई की?
- डीपा पंचायत में अवैध बालू परिवहन की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई प्रभावी क्यों नहीं हुई?
- सरगीडीह में कथित जुआ, नशा और रेलवे स्क्रैप चोरी के नेटवर्क की जांच कब होगी?
- यदि बैंक खातों, वीडियो और जीपीएस साक्ष्यों में अवैध गतिविधियों के प्रमाण हैं, तो उनकी जांच के लिए स्वतंत्र टीम गठित क्यों नहीं की जा रही है?

थाना प्रभारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय जागरूक नागरिकों एवं प्रत्यक्षदर्शी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार, पुलिस मुख्यालय और वरीय पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि संबंधित थाना प्रभारी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच के दौरान आवश्यकतानुसार उन्हें वर्तमान जिम्मेदारी से हटाया जाए।
साथ ही पकड़ी गई पिकअप वैन, उसमें लदे गोवंश, चालक के बयान, फोन कॉल रिकॉर्ड, कथित आर्थिक लेन-देन और घटनास्थल के डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जाए।
मनोहरपुर में कानून का राज कायम रहना चाहिए, न कि अपराधियों के कथित सिंडिकेट का। यदि ग्रामीणों के आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक थाना क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। अब देखना यह है कि पुलिस मुख्यालय इन गंभीर आरोपों पर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई करता है या फिर शिकायतें और साक्ष्य फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं।








