थाना प्रभारी रोहित कुमार की दिन-रात की मेहनत लाई रंग, क्वार्टर चोरी कांड का खुलासा; लैपटॉप, मोबाइल, नकदी समेत चोरी का सामान बरामद, वारदात में इस्तेमाल महंगी कार भी जब्त
हाईटेक अंदाज में अपराध को देते थे अंजाम
रिपोर्ट शैलेश सिंह
किरीबुरु। लौहांचल के किरीबुरु शहर में बंद क्वार्टरों को निशाना बनाकर चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य चोरी जैसी वारदात को अंजाम देने के लिए महंगी कार का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी को शक न हो। सामान्य वाहन की तरह महंगी कार से इलाके में घूमना और फिर मौका देखकर बंद क्वार्टरों का ताला तोड़कर कीमती सामान उड़ा लेना इनके अपराध का तरीका बताया जा रहा है। किरीबुरु पुलिस ने इस मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का लैपटॉप, मोबाइल, नकदी समेत वारदात में इस्तेमाल की गई कार बरामद की है।

25 सितंबर को बंद क्वार्टर में हुई थी बड़ी चोरी
मामला किरीबुरु टाउनशिप के डी-टाइप क्वार्टर नंबर 33 से जुड़ा है। प्राप्त पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को राहुल कुमार यादव (41), पिता शिवशंकर यादव, निवासी क्वार्टर नंबर 33, डी-टाइप टाउनशिप, किरीबुरु ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि अज्ञात चोरों ने उनके क्वार्टर का ताला तोड़कर लैपटॉप, मोबाइल फोन, नकदी और जेवरात की चोरी कर ली है। इस मामले में किरीबुरु थाना कांड संख्या 15/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026 को बीएनएस की धारा 331(4)/305 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
थाना प्रभारी की लगातार सक्रियता से खुलने लगी गिरोह की परतें
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के निर्देश पर सहायक पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षु) राजकुमार जयराजू के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। इस पूरे मामले में किरीबुरु थाना प्रभारी रोहित कुमार ने लगातार सक्रियता दिखाते हुए दिन-रात मेहनत की। आरोपियों की पहचान से लेकर चोरी के सामान की बरामदगी तक पुलिस टीम लगातार छापेमारी और जांच में जुटी रही। पुलिस की इसी निरंतर कार्रवाई का परिणाम रहा कि एक-एक कर गिरोह से जुड़े आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।
3 अक्टूबर को पहली गिरफ्तारी, अब तीन और आरोपी दबोचे गए
पुलिस ने इस कांड में पहले ही 3 अक्टूबर 2026 को अप्राथमिकी अभियुक्त अफताब खान उर्फ टेंगरु (19), पिता जमीर हुसैन, निवासी मेन मार्केट, किरीबुरु को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद पुलिस चोरी गए सामान की बरामदगी और अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी।
इसी क्रम में 29 अक्टूबर को पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें नरेश लागुरी (28), पिता जयसिंह लागुरी, वर्तमान पता मेघाहातुबुरु क्वार्टर नंबर 4/7, स्थायी पता ग्राम सिलदौरी, थाना जेटेया; चन्द्र मोहन तांती उर्फ डोन्डे (23), पिता उमाकांत तांती, निवासी लेम्पाहेस्सा, थाना जेटेया तथा लेबया लागुरी उर्फ कृष्णा (20), पिता प्रधान लागुरी, निवासी लेम्पाहेस्सा, थाना जेटेया शामिल हैं।

चोरी का सामान बरामद, कार भी पुलिस के कब्जे में
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की गई कई कीमती वस्तुएं बरामद की हैं। बरामद सामान में शामिल हैं—
- लेनोवो कंपनी का एक लैपटॉप।
- वनप्लस 9 5G का एक मोबाइल फोन।
- कुल 5,000 रुपये नकद।
- वारदात में इस्तेमाल की गई एक महंगी कार, जिसका पंजीकरण नंबर JH05AG 1128 है।
महंगी कार का इस्तेमाल इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। आरोपियों द्वारा कार से आवाजाही करने का उद्देश्य अपनी गतिविधियों को सामान्य दिखाना और लोगों के संदेह से बचना बताया जा रहा है। हालांकि, गिरोह की अन्य वारदातों और कार के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर पुलिस अनुसंधान के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में बनी थी विशेष टीम
इस कार्रवाई में सहायक पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षु) राजकुमार जयराजू के नेतृत्व में गठित टीम में किरीबुरु के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी विनीत कुमार किड़ो, किरीबुरु अंचल पुलिस निरीक्षक समीर तिर्की, थाना प्रभारी रोहित कुमार, अनुसंधानकर्ता जितेंद्र कुमार, रंजीत कुमार मुंडा तथा किरीबुरु थाना के सशस्त्र बल शामिल थे।
पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप
किरीबुरु जैसे शांत खनन क्षेत्र की टाउनशिप में बंद क्वार्टरों को निशाना बनाकर चोरी की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। खास बात यह है कि अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए महंगी कार का सहारा लिया। लेकिन पुलिस की लगातार निगरानी, तकनीकी एवं अनुसंधानात्मक कार्रवाई और छापेमारी के सामने उनकी चालाकी काम नहीं आई।
थाना प्रभारी रोहित कुमार की सक्रियता और पूरी टीम की लगातार मेहनत से मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा चोरी के सामान की बरामदगी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब पुलिस के सामने इस बात की जांच करना भी अहम होगा कि गिरफ्तार आरोपी क्षेत्र में हुई अन्य चोरी की घटनाओं में शामिल रहे हैं या नहीं तथा इस गिरोह के तार कहीं और तो नहीं जुड़े हैं।








