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सेल की किरीबुरू–मेघाहातुबुरु खदानों में स्क्रैप चोरी का सिलसिला जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल!

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दिन और रात के अंधेरे में खदानों से स्क्रैप चोरी कर मालगाड़ियों के जरिए ओडिशा ले जाने का आरोप, पुलिस-CISF-रेल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जरूरी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू/मेघाहातुबुरु। सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु खदानों में स्क्रैप चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। खदानों से कीमती लोहे, तांबे, रोलर, केबल तार और अन्य धातुओं के स्क्रैप की लगातार चोरी होने से सेल प्रबंधन और स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं। आरोप है कि चोर दिन और रात के अंधेरे में खदानों में घुसकर स्क्रैप चोरी करते हैं और उसे रेलवे ट्रैक के किनारे जंगलों में छिपाकर रखने के बाद लौह अयस्क लेकर ओडिशा की ओर जाने वाली मालगाड़ियों के जरिए बाहर ले जाते हैं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खदानों की सुरक्षा में तैनात CISF, स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद स्क्रैप चोरी का सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा है? यदि चोरी का माल मालगाड़ियों के जरिए बाहर पहुंचाया जा रहा है, तो इसकी रोकथाम के लिए संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और संयुक्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।

 

लौह अयस्क लोड मालगाड़ी में लोड सेल मेघाहातुबुरु खदान से चोरी किया रोलर

खदानों से चोरी, जंगलों में छिपाकर रखने और मालगाड़ियों से ले जाने का आरोप

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चोर दिन अथवा रात के समय सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु खदानों में प्रवेश कर लोहे, तांबे, रोलर और अन्य कीमती स्क्रैप की चोरी करते हैं। इसके बाद चोरी के सामान को रेलवे ट्रैक के किनारे जंगलों में छिपाकर रख दिया जाता है।

आरोप है कि रेलवे साइडिंग पर मालगाड़ियों में लौह अयस्क की लोडिंग पूरी होने के बाद जब ठेका मज़दूर डिब्बों के ऊपर प्लास्टिक बांध वहां से चले जाते है, तब जंगल से आकर कुछ संदिग्ध चोर लोग उस प्लास्टिक की रस्सियां खोलकर लौह अयस्क के ऊपर स्क्रैप लाद देते हैं। इसके बाद मालगाड़ी के साथ स्क्रैप ओडिशा की ओर ले जाने और लाठीकट्टा या अन्य स्थानों पर उतारने की बात सामने आ रही है।

यदि इस तरीके से चोरी की जा रही है, तो रेलवे साइडिंग से लेकर मालगाड़ियों की आवाजाही और संभावित गंतव्य तक निगरानी बढ़ाना आवश्यक है। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित स्थानों पर औचक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जानी चाहिए।

कन्वेयर बेल्ट और केबल तार तक की चोरी, हर महीने लाखों के नुकसान का दावा

स्क्रैप चोरी का मामला केवल लोहे के छोटे-मोटे टुकड़ों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। आरोप है कि चोर कई बार सेल की कन्वेयर बेल्ट और केबल तार तक काटकर ले जाते हैं। इससे खदानों की औद्योगिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने के साथ मरम्मत और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि लगातार हो रही चोरी से सेल प्रबंधन को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन आधिकारिक आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

लगातार चोरी की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रि गश्त, निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं चोरी के स्क्रैप और दर्जनों रोलर

बीते दिनों करमपदा के ग्रामीणों द्वारा मालगाड़ी से संबंधित चोरी के कथित स्क्रैप को बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बताया गया है कि किरीबुरू पुलिस को भी ग्रामीणों और मुंडाओं से ऐसी घटनाओं की सूचना मिली है।

इससे पहले CISF ने रात के समय मेघाहातुबुरु खदान से दो कैंपर वाहनों में चोरी कर ले जाए जा रहे दर्जनों रोलर पकड़े थे और उन्हें पुलिस के हवाले किया था।

इन घटनाओं के बावजूद यदि स्क्रैप चोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो जरूरी है कि पूर्व में पकड़े गए सामान, वाहनों और मामलों की जांच को वर्तमान शिकायतों से जोड़कर देखा जाए। इससे चोरी के तरीके, संभावित नेटवर्क और चोरी के माल की आवाजाही से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

पुलिस, CISF और रेल पुलिस संयुक्त रूप से चलाएं औचक अभियान

स्क्रैप चोरी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अब अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई के बजाय किरीबुरू थाना पुलिस, CISF और रेल पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर रात्रिकालीन औचक जांच अभियान चलाने की जरूरत है।

इस अभियान के तहत सेल की दोनों खदानों के संवेदनशील क्षेत्रों, रेलवे साइडिंग, रेल ट्रैक के आसपास के जंगलों और करमपदा स्टेशन पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। मालगाड़ियों की जांच नियमानुसार की जाए तथा संदिग्ध गतिविधियों और चोरी के सामान की आवाजाही से संबंधित सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई हो।

इसके साथ ही खदान परिसर में प्रवेश-निकास, स्क्रैप के भंडारण और परिवहन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए। जहां आवश्यक हो, वहां रात्रि गश्त बढ़ाने और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

संयुक्त कार्रवाई से ही खदानों में चोरी करने वालों से लेकर चोरी के माल को बाहर पहुंचाने वाले संभावित नेटवर्क तक की कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

मालगाड़ी में लोड सेल, मेघाहातुबुरु खदान से चोरी का स्क्रैप

लगातार चोरी पर रोक लगे, सेल की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो

किरीबुरू और मेघाहातुबुरु खदानों से स्क्रैप चोरी की लगातार मिल रही सूचनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सेल की संपत्ति की सुरक्षा केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।

अब जरूरत है कि पुलिस, CISF और रेल पुलिस मिलकर ठोस कार्रवाई करें, रेलवे साइडिंग और मालगाड़ियों की निगरानी मजबूत बनाएं तथा चोरी की प्रत्येक घटना की गंभीरता से जांच करें। ग्रामीणों, मुंडाओं, सेल कर्मियों और रेलकर्मियों से मिलने वाली सूचनाओं को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

सबसे अहम सवाल यही है कि जब स्क्रैप चोरी का सिलसिला लगातार जारी है, तो इसे रोकने के लिए संयुक्त अभियान कब शुरू होगा? समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो सेल की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाली इन घटनाओं पर अंकुश लगाना और मुश्किल हो सकता है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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