किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा, बड़ाजामदा समेत सारंडा के गांवों में चला व्यापक अभियान, जनप्रतिनिधियों और महिला समूहों ने निभाई अहम भूमिका
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम के किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, बड़ाजामदा, गुवा तथा सारंडा के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई गई। इस अभियान के तहत क्षेत्र के विभिन्न बूथों पर बच्चों को “दो बूंद जिंदगी की” देकर पोलियो मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

जगह-जगह बनाए गए बूथ
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में दर्जनों पोलियो बूथ स्थापित किए गए थे। इन बूथों पर स्वास्थ्य कर्मियों, एएनएम, आंगनबाड़ी सेविकाओं, महिला समूहों तथा पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
बच्चों को बूथ तक लाने में जुटीं महिलाएं
अभियान को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर बच्चों को बूथ तक लाने और अभिभावकों को जागरूक करने का कार्य किया गया। इसमें महिला समूहों की भूमिका काफी सराहनीय रही। वे सुबह से ही बूथों पर मौजूद रहकर बच्चों को पोलियो की खुराक दिलाने में सहयोग करती रहीं।

जनप्रतिनिधियों ने निभाई जिम्मेदारी
इस अभियान में प्रमुख पूनम गिलुआ, मुखिया पार्वती कीड़ों, मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, पंचायत समिति सदस्य मुक्ता मुंडू, उप मुखिया सुमन मुंडू, सीएचओ सरिता बरजो, एमपीडब्लू अनिल लमाए, अनिमा मिंज, गीता गुईया समेत दर्जनों स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि एवं महिलाएं सक्रिय रूप से लगी रहीं। इन सभी ने लोगों से अपील की कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
पोलियो उन्मूलन की दिशा में अहम कदम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो अभियान के माध्यम से देश को पूरी तरह पोलियो मुक्त बनाए रखने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए ऐसे अभियान बेहद जरूरी हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सहयोग की अपील की है ताकि हर बच्चे तक यह सुरक्षा कवच पहुंच सके।












