सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों के मजदूर संगठनों की हुंकार—नियमों को ताक पर रखकर बायोमेट्रिक लागू किया तो चारों खदानों में एक साथ ठप होगा काम
रिपोर्ट शैलेश सिंह
सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों के सभी मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मेघाहातुबुरु सामुदायिक भवन स्थित ओपन थिएटर प्रांगण में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य मुद्दा था सेल प्रबंधन द्वारा बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को लागू करने की तैयारी, जिस पर मजदूर संगठनों ने तीखा विरोध दर्ज कराया।

“विरोध बायोमेट्रिक का नहीं, गैरकानूनी तरीके का है”
बैठक में मौजूद सभी यूनियन प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि मजदूरों का विरोध बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से नहीं है, बल्कि उस प्रक्रिया से है जिसके तहत इसे लागू किया जा रहा है। नेताओं ने साफ कहा कि जब तक Certifying Officer द्वारा इस नई उपस्थिति प्रणाली को प्रमाणित नहीं किया जाता, तब तक इसे लागू करना पूरी तरह गैरकानूनी होगा।
मजदूर नेताओं का कहना था कि सेवा शर्तों में बदलाव किसी भी कंपनी या नियोक्ता की मनमानी से नहीं हो सकता। इसके लिए श्रम कानूनों के तहत निर्धारित प्रक्रिया और सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य है।
“प्रबंधन कानून को जेब में रखकर नहीं चला सकता”
बैठक में मजदूर संगठनों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सेल प्रबंधन नियम-कायदों को दरकिनार कर मजदूरों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। यह सीधा-सीधा मजदूरों के अधिकारों का हनन है।
संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने कहा कि अगर आज बायोमेट्रिक के नाम पर सेवा शर्तों में बदलाव थोपा गया, तो कल मजदूरों के अन्य अधिकार भी छीने जा सकते हैं। इसलिए इस लड़ाई को सिर्फ हाजिरी प्रणाली नहीं, बल्कि मजदूरों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया गया।

मामला कोर्ट में, फैसला आने तक इंतजार की मांग
यूनियन नेताओं ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर संबंधित न्यायालय में मामला विचाराधीन है। ऐसे में जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, तब तक प्रबंधन को कोई एकतरफा निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उसे सभी यूनियन और सेलकर्मी मानने को तैयार हैं। लेकिन उससे पहले किसी भी तरह की जल्दबाजी या जबरन लागू करने की कोशिश को उकसावे वाली कार्रवाई माना जाएगा।
“जबरन लागू किया तो चारों खदानों में ताला”
बैठक में संयुक्त मोर्चा ने प्रबंधन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बिना Certifying Officer के certification के बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने की कोशिश की गई, तो चारों खदानों में एक साथ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उत्पादन ठप कर खदान बंद कराने तक की लड़ाई लड़ी जाएगी।

मजदूर एकजुट, प्रबंधन पर बढ़ा दबाव
बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस मुद्दे पर सभी मजदूर संगठन एकजुट हैं और किसी भी कीमत पर प्रबंधन की “मनमानी” स्वीकार नहीं करेंगे। संयुक्त मोर्चा ने कहा कि मजदूरों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और अगर अधिकारों पर हमला हुआ तो इसका जवाब सड़कों से लेकर खदानों तक दिया जाएगा।
बैठक के अंत में यह संदेश साफ था—“कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे वह प्रबंधन ही क्यों न हो। मजदूरों के अधिकारों को कुचलने की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”













