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पहली बारिश में ही बह गया करोड़ों का चेक डैम!

On: August 13, 2026 8:52 PM
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रांजाबुरु खदान में निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, हजारों टन लौह चूर्ण-मलबे ने सारंडा जंगल से गांवों तक मचाई तबाही

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

गुवा। सेल, गुवा लौह अयस्क खदान के रांजाबुरु खदान क्षेत्र से सारंडा जंगल स्थित रानी चुवां जाने वाले रास्ते में पम्पू कोचा जंगल के समीप करोड़ों रुपये की लागत से कुछ माह पूर्व बनाया गया आरसीसी चेक डैम पहली ही मूसलाधार बारिश में पूरी तरह ध्वस्त हो गया। चेक डैम के टूटते ही खदान क्षेत्र में जमा हजारों टन लौह चूर्ण और मलबा पानी के तेज बहाव के साथ सारंडा जंगल, प्राकृतिक जलस्रोतों, नदी-नालों और ग्रामीणों के खेतों तक पहुंच गया। इससे बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान होने की बात सामने आ रही है।

करोड़ों खर्च, पहली बारिश में ही निर्माण ध्वस्त

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस चेक डैम को खदान से निकलने वाले लौह चूर्ण और मलबे को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था, उसकी निर्माण गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस ढांचे का पहली ही बारिश में टूट जाना यह सवाल खड़ा कर रहा है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का कितना पालन किया गया।

चेक डैम टूटने के बाद खदान क्षेत्र का लाल रंग का लौह चूर्ण और भारी मलबा पानी के साथ नीचे की ओर बहता चला गया। इससे जंगल के कई हिस्सों में गाद और लौह चूर्ण जमा हो गया है।

जंगल से खेतों तक पहुंचा खदान का मलबा

चेक डैम टूटने के कारण बहकर आया लौह चूर्ण और मलबा सारंडा जंगल के प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रभावित करते हुए बड़ी नदी की ओर पहुंचा। इसके अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि पर भी इसका असर पड़ा है।

ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दौरान यदि इस प्रकार लौह चूर्ण और मलबे का बहाव लगातार जारी रहा तो खेतों की उर्वरा शक्ति, नदी-नालों की प्राकृतिक संरचना और जलस्रोतों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

जिन गांवों को बचाने के लिए बना था चेक डैम, वहीं बढ़ा खतरा

गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि गुवा खदान से प्रभावित ग्रामीण वर्षों से खदान का लौह चूर्ण और मलबा बरसात में बहकर खेतों, नदी और जंगल में पहुंचने की समस्या से जूझ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जोजोगुट्टू, राजाबेड़ा, जामकुंडिया, लेम्ब्रे, दोदारी, दुईया और सलाई समेत आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों की कृषि भूमि लगातार प्रभावित होती रही है। कोईना नदी, दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोत और सारंडा जंगल की वनस्पतियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत ग्रामीण पहले से करते रहे हैं।

आंदोलन और वन विभाग के हस्तक्षेप के बाद हुआ था निर्माण

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों, आंदोलनों और वन विभाग के हस्तक्षेप के बाद खदान प्रबंधन द्वारा लौह चूर्ण एवं मलबे के बहाव को रोकने के लिए पम्पू कोचा जंगल के समीप इस चेक डैम का निर्माण कराया गया था।

उम्मीद थी कि यह संरचना बारिश के दौरान खदान से निकलने वाले मलबे को रोककर जंगल, नदी और ग्रामीण इलाकों को नुकसान से बचाएगी। लेकिन पहली ही तेज बारिश ने पूरे निर्माण की पोल खोल दी।

मुखिया ने बताया भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा

गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल ने चेक डैम के टूटने को सेल, गुवा खदान में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये की लागत से बना आरसीसी चेक डैम कुछ ही महीनों में पहली बारिश का सामना नहीं कर सका, तो निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन, तकनीकी स्वीकृति और निर्माण एजेंसी की भूमिका की जांच जरूरी है।

सिर्फ चेक डैम नहीं टूटा, पर्यावरणीय सुरक्षा भी टूटी

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक चेक डैम के टूटने तक सीमित नहीं है। इससे सारंडा के जंगल, प्राकृतिक जलस्रोत, नदी-नाले, कृषि भूमि और आसपास के ग्रामीणों के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है।

सारंडा जंगल जैव विविधता और प्राकृतिक जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में खदान का भारी मात्रा में लौह चूर्ण और मलबा जंगल के जलस्रोतों में पहुंचना पर्यावरण के लिहाज से गंभीर विषय है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग, दोषियों पर कार्रवाई हो

राजू सांडिल ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। जांच में चेक डैम निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया, लागत, निर्माण एजेंसी तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और क्षतिग्रस्त चेक डैम का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यदि पहली बारिश में ही चेक डैम टूट जाए और उसके कारण जंगल, नदी तथा खेतों को नुकसान पहुंचे, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सेल प्रबंधन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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