बोर्ड परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली तस्वीरें सड़क किनारे मिलने से अभिभावकों में आक्रोश, डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
DAV स्कूल गुवा के सामने ऊंची कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की तस्वीरें कथित तौर पर लावारिस हालत में पड़े मिलने से अभिभावकों और आम नागरिकों में विद्यालय प्रबंधन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। बच्चों की तस्वीरें इस तरह खुले में पड़े होने को लेकर अभिभावकों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए सवाल उठाए हैं।

बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन में दी जाती हैं तस्वीरें
कुछ अभिभावकों के अनुसार, विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की तस्वीरें बोर्ड परीक्षा सहित विभिन्न शैक्षणिक कार्यों के लिए रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजी प्रक्रिया के दौरान विद्यालय को उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में इन तस्वीरों का विद्यालय परिसर से बाहर लावारिस अवस्था में मिलना कई सवाल खड़े करता है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की तस्वीरें सामान्य कागज का टुकड़ा नहीं हैं। इन्हें सुरक्षित रखना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
AI के दौर में तस्वीरों के दुरुपयोग की आशंका
अभिभावकों ने चिंता जताई कि यदि बच्चों की तस्वीरें किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाएं तो आधुनिक तकनीक और AI आधारित इमेज-जनरेशन एवं एडिटिंग टूल्स के जरिए उनका दुरुपयोग किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, इस मामले में किसी तस्वीर के वास्तव में दुरुपयोग किए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन अभिभावकों का सवाल है कि जब तस्वीरें सुरक्षित रखने के लिए विद्यालय को दी जाती हैं तो वे सड़क किनारे लावारिस हालत में कैसे पहुंचीं?
विद्यालय प्रबंधन से जवाबदेही की मांग
अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय प्रबंधन पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाए कि छात्र-छात्राओं की तस्वीरें किस प्रक्रिया के तहत विद्यालय से बाहर पहुंचीं और उन्हें इस तरह खुले में किसने फेंका।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बच्चों की तस्वीरों और अन्य निजी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए विद्यालय में क्या व्यवस्था है।
शिक्षक पर छात्राओं के साथ ‘बैड टच’ के आरोप की शिकायत का भी दावा
दूसरी ओर, कुछ अभिभावकों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि विद्यालय के एक शिक्षक के खिलाफ कई अभिभावकों ने छात्राओं के साथ कथित ‘बैड टच’ को लेकर विद्यालय प्रबंधन तथा सेल, गुवा प्रबंधन के समक्ष लिखित शिकायत दी है।
अभिभावक सूत्रों के अनुसार, इस शिकायत के बाद विद्यालय प्रबंधन द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित शिक्षक का पक्ष सामने आना भी बाकी है।
मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण अभिभावकों ने निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

वर्षों से एक ही जगह जमे शिक्षकों के तबादले की मांग
कुछ अभिभावकों ने विद्यालय में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कुछ शिक्षकों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि विद्यालय की स्थानांतरण नीति के तहत शिक्षकों का निर्धारित अवधि में स्थानांतरण किया जाता है, तो लंबे समय से एक ही विद्यालय में जमे शिक्षकों की स्थिति की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
अभिभावकों की मांग है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ शिक्षकों का नियमानुसार स्थानांतरण किया जाए, ताकि विद्यालय में पारदर्शिता और प्रशासनिक संतुलन बना रहे।
अब जवाबदेही और जांच पर टिकी निगाहें
छात्र-छात्राओं की तस्वीरों के खुले में मिलने और शिक्षक के खिलाफ लगाए गए कथित गंभीर आरोपों को लेकर अभिभावक विद्यालय प्रबंधन से स्पष्ट जवाब चाहते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों की निजी तस्वीरें लावारिस हालत में विद्यालय के बाहर कैसे पहुंचीं और इस मामले में जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना होगा कि विद्यालय प्रबंधन इन शिकायतों और सवालों पर क्या कार्रवाई करता है तथा छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और उनकी निजी जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।










