कोल्हान जंगल के सबसे संवेदनशील इलाकों में देशभक्ति की गूंज — CRPF की C/193 बटालियन की मौजूदगी में निर्भय होकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
सांगाजाटा/बोरोई। कभी नक्सली आतंक और बंदूकों की धमक से दहशत में रहने वाले कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र के दुर्गम गांवों में शुक्रवार को आजादी की नई तस्वीर दिखाई दी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर घने जंगलों और ऊंची-नीची पहाड़ियों के बीच बसे सांगाजाटा और बोरोई गांव में तिरंगा शान से लहराया। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर ग्रामीण जब सड़कों पर निकले तो पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।

यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कोल्हान का यह इलाका लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली सह पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा समेत करोड़ों और लाखों रुपये के इनामी नक्सली नेताओं के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में ग्रामीणों का निर्भय होकर तिरंगा रैली में शामिल होना सुरक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

CRPF ने संभाली सुरक्षा की कमान
C/193 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की पहल पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत सांगाजाटा में भव्य तिरंगा रैली निकाली गई। रैली में CRPF जवानों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। जवानों ने ग्रामीणों के बीच तिरंगे का वितरण किया और घर-घर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
जिन जंगल-पहाड़ी रास्तों पर कभी सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में भय बना रहता था, उन्हीं रास्तों पर CRPF जवानों के साथ बच्चे और महिलाएं हाथों में तिरंगा लेकर पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते नजर आए।

बंदूक के खौफ पर भारी पड़ा तिरंगा
कोल्हान के जंगलों में बदली परिस्थितियों की यह तस्वीर अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। कभी नक्सली फरमानों के कारण ग्रामीणों की आवाजाही और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। आज उसी इलाके में ग्रामीण खुले तौर पर राष्ट्रीय पर्व मना रहे हैं।
बंदूक के खौफ पर तिरंगा भारी पड़ा और डर की जगह देशभक्ति ने ले ली।
रैली के दौरान ग्रामीणों के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दिया। महिलाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने अपने घरों पर तिरंगा फहराकर देश की आजादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

लगातार अभियानों से कमजोर हुआ नक्सली प्रभाव
बताया जाता है कि पिछले लगभग दो वर्षों से C/193 बटालियन CRPF ने कोल्हान के दुर्गम जंगलों और पहाड़ी इलाकों में लगातार अभियान चलाए हैं। सुरक्षा बलों की सक्रियता, लगातार गश्त और ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति से सांगाजाटा, बोरोई, बायहातु और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।
सुरक्षा बलों की भूमिका केवल अभियान चलाने तक सीमित नहीं रही। ग्रामीणों के साथ संवाद, उनकी समस्याओं को समझना, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी और भरोसे का माहौल तैयार करना भी CRPF की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

जवानों ने सुरक्षा के साथ जगाया राष्ट्रप्रेम
तिरंगा रैली के माध्यम से CRPF जवानों ने यह संदेश भी दिया कि सुरक्षा बल केवल बंदूक लेकर जंगलों में अभियान चलाने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा, विश्वास और राष्ट्र की एकता के प्रहरी भी हैं।
दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में रहकर जिस तरह ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, उसका असर अब सामाजिक गतिविधियों में भी दिखाई देने लगा है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले निकली यह रैली इसी बदलते विश्वास की प्रतीक बनी।
ग्रामीणों के दिल में बढ़ा सुरक्षा बलों का भरोसा
रैली में शामिल ग्रामीणों के उत्साह ने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच दूरी कम हुई है। ग्रामीणों ने जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
एक समय जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही ग्रामीणों के बीच असुरक्षा की चिंता बढ़ जाती थी, वहां अब राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर खुले तौर पर कार्यक्रम आयोजित होना सुरक्षा व्यवस्था की बदली तस्वीर को सामने रखता है।

कोल्हान में लौट रही सामान्य जिंदगी
कोल्हान के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और ग्रामीणों के सहयोग से सामान्य जनजीवन की वापसी का दावा मजबूत हुआ है। स्कूल, सामाजिक कार्यक्रम, सरकारी योजनाओं की गतिविधियां और राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन अब पहले की तुलना में अधिक निर्भय माहौल में होने लगा है।
सांगाजाटा और बोरोई में आयोजित तिरंगा रैली इसी बदलाव की प्रतीक बनी। यहां तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था, बल्कि भय पर विश्वास, आतंक पर लोकतंत्र और असुरक्षा पर राष्ट्रभक्ति की जीत का प्रतीक नजर आया।
हर घर तिरंगा, हर दिल में भारत
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कोल्हान के जंगलों से निकला यह संदेश बेहद स्पष्ट रहा—देश के अंतिम छोर पर रहने वाला ग्रामीण भी राष्ट्र की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।
CRPF जवानों के साथ ग्रामीणों की कदमताल और घर-घर लहराता तिरंगा यह बताने के लिए काफी था कि जहां कभी नक्सली भय का साया था, वहां अब भारत माता की जय और तिरंगे की शान दिखाई दे रही है।
जहां कभी बंदूकें डर पैदा करती थीं, आज वहीं तिरंगा हौसला दे रहा है। जहां कभी खौफ था, वहां अब देशभक्ति है। और जहां कभी नक्सली फरमानों की चर्चा होती थी, वहां आज भारत के संविधान और राष्ट्रीय ध्वज की शान दिखाई दे रही है।





















