पत्थर, गिट्टी, बालू और मोरम की दरों में भारी बढ़ोतरी से निर्माण कारोबार पर संकट
रॉयल्टी के साथ डेड रेंट, 30 प्रतिशत DMFT, प्रबंधन शुल्क और पर्यावरण उपकर का अतिरिक्त बोझ
खनिज खरीद पर पहले ही रॉयल्टी भुगतान, फिर सरकारी बिल से कटौती क्यों? ठेकेदारों ने उठाए गंभीर सवाल
बिटुमेन की आसमान छूती कीमत और पुराने SOR ने बढ़ाई परेशानी, 2 नवंबर को मंत्री-विधायकों के सामने रखेंगे मांगें
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
जमशेदपुर। झारखंड सरकार के लघु खनिजों की दरों में भारी बढ़ोतरी और खनिजों के विरुद्ध देय दंड राशि से संबंधित सरकारी प्रावधानों ने कोल्हान के ठेकेदारों के बीच असंतोष की आग भड़का दी है। रॉयल्टी, डेड रेंट, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), प्रबंधन शुल्क और पर्यावरण उपकर जैसी विभिन्न मदों के वित्तीय बोझ के बीच सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान से रॉयल्टी की कटौती का मुद्दा अब संवेदकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
इसी के विरोध और अपनी समस्याओं का सामूहिक समाधान तलाशने के उद्देश्य से रविवार, 1 नवंबर 2026 को जमशेदपुर के सीएच एरिया स्थित निर्मल गेस्ट हाउस में कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें रॉयल्टी कटौती से प्रभावित 100 से अधिक ठेकेदारों ने भाग लिया। बैठक में सरकार की नई खनिज दरों, दंड राशि के प्रावधानों, बिटुमेन की लगातार बढ़ती कीमतों तथा वर्तमान SOR (Schedule of Rates) और वास्तविक बाजार दरों के बीच बढ़ते अंतर पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का संदेश साफ था कि ठेकेदार सरकारी विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ऐसी वित्तीय व्यवस्था स्वीकार नहीं कर सकते जिसमें खनिजों की खरीद पर पहले ही सरकारी देय राशि का भुगतान करने के बाद सरकारी बिल से दोबारा कटौती का आर्थिक बोझ भी उन्हीं पर डाल दिया जाए।

रॉयल्टी बढ़ोतरी का सरकारी गणित, ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट!
झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से जारी लघु खनिजों से संबंधित दरों की तालिका में पत्थर, गिट्टी, बालू, मोरम, ईंट बनाने की मिट्टी, स्टोन डस्ट और मिट्टी जैसी निर्माण सामग्री के विरुद्ध विभिन्न वित्तीय मदों का उल्लेख किया गया है।
तालिका में रॉयल्टी के साथ 100 प्रतिशत डेड रेंट, रॉयल्टी का 30 प्रतिशत DMFT अंशदान, प्रबंधन शुल्क और रॉयल्टी का एक प्रतिशत पर्यावरण उपकर जोड़कर कुल देय राशि दर्शाई गई है। इसके अतिरिक्त तालिका का शीर्षक लघु खनिजों के विरुद्ध देय दंड राशि से संबंधित है, जिसको लेकर भी संवेदकों के बीच चर्चा और स्पष्टीकरण की मांग उठ रही है।
तालिका में दर्ज आंकड़ों के अनुसार—
- पत्थर (बोल्डर): कुल देय राशि 307.72 रुपये।
- पत्थर (गिट्टी/मेटल एवं अन्य): कुल देय राशि 579.10 रुपये।
- बालू: कुल देय राशि 117.42 रुपये।
- मोरम: कुल देय राशि 89.70 रुपये।
- ईंट बनाने की मिट्टी: कुल देय राशि 211.40 रुपये प्रति 1000 इकाई।
- स्टोन डस्ट: कुल देय राशि 73.46 रुपये।
- मिट्टी: कुल देय राशि 47.48 रुपये।

संवेदकों का कहना है कि खनिजों पर सरकारी देयताओं का यह बढ़ता बोझ निर्माण कार्यों की लागत को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि खनिज खरीद के समय जमा की गई रॉयल्टी और अन्य देयताओं का सरकारी भुगतान के समय किस प्रकार समायोजन होगा।
खनिज खरीद पर रॉयल्टी जमा, फिर सरकारी बिल से कटौती क्यों?
बैठक का सबसे गंभीर मुद्दा रॉयल्टी की दोहरी कटौती की आशंका रहा। ठेकेदारों ने सवाल उठाया कि जब वे अधिकृत खनिज विक्रेताओं से पत्थर, गिट्टी, बालू और अन्य निर्माण सामग्री खरीदते हैं, तो नियमानुसार खनिजों से संबंधित रॉयल्टी का भुगतान पहले ही कीमत में शामिल रहता है अथवा उसके भुगतान का वैध दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है।
ऐसी स्थिति में सरकारी निर्माण कार्य का बिल भुगतान करते समय दोबारा रॉयल्टी काटे जाने की प्रक्रिया से संवेदकों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
संवेदकों की मांग है कि सरकार रॉयल्टी कटौती की प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी बनाए। जिन खनिजों पर वैध दस्तावेजों के माध्यम से पहले ही रॉयल्टी जमा होने का प्रमाण उपलब्ध है, उनके संबंध में दोहरी वसूली की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
दंड राशि के प्रावधान ने बढ़ाई चिंता, नियमों की स्पष्टता जरूरी!
सरकार की ओर से लघु खनिजों के विरुद्ध देय दंड राशि से संबंधित दरों की तालिका सामने आने के बाद संवेदक इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि खनिजों के उपयोग, परिवहन और सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटि का अतिरिक्त आर्थिक दंड न भुगतना पड़े।
ठेकेदारों का मानना है कि खनिजों की वैध खरीद, रॉयल्टी भुगतान, परिवहन चालान और उपयोग से संबंधित नियमों को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में वैध दस्तावेजों के आधार पर काम करने वाले संवेदकों को अनावश्यक वित्तीय परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
संघ इस पूरे मामले में सरकार से दंड राशि की गणना, लागू होने की परिस्थितियों और रॉयल्टी समायोजन की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग करेगा।
बिटुमेन की कीमतों ने भी निकाला ठेकेदारों का दम!
बैठक में केवल खनिजों की रॉयल्टी ही नहीं, बल्कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की लगातार बढ़ती बाजार कीमतों पर भी गंभीर चिंता जताई गई।
संवेदकों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का टेंडर जिस SOR और प्राक्कलित दर के आधार पर निकाला जाता है, बाजार में निर्माण सामग्री की वास्तविक कीमतें उससे काफी अलग हो रही हैं। विशेषकर बिटुमेन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण सड़क निर्माण कार्यों की लागत बढ़ रही है।
ऐसे में पुराने SOR के आधार पर काम करने वाले ठेकेदारों को बढ़ी हुई बाजार कीमतों का अंतर अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से समय रहते दरों का पुनरीक्षण और उचित मूल्य समायोजन नहीं किया गया तो सड़क निर्माण योजनाओं का निष्पादन संवेदकों के लिए आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।
100 से अधिक ठेकेदार एकजुट, सरकार तक पहुंचेगी सामूहिक आवाज
निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में कोल्हान क्षेत्र के 100 से अधिक ठेकेदारों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखा। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि व्यक्तिगत स्तर पर विभागों के चक्कर लगाने के बजाय अब संघ के माध्यम से सरकार और जनप्रतिनिधियों के समक्ष सामूहिक रूप से समस्याएं रखी जाएंगी।
संघ का उद्देश्य किसी भी विकास कार्य को बाधित करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यावहारिक और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित कराना है, जिसमें सरकारी योजनाओं का काम करने वाले संवेदकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़े।
मंत्री दीपक बिरुवा और कोल्हान के विधायकों से कल सीधी बातचीत
ठेकेदारों की समस्याओं को राज्य सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सोमवार, 2 नवंबर 2026 को दोपहर 1:30 बजे जमशेदपुर के सर्किट हाउस में झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा तथा कोल्हान क्षेत्र के अन्य विधायकों के साथ कोल्हान कॉन्ट्रैक्टर्स संघ के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित की गई है।
इस बैठक में संघ के प्रतिनिधि रॉयल्टी कटौती की वर्तमान प्रक्रिया, खनिजों की बढ़ी हुई दरें, दंड राशि से संबंधित सरकारी प्रावधान, बिटुमेन की बढ़ती कीमतें और वर्तमान SOR एवं बाजार दरों के बीच अंतर जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
संघ की ओर से सरकार से मांग की जाएगी कि—
- खनिजों की खरीद पर पहले से जमा रॉयल्टी की सरकारी बिल भुगतान के समय दोबारा कटौती नहीं होनी चाहिए।
- रॉयल्टी कटौती एवं उसके समायोजन को लेकर स्पष्ट सरकारी दिशा-निर्देश जारी हों।
- लघु खनिजों की बढ़ी हुई दरों और दंड राशि से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा एवं स्पष्ट व्याख्या की जाए।
- पुराने टेंडर और निर्माणाधीन योजनाओं पर बढ़ी खनिज लागत का उचित समायोजन किया जाए।
- बिटुमेन सहित अन्य निर्माण सामग्रियों की वास्तविक बाजार कीमतों के अनुरूप SOR का पुनरीक्षण हो।
- संवेदकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की जाए।
विकास योजनाओं के निष्पादन पर मंडराता असर, सरकार के रुख पर नजर
कोल्हान के ठेकेदारों का कहना है कि सड़क, पुल-पुलिया, भवन, नाली और अन्य बुनियादी ढांचे की योजनाओं का निर्माण कार्य केवल टेंडर आवंटित कर देने से पूरा नहीं होता। इसके लिए निर्माण सामग्री की उपलब्धता, बाजार मूल्य, सरकारी देयताओं और भुगतान व्यवस्था के बीच व्यावहारिक संतुलन भी जरूरी है।
यदि सरकारी दरों और बाजार की वास्तविक लागत के बीच अंतर लगातार बढ़ता रहा तथा रॉयल्टी कटौती की प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं आई तो इसका असर सरकारी योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
अब सोमवार की बैठक पर टिकी निगाहें!
रविवार की बैठक में 100 से अधिक ठेकेदारों की भागीदारी ने स्पष्ट कर दिया है कि रॉयल्टी कटौती और खनिजों की बढ़ी दरों का मुद्दा अब व्यक्तिगत संवेदकों की परेशानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोल्हान के निर्माण क्षेत्र का सामूहिक मुद्दा बन चुका है।
अब देखना होगा कि सोमवार को मंत्री दीपक बिरुवा और कोल्हान के विधायकों के समक्ष ठेकेदारों की समस्याओं पर क्या निर्णय होता है। क्या सरकार रॉयल्टी की दोहरी कटौती की आशंका दूर करेगी? क्या बढ़ी हुई खनिज दरों और बिटुमेन की कीमतों के अनुरूप SOR में संशोधन होगा? और क्या दंड राशि के प्रावधानों को लेकर संवेदकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे?
फिलहाल कोल्हान के ठेकेदारों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखा दी है। अब गेंद सरकार के पाले में है।










