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सेल के ठेकेदारों का दो टूक सवाल—‘श्रमिक मोबाइल लेकर जाएगा तो जुर्माना हम क्यों भरें?’

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मोबाइल प्रतिबंध के आदेश से ठेकेदारों में उबाल, वर्क ऑर्डर में नहीं है ऐसी कोई शर्त, फिर आर्थिक दंड किस आधार पर?

‘90 फीसदी श्रमिक प्रबंधन के अधिकारियों के निर्देश पर रखे गए हैं, तो उनकी मोबाइल जांच और निगरानी की जिम्मेदारी भी प्रबंधन ले’

जल्द उच्चाधिकारियों से वार्ता करेंगे ठेकेदार, समाधान नहीं निकला तो लिखित रूप से उठाएंगे मामला

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू/मेघाहातुबुरु। सेल के झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस (JGOM) प्रबंधन द्वारा खदान परिसरों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित ठेकेदारों से हजारों रुपये जुर्माना वसूलने के आदेश ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस आदेश से जहां ठेका श्रमिकों में नाराजगी है, वहीं अब सेल के ठेकेदारों ने भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

ठेकेदार सूत्रों ने प्रबंधन के आदेश पर कड़ा एतराज जताते हुए दो टूक सवाल उठाया है कि जब कोई ठेका श्रमिक मोबाइल फोन लेकर काम पर जाएगा, तो उसकी गलती का आर्थिक दंड ठेकेदार क्यों भरेगा? ठेकेदारों का कहना है कि उनके और सेल प्रबंधन के बीच हुए वर्क ऑर्डर (कार्यादेश) में मोबाइल फोन जमा कराने, श्रमिकों के मोबाइल की जांच करने अथवा मोबाइल प्रतिबंध का उल्लंघन होने पर जुर्माना भरने जैसी कोई विशेष शर्त शामिल नहीं है। ऐसे में कार्यादेश से बाहर जाकर नई जिम्मेदारी और आर्थिक दंड थोपना कहां तक उचित है?

ठेकेदार सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर ठेकेदार जल्द ही सेल प्रबंधन के उच्चाधिकारियों से बातचीत करने की तैयारी में हैं। आवश्यकता पड़ने पर लिखित पत्र देकर आदेश में संशोधन, जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और बीच का व्यावहारिक रास्ता निकालने की मांग की जाएगी।

वर्क ऑर्डर में शर्त नहीं, फिर ठेकेदारों पर जुर्माने का बोझ क्यों?

ठेकेदार सूत्रों का कहना है कि सेल प्रबंधन ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी सर्कुलर में ठेका श्रमिकों द्वारा मोबाइल प्रतिबंध का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ पहली बार ₹5,000, दूसरी बार ₹10,000 और उसके बाद क्रमशः बढ़ते हुए जुर्माने का प्रावधान किया है।

सवाल यह है कि जब ठेकेदारों को दिए गए कार्यादेश में ऐसी कोई शर्त पहले से निर्धारित नहीं थी, तो अचानक जारी सर्कुलर के माध्यम से उन पर आर्थिक दंड की जिम्मेदारी कैसे डाल दी गई?

ठेकेदारों का तर्क है कि वर्क ऑर्डर के तहत उन्हें निर्धारित कार्य पूरा करने, आवश्यक श्रमिक उपलब्ध कराने और कार्य की गुणवत्ता एवं समयसीमा का पालन करने की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन प्रत्येक श्रमिक के निजी मोबाइल फोन की जांच करना, उसकी निगरानी करना और उसे मोबाइल लेकर खदान में प्रवेश करने से रोकना क्या ठेकेदारों की जिम्मेदारी है? इस पर प्रबंधन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

90 फीसदी श्रमिक प्रबंधन के अधिकारियों के निर्देश पर रखे गए!

ठेकेदार सूत्रों ने एक और महत्वपूर्ण बात उठाई है। उनका कहना है कि भले ही कागजों पर ठेका श्रमिकों को उपलब्ध कराने और कार्य कराने की जिम्मेदारी ठेकेदारों की दिखाई जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सेल की खदानों में उनके वर्क ऑर्डर के तहत काम करने वाले लगभग 90 फीसदी श्रमिक प्रबंधन के अधिकारियों के निर्देश पर रखे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में श्रमिकों के चयन और उन्हें काम पर रखने में संबंधित विभागीय अधिकारियों की पसंद और निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि उन्हीं श्रमिकों में से कोई मोबाइल लेकर खदान परिसर में प्रवेश करता है, तो उसकी गलती का पूरा आर्थिक बोझ ठेकेदारों पर डालना न्यायसंगत नहीं है।

ठेकेदारों का सवाल है कि जब श्रमिकों की नियुक्ति और कार्यस्थल पर उनकी तैनाती में प्रबंधन के अधिकारियों की भूमिका रहती है, तो मोबाइल प्रतिबंध के अनुपालन की पूरी जवाबदेही केवल ठेकेदारों पर क्यों थोपी जा रही है?

‘अगर जुर्माना हमें भरना है तो श्रमिक भी हम अपनी पसंद से रखेंगे’

ठेकेदार सूत्रों ने प्रबंधन के सामने एक तीखा सवाल रखते हुए कहा कि यदि मोबाइल प्रतिबंध के उल्लंघन पर जुर्माना ठेकेदारों को ही भरना है, तो फिर ठेका श्रमिकों के चयन और नियुक्ति में भी उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

सूत्रों का कहना है कि यदि आर्थिक दंड की जिम्मेदारी ठेकेदारों की होगी, तो वे अपनी मर्जी से ऐसे नए ठेका श्रमिकों को काम पर रखना चाहेंगे, जो उनके निर्देशों का पालन करें और निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुरूप काम करने को तैयार हों।

ठेकेदारों का तर्क है कि एक तरफ श्रमिकों को रखने में प्रबंधन के अधिकारियों के निर्देश मानने पड़ते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं श्रमिकों की प्रत्येक गलती का आर्थिक दंड ठेकेदारों को भुगतना पड़े, यह दोहरी व्यवस्था स्वीकार करना मुश्किल है।

उनका कहना है कि जवाबदेही उसी की तय होनी चाहिए, जिसके पास वास्तविक नियंत्रण और निर्णय लेने का अधिकार हो।

मोबाइल की जांच करनी है तो सेल अपना सुपरवाइजर रखे!

ठेकेदार सूत्रों ने प्रबंधन के सामने एक व्यावहारिक विकल्प भी रखा है। उनका कहना है कि यदि सेल प्रबंधन को खदान परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करना है और इसका उल्लंघन रोकना है, तो इसके लिए प्रबंधन अपने स्तर पर सुपरवाइजर या जांच कर्मी नियुक्त करे।

वे खदान के प्रवेश पर सीआइएसएफ द्वार और कार्य स्थल पर सुपरवाइजर द्वारा प्रत्येक श्रमिक के मोबाइल फोन की जांच करें और प्रतिबंधित मोबाइल लेकर आने वाले श्रमिक को प्रवेश से रोकें अथवा मोबाइल जब्त करे।

ठेकेदारों का स्पष्ट कहना है कि उनका काम खदानों में निर्धारित कार्य के लिए श्रमिक उपलब्ध कराना और कार्यादेश के अनुसार काम कराना है। यह उनकी जिम्मेदारी नहीं हो सकती कि वे एक-एक ठेका श्रमिक की तलाशी लें, उसके मोबाइल की जांच करें और फिर उसे काम पर जाने की अनुमति दें।

ठेकेदारों का सवाल है कि जब खदान का गेट, सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण सेल प्रबंधन के अधीन है, तो मोबाइल जांच की जिम्मेदारी भी उसी व्यवस्था के तहत क्यों नहीं निभाई जाती?

हर श्रमिक के मोबाइल की जांच करना ठेकेदारों के लिए व्यावहारिक रूप से भी मुश्किल

ठेकेदारों का कहना है कि खदानों में अलग-अलग शिफ्टों में बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक काम करते हैं। ऐसे में प्रत्येक श्रमिक के मोबाइल फोन की जांच करना, उसे जमा कराना, सुरक्षित रखना और शिफ्ट समाप्त होने के बाद वापस करना कोई छोटा काम नहीं है।

इसके लिए अलग व्यवस्था, कर्मचारियों, सुरक्षित जमा केंद्र और जवाबदेही की जरूरत होगी। मोबाइल फोन खोने, टूटने या किसी अन्य विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी स्पष्ट नहीं है।

यदि प्रबंधन ठेकेदारों से ऐसी व्यवस्था चाहता है, तो पहले इसकी प्रक्रिया, संसाधन, जिम्मेदार अधिकारी और कार्यादेश में आवश्यक संशोधन स्पष्ट किया जाना चाहिए। बिना किसी ठोस व्यवस्था के ठेकेदारों पर आर्थिक दंड लगाने से विवाद और बढ़ सकता है।

एक ठेका श्रमिक की गलती पर हजारों रुपये का जुर्माना, ठेकेदारों में असंतोष

सर्कुलर के अनुसार, ठेकेदारों पर पहली बार ₹5,000, दूसरी बार ₹10,000 और तीसरी बार ₹20,000 का जुर्माना निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर जुर्माने की राशि में ₹10,000 की बढ़ोतरी होती जाएगी।

ठेकेदार सूत्रों का कहना है कि किसी एक श्रमिक द्वारा मोबाइल फोन लेकर प्रवेश करने की गलती के लिए ठेकेदार पर आर्थिक दंड लगाना उचित नहीं है, खासकर तब जब मोबाइल जांच और प्रवेश नियंत्रण की व्यवस्था सीधे प्रबंधन के अधीन है।

ठेकेदारों का मानना है कि सुरक्षा नियमों का पालन सभी की जिम्मेदारी है। लेकिन जिम्मेदारी और दंड का निर्धारण वास्तविक परिस्थितियों तथा संबंधित पक्षों के अधिकार और नियंत्रण के आधार पर होना चाहिए।

जल्द उच्चाधिकारियों से होगी वार्ता, लिखित शिकायत की भी तैयारी

ठेकेदार सूत्रों के अनुसार, इस आदेश को लेकर सेल की विभिन्न खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों के बीच चर्चा तेज हो गई है। ठेकेदार जल्द ही सेल प्रबंधन के उच्चाधिकारियों से मिलकर अपनी आपत्तियां रखेंगे।

यदि मौखिक वार्ता से समाधान नहीं निकलता है, तो इस संबंध में लिखित पत्र देकर पूरे मामले की समीक्षा करने और आदेश में आवश्यक संशोधन की मांग की जाएगी।

ठेकेदारों की प्रमुख मांग है कि मोबाइल फोन प्रतिबंध लागू करने की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो। यदि मोबाइल की जांच और जब्ती प्रबंधन को करनी है, तो इसके लिए प्रबंधन अपने सुरक्षा कर्मियों या अधिकृत सुपरवाइजर की व्यवस्था करे। वहीं यदि ठेकेदारों को इसकी जिम्मेदारी दी जाती है, तो पहले वर्क ऑर्डर में आवश्यक शर्तें जोड़कर संसाधन और जवाबदेही निर्धारित की जाए।

सुरक्षा के नाम पर नई जिम्मेदारी और आर्थिक बोझ थोपने पर उठे सवाल

सेल प्रबंधन का तर्क है कि खदानों में सुरक्षा और कार्य के दौरान एकाग्रता बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध जरूरी है। निश्चित रूप से खनन जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होगी और नियम तोड़ने पर दंड किस आधार पर लगाया जाएगा, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण सवाल है।

एक ओर ठेका श्रमिक मोबाइल प्रतिबंध को लेकर नाराजगी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार भी आर्थिक दंड और अतिरिक्त जिम्मेदारी को लेकर असहज हैं। अब यह मामला केवल मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सेल प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच कार्यादेश की शर्तों, अधिकारों और जवाबदेही का मुद्दा बनता जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल सेल प्रबंधन के सामने है—यदि मोबाइल प्रतिबंध लागू कराने की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है, तो क्या उन्हें इसके लिए आवश्यक अधिकार और व्यवस्था भी दी जाएगी? और यदि प्रवेश द्वार पर जांच का अधिकार प्रबंधन के पास है, तो फिर श्रमिक की गलती का जुर्माना ठेकेदारों से क्यों वसूला जाएगा?

आने वाले दिनों में ठेकेदारों और प्रबंधन के बीच होने वाली वार्ता से ही स्पष्ट होगा कि सेल इस विवाद का समाधान निकालता है या मोबाइल प्रतिबंध का आदेश ठेका श्रमिकों के साथ-साथ ठेकेदारों के लिए भी नया विवाद बनकर खड़ा रहता है।

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