अस्पताल, क्वार्टर मरम्मत और समान वेतन समेत कई मांगों पर सकारात्मक रुख — जल्द कार्रवाई का भरोसा
गुवा संवाददाता:
गुवा क्षेत्र में ठेका मजदूरों की समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन और सेल प्रबंधन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मजदूरों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया, जिस पर प्रबंधन ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

बैठक में यूनियन की ओर से केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे, महामंत्री अंतरयामी महाकुड़, चंद्रिका खण्डाईत, पदमा केसरी और राजेश यादव मौजूद रहे। वहीं सेल प्रबंधन की ओर से मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार और महाप्रबंधक (एचआर) प्रवीण कुमार सिंह शामिल हुए।
बैठक के दौरान यूनियन ने गुवा सेल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को प्रमुखता से उठाया। यूनियन नेताओं ने कहा कि मरीजों के बीच फल वितरण की सुविधा बंद हो चुकी है, रात में दूध नहीं दिया जा रहा है, भोजन में पौष्टिक आहार की कमी है और शुगर के मरीजों के लिए विशेष डाइट उपलब्ध नहीं है। इन सभी सुविधाओं को तत्काल बहाल करने की मांग की गई।
इसके अलावा मजदूरों के क्वार्टरों की जर्जर स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। यूनियन ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के आवासों की मरम्मत प्राथमिकता से होती है, जबकि मजदूरों के क्वार्टरों की अनदेखी की जा रही है। यूनियन ने मांग की कि सिविल कार्य जल्द शुरू किया जाए और शौचालय निर्माण व टाइल्स लगाने के लिए जारी टेंडर को शीघ्र लागू किया जाए।
मजदूरों के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे “समान काम के बदले समान वेतन” को भी मजबूती से रखा गया। इसके साथ ही ऑपरेटर और टेक्नीशियन की कमी को ठेका मजदूरों से पूरा करने, एचआरडी में कंप्यूटर प्रशिक्षण शुरू करने और सफाई कर्मियों को ड्रेस उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर भी यूनियन ने जोर दिया। इस्को मिडिल स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर करने, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की गई।
इन सभी मांगों पर सेल प्रबंधन ने सकारात्मक रुख दिखाया और जल्द ही आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। प्रबंधन के इस रुख से मजदूरों और यूनियन पदाधिकारियों में संतोष का माहौल है।
हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती इन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की है। मजदूरों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन कितनी तेजी और गंभीरता से इन फैसलों को लागू करता है। अगर ऐसा होता है, तो यह बैठक ठेका मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।














