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ड्रोन सर्वे पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बिना ग्रामसभा अनुमति के सर्वे टीम को bhagaya

On: April 23, 2026 2:00 PM
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35 साल की खनन के बावजूद न नौकरी, न सुविधा — अब ‘हक की लड़ाई’ में उतरे दुबिल के ग्रामीण

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सेल की मनोहरपुर ओर माइंस (चिड़िया) प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ ग्राम दुबिल (हिन्देदिरी टोला) में ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। बिना ग्रामसभा की अनुमति के गांव और ग्रामीणों की जमीन का ड्रोन से सर्वे कराने पहुंचे प्रबंधन के कदमों को ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर न सिर्फ सर्वे कार्य को तत्काल बंद कराया, बल्कि सर्वे टीम को बैरंग वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। गांव में स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, लेकिन ग्रामीणों के सख्त तेवर के आगे कंपनी के प्रतिनिधियों को पीछे हटना पड़ा।

“ग्रामसभा से बड़ा कोई नहीं” — ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता

ग्रामीणों का साफ कहना था कि बिना ग्रामसभा की अनुमति किसी भी प्रकार का सर्वे पूरी तरह अवैध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी चोरी-छिपे ड्रोन सर्वे कर जमीन पर कब्जे की साजिश रच रही है।
“जब तक ग्रामसभा की सहमति नहीं होगी, तब तक गांव में कोई सर्वे या काम नहीं होने दिया जाएगा।”
ग्रामीणों की इस एकजुटता ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब वे अपने अधिकारों के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं हैं।

35 साल से खनन, लेकिन दुबिल आज भी बदहाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सेल चिड़िया खदान पिछले करीब 35 वर्षों से दुबिल क्षेत्र में खनन कार्य कर रही है, लेकिन आज तक गांव के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि:
* एक भी स्थानीय व्यक्ति को स्थायी नौकरी नहीं दी गई
* गांव में बुनियादी सुविधाएं आज भी नदारद हैं
* सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं हुईं
खनन से निकले करोड़ों के खनिज के बावजूद दुबिल गांव आज भी उपेक्षा और अभाव का शिकार है।

कंपनी पर ‘धोखा और शोषण’ का आरोप

ग्रामीणों ने प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाया कि कंपनी ने वर्षों से केवल खनन कर मुनाफा कमाया, लेकिन स्थानीय लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा।
अब जब जमीन का नया सर्वे ड्रोन के जरिए किया जा रहा है, तो ग्रामीण इसे अपने अस्तित्व पर खतरा मान रहे हैं।
“पहले रोजगार दो, गांव का विकास करो, फिर किसी तरह का सर्वे या विस्तार की बात करो।”

आंदोलन की चेतावनी, अब पीछे हटने के मूड में नहीं ग्रामीण

घटना के बाद ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कंपनी ने ग्रामसभा को नजरअंदाज कर जबरन कोई कार्रवाई की, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। बिना अनुमति के ड्रोन सर्वे कैसे शुरू हुआ? क्या इसके लिए संबंधित विभागों से मंजूरी ली गई थी?
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही इस मामले में स्पष्टता नहीं आई, तो वे प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोलेंगे।

अब ‘विकास’ नहीं, ‘अधिकार’ की मांग

दुबिल गांव की यह घटना साफ संकेत है कि अब ग्रामीण सिर्फ विकास के वादों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि अपने अधिकारों के लिए सीधी लड़ाई लड़ेंगे।
35 साल की उपेक्षा के बाद अब आक्रोश उबाल पर है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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