500 लोगों के विस्थापन पर सिर्फ 184 घर—ग्राम सभा में उठा सवाल, “बाकियों का क्या होगा?”
गुवा संवाददाता:
गुवा पूर्वी पंचायत के सामुदायिक केंद्र में आयोजित विशेष ग्राम सभा में विस्थापन का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया। गुवा बाजार क्षेत्र के विस्थापितों ने जनप्रतिनिधियों और पारंपरिक ग्राम नेतृत्व के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद की। सभा की अध्यक्षता गुवासाई गांव के मुंडा मंगल पूर्ति ने की, जहां ग्रामीणों का गुस्सा और चिंता साफ तौर पर देखने को मिली।

विस्तारीकरण बना विस्थापन का कारण
ग्राम सभा में सबसे बड़ा मुद्दा सेल की खदान के विस्तारीकरण को लेकर उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान विस्तार के नाम पर गुवा बाजार के डिपासाई, जाटा हाटिंग, नानक नगर और पुट साइडिंग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जबरन हटाया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना था कि विकास के नाम पर उनका अस्तित्व ही खतरे में डाल दिया गया है। वर्षों से बसे परिवारों को बिना पर्याप्त पुनर्वास योजना के उजाड़ा जा रहा है।
“500 विस्थापित, लेकिन सिर्फ 184 घर”—न्याय कहां?
सभा में सबसे तीखा सवाल यही उठा कि जब लगभग 500 लोग विस्थापित हो रहे हैं, तो मात्र 184 घर ही क्यों बनाए गए?
ग्रामीणों ने इसे सीधा-सीधा अन्याय बताया और कहा कि बड़ी संख्या में परिवार आज भी छत के लिए भटक रहे हैं।
ग्राम सभा में यह भी सामने आया कि कई प्रभावित परिवारों का नाम अब तक आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिससे वे किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित हैं।
छूटे हुए परिवारों को जोड़ने की मांग
इस मुद्दे को लेकर सभी प्रभावितों ने पहले ही चाईबासा के उपायुक्त को आवेदन सौंपा था। उपायुक्त के निर्देश पर छूटे हुए लोगों की एक सूची तैयार कर प्रशासन को सौंपी जा चुकी है।
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जब तक हर प्रभावित परिवार को सूची में शामिल नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सिर्फ घर नहीं, सम्मानजनक जीवन की मांग
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ग्रामीण सिर्फ चार दीवारी नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन चाहते हैं। इसके तहत कई अहम मांगें रखी गईं—
* हर आवास के पास मंदिर का निर्माण
* एक कमरा, हॉल-किचन, शौचालय और बाथरूम की व्यवस्था
* नियमित बिजली और साफ पानी की आपूर्ति
* एक सामुदायिक भवन का निर्माण
* बच्चों के लिए स्कूल बस सुविधा
* क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था
ग्रामीणों ने कहा कि अगर पुनर्वास किया जा रहा है, तो वह अधूरा और दिखावटी नहीं होना चाहिए।
पुनः सर्वे की मांग पर बनी सहमति
ग्राम सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि वंचित परिवारों की पहचान के लिए पुनः सर्वे कराया जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक एक-एक प्रभावित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह मुद्दा शांत नहीं होगा।

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उठी आवाज
इस महत्वपूर्ण बैठक में नोवामुंडी भाग-1 की जिला परिषद सदस्य सुश्री देवकी कुमारी, पूर्वी पंचायत की मुखिया चांदमनी लागुरी, पश्चिमी पंचायत की मुखिया पद्मिनी लागुरी, उप मुखिया सुनीता समद और वार्ड सदस्य कमला पात्रों समेत बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की मांगों को उचित बताते हुए प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाने का भरोसा दिया।
संकेत साफ—अब संघर्ष की राह
गुवा की इस ग्राम सभा ने साफ कर दिया है कि विस्थापन का मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।
अगर समय रहते प्रशासन और प्रबंधन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में गुवा क्षेत्र एक बड़े आंदोलन का गवाह बन सकता है।












