खनन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से छठ घाट तक लूटा जा रहा — प्रशासन मौन, जनता त्रस्त
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
जैंतगढ़ में बालू माफियाओं का आतंक अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे धार्मिक आस्था पर चोट करने लगा है। वैतरणी नदी का छठ घाट, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु सूर्योपासना के लिए जुटते हैं, आज अवैध बालू उत्खनन का अड्डा बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है — और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

छठ घाट तक नहीं छोड़ा — आस्था पर सीधा प्रहार
भाजपा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष राई भूमिज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब बालू माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे पवित्र छठ घाट तक को नहीं छोड़ रहे।
उन्होंने कहा —
“विगत दो वर्षों से छठ के समय घाट से बालू गायब रहता है। व्रतियों को बाहर से बालू लाकर घाट बनाना पड़ता है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आस्था का अपमान है।”

सूखी नदी को भी नहीं बख्शा — अस्तित्व पर संकट
वैतरणी नदी, जो पहले ही सूखने के कगार पर है, अब अवैध उत्खनन से और भी संकट में है। नदी के बीचों-बीच गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं।
यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
स्कूल के बच्चों की जान खतरे में
नदी घाट से सटे शिशु मंदिर और चंद्रमणि स्कूल के बच्चे इसी घाट पर स्नान करने आते हैं।
बेतरतीब खुदाई के कारण बने गहरे गड्ढे किसी भी दिन हादसे को न्योता दे सकते हैं।
जब बरसात में नदी में पानी भरेगा, तो ये गड्ढे मौत के कुंड बन जाएंगे — और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
हर दिन 50–60 ट्रिप बालू की लूट
झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष मनजीत कोड़ा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा —
“रोजाना 10–12 ट्रैक्टर, 50 से 60 ट्रिप बालू का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं, बल्कि संगठित लूट है।”
उन्होंने यह भी बताया कि वैतरणी नदी झारखंड-ओडिशा सीमा पर होने के कारण माफिया दोनों राज्यों के घाटों से बालू निकालकर करोड़ों के राजस्व को चूना लगा रहे हैं।
बालू का अवैध भंडारण — खुलेआम काला कारोबार
घाट के ऊपर, स्कूल के पीछे और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध भंडारण किया गया है।
यहां से ट्रैक्टरों में लादकर बालू खनन क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता है और मोटी कमाई की जाती है।
कांग्रेस युवा मोर्चा के जिला महासचिव गुलज़ार अंसारी ने कहा —
“स्थानीय लोगों को घर बनाने के लिए बालू नहीं मिल रहा, जबकि माफिया धड़ल्ले से इसका व्यापार कर रहे हैं। यह सीधा-सीधा शोषण है।”
प्रशासन की चुप्पी — संरक्षण का आरोप
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह अवैध कारोबार इतने बड़े पैमाने पर चल रहा है, तो प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिस थाना क्षेत्र में अवैध उत्खनन होगा, वहां के थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे।
इसके बावजूद जगन्नाथपुर थाना और खनन विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं है।

“जैंतगढ़ की पहचान बन गया अवैध बालू कारोबार”
मनजीत कोड़ा ने तीखा बयान देते हुए कहा —
“जैंतगढ़ अब अवैध बालू कारोबार के लिए कुख्यात हो चुका है। माफिया आस्था को रौंद रहे हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।”
पिछले साल भी हुआ था विवाद — फिर भी नहीं जागा प्रशासन
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी छठ घाट से बालू उठाने को लेकर भारी विवाद हुआ था।
व्रतियों ने प्रशासन से शिकायत भी की थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
आज हालात और बदतर हो चुके हैं।
मांग — तुरंत हो कार्रवाई, माफियाओं पर चले डंडा
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि:
* जैंतगढ़ क्षेत्र में अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगे
* छठ घाट से बालू चोरी करने वालों पर कठोर कार्रवाई हो
* खनन विभाग और थाना स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए

आखिर कब टूटेगा प्रशासन का मौन?
जैंतगढ़ में बालू माफियाओं की यह दबंगई सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज, पर्यावरण और आस्था — तीनों पर हमला है।
अब सवाल सीधा है —
क्या प्रशासन अब भी मूकदर्शक बना रहेगा, या इस संगठित लूट के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाएगा?













