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“सीमा पार बालू खेल” — खुलेआम लूट, सरकार को लाखों का चूना

On: April 28, 2026 11:15 AM
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ओड़िशा से झारखंड तक अवैध बालू का धंधा, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड-ओड़िशा सीमा पर बालू माफियाओं का खेल अब बेलगाम हो चुका है। हर दिन दर्जनों हाइवा और 16 चक्का मालवाहक वाहन ओड़िशा के राउरकेला और बिसरा क्षेत्रों से बालू लोड कर जराइकेला, मनोहरपुर के रास्ते बड़ाजामदा, नोवामुंडी, गुवा आदि तक पहुंच रहे हैं—वो भी खुलेआम और अवैध तरीके से।
यह सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि राज्य के राजस्व पर सीधा हमला है।

फाइल फोटो

 

“ओड़िशा का चालान, झारखंड में माल” — कैसे हो रहा खेल?

सूत्रों के अनुसार, वाहन मालिक ओड़िशा के बालू घाटों से बालू का उठाव तो वैध तरीके से करते हैं।
रॉयल्टी पासिंग और चालान ओड़िशा के भीतर तय स्थान तक के लिए होता है
लेकिन वास्तविकता में माल को झारखंड के बाजारों में खपा दिया जाता है
यानी कागज पर सब कुछ वैध, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह अवैध।

दोगुना मुनाफा, सरकार को नुकसान

जानकार बताते हैं कि यदि झारखंड में बालू लानी हो तो—
👉 वे-बिल (Way Bill) लेना अनिवार्य है
👉 इसके लिए राज्य सरकार को टैक्स देना पड़ता है
लेकिन माफिया इस नियम को दरकिनार कर—
* बिना वे-बिल
* बिना टैक्स
* बिना किसी रोक-टोक
बालू की सप्लाई कर रहे हैं और दोगुना से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।
इस पूरे खेल में झारखंड सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

प्रशासन की चुप्पी या मिलीभगत?

“बिना संरक्षण के संभव नहीं इतना बड़ा खेल”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर यह अवैध कारोबार आखिर कैसे चल रहा है?
सूत्र साफ इशारा कर रहे हैं—
👉 खनन विभाग
👉 स्थानीय प्रशासन
के कुछ अधिकारियों की सांठ-गांठ के बिना यह संभव नहीं।
सीमा पर न कोई सख्ती, न चेकिंग, न कार्रवाई—
ऐसे में यह धंधा दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।

रूट बना ‘स्मगलिंग कॉरिडोर’

जराइकेला–मनोहरपुर बना अवैध बालू ट्रांजिट जोन
जराइकेला और मनोहरपुर का रास्ता अब बालू माफियाओं के लिए “सुरक्षित गलियारा” बन चुका है।
दिन-रात दर्जनों गाड़ियां बिना किसी डर के इन रास्तों से गुजरती हैं और सीधे खनन क्षेत्रों और शहरों तक माल पहुंचाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि—
“अगर एक दिन सख्ती से जांच हो जाए, तो पूरा नेटवर्क उजागर हो सकता है।”

“सरकार को नुकसान, माफिया मालामाल”
कब जागेगा सिस्टम?

यह मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि—
* सरकारी खजाने की लूट
* नियमों की खुलेआम धज्जियां
* प्रशासनिक विफलता
का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
कार्रवाई नहीं हुई तो और गहराएगा ‘बालू सिंडिकेट’
अगर समय रहते इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लगाया गया, तो यह बालू सिंडिकेट और भी मजबूत होगा।
सरकार को चाहिए कि—
* सीमा पर सख्त चेकिंग हो
* वे-बिल सिस्टम को कड़ाई से लागू किया जाए
* दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
वरना यह “सीमा पार बालू खेल” झारखंड की अर्थव्यवस्था को लगातार खोखला करता रहेगा।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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