मंत्री के करीबी बबलू मिश्रा पर गंभीर आरोप, ST-SC एक्ट के तहत FIR की तैयारी, 4 मई के बाद बड़े एक्शन के संकेत
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में अब अंदरूनी आग खुलकर भड़क उठी है। वर्षों से दबे असंतोष ने अब विद्रोह का रूप ले लिया है। विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय से जो खबर सामने आई है, उसने सत्ता और सिस्टम दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रावैधिकी सचिव चंदन कुमार सहित दस अभियंताओं ने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के बेहद करीबी माने जाने वाले बबलू मिश्रा उर्फ “मामा जी” के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कर न सिर्फ विरोध जताया है, बल्कि आर-पार की लड़ाई का ऐलान भी कर दिया है।

“प्रताड़ना की हद पार”—अब नहीं सहेंगे अभियंता
सूत्रों के मुताबिक अभियंता वर्ग लंबे समय से बबलू मिश्रा के कथित अभद्र व्यवहार, दबाव और हस्तक्षेप से परेशान था। लेकिन मंत्री के करीबी होने और सत्ता की छत्रछाया के कारण अधिकारी डर और दबाव में सब कुछ सहते रहे।
हालांकि, जब मुख्य अभियंता कार्यालय में कार्यरत एक TS (टेक्निकल स्टाफ) के साथ गंभीर घटना घटी, तब मामला फूट पड़ा। अब अभियंता खुलकर सामने आ गए हैं।
उनका साफ कहना है—
“अब सहन नहीं, सीधा टकराव होगा।”
कलम बंद हड़ताल की तैयारी, राज्यव्यापी आंदोलन का संकेत
अभियंताओं का गुस्सा अब आंदोलन में बदलता दिख रहा है।
सूत्र बताते हैं कि:
* राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति बन रही है
* कलम बंद हड़ताल पर विचार चल रहा है
* विभागीय कामकाज ठप करने तक की चेतावनी दी जा रही है
अगर यह हड़ताल शुरू होती है, तो ग्रामीण कार्य विभाग पूरी तरह ठप हो सकता है।
शिकायत की कॉपी कई बड़े अधिकारियों तक पहुँची
बबलू मिश्रा के खिलाफ लिखी गई शिकायत केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम को हिलाने वाला हथियार बन चुकी है।
इस शिकायत की प्रतिलिपि भेजी गई है:
* मुख्य अभियंता सरवन कुमार
* विभागीय सचिव मनोज कुमार
* अभियंता प्रमुख
यानी मामला अब विभागीय स्तर से ऊपर उठकर प्रशासनिक संकट का रूप ले चुका है।
CM हाउस तक पहुंची शिकायत—4 मई के बाद बड़ा एक्शन?
सबसे बड़ा संकेत मुख्यमंत्री आवास से आया है।
सूत्रों के अनुसार:
👉 4 मई के बाद इस मामले में कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं
👉 मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जा चुकी है
अब पूरा विभाग और राजनीतिक गलियारा 4 मई का इंतजार कर रहा है।
ST-SC आयोग में जाने की तैयारी—बढ़ेगी मुश्किलें
मामला अब और गंभीर होता जा रहा है।
खासकर ST-SC वर्ग के अभियंता इस मामले को:
👉 ST-SC आयोग में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं
👉 कानूनी कार्रवाई के लिए दस्तावेज जुटा रहे हैं
अगर यह शिकायत दर्ज होती है, तो मामला सीधे आपराधिक दायरे में चला जाएगा।
FIR की तैयारी—ST-SC एक्ट के तहत केस संभव
सूत्रों के मुताबिक विभागीय सचिव मनोज कुमार इस शिकायत को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।
जानकारी यह भी है कि:
* शिकायत को FIR में बदलने पर कानूनी सलाह ली जा रही है
* ST-SC एक्ट के तहत मामला दर्ज हो सकता है
अगर ऐसा होता है, तो बबलू मिश्रा के लिए मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी।
“मामा जी” का दबदबा—ट्रांसफर से टेंडर तक हस्तक्षेप
बबलू मिश्रा पर आरोप कोई नए नहीं हैं।
सूत्र बताते हैं कि:
* ट्रांसफर-पोस्टिंग में सीधा हस्तक्षेप
* टेंडर प्रक्रिया में दबाव
* विभागीय निर्णयों पर अनधिकृत नियंत्रण
इसी कारण विभाग में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था।
मंत्री पर भी उठ रहे सवाल—राजनीतिक संकट गहराया
अब मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा।
विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भी सवालों के घेरे में आ गई हैं।
👉 मंत्री बनने के बाद से ही बबलू मिश्रा की शिकायतें लगातार आती रही हैं
👉 कांग्रेस के कई विधायक भी इस कार्यशैली से नाराज़ बताए जा रहे हैं
👉 मामला दिल्ली तक पार्टी नेतृत्व के पास पहुंच चुका है
यानी यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं, अब राजनीतिक संकट भी बन चुका है।
पूर्व सचिव के साथ भी टकराव—पुराना विवाद फिर चर्चा में
यह विवाद अचानक नहीं फूटा है।
सूत्रों के अनुसार:
* तत्कालीन सचिव के. श्रीनिवासन और मंत्री के बीच गंभीर मतभेद थे
* विभाग में खटास चरम पर पहुंच चुकी थी
अब यह नया विवाद उसी पुराने संघर्ष का अगला अध्याय माना जा रहा है।
अभियंताओं का अल्टीमेटम—“सम्मान चाहिए, नहीं तो संघर्ष होगा”
अभियंताओं का रुख अब साफ है:
👉 या तो कार्रवाई होगी
👉 या आंदोलन तेज होगा
वे अब पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।
सबसे बड़ा सवाल—झुकेंगे या लड़ेंगे?
अब पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है:
* क्या अभियंता दबाव में आकर शिकायत वापस ले लेंगे?
* या फिर अपनी इज्जत और आत्मसम्मान के लिए अंत तक लड़ेंगे?
* क्या मंत्री पर कार्रवाई होगी?
* क्या बबलू मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज होगी?
इन सभी सवालों का जवाब 4 मई के बाद साफ होने की उम्मीद है।
सत्ता बनाम सिस्टम—कौन जीतेगा?
ग्रामीण कार्य विभाग में छिड़ी यह जंग अब निर्णायक मोड़ पर है।
एक तरफ सत्ता का प्रभाव और राजनीतिक दबाव है,
तो दूसरी तरफ अभियंताओं का आक्रोश और आत्मसम्मान।
अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि:
👉 सिस्टम झुकता है या सत्ता
👉 कार्रवाई होती है या समझौता
👉 या फिर यह लड़ाई झारखंड की राजनीति में नया भूचाल लाती है
फिलहाल इतना तय है—यह मामला अब दबने वाला नहीं है।














