डेढ़ माह के मासूम को खिड़की से फेंका, दूसरे बच्चे को भी मारने की कोशिश; जनशताब्दी एक्सप्रेस में चीख-पुकार से दहल उठा रेल डिब्बा
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
चक्रधरपुर रेल मंडल से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। मां की गोद, जिसे दुनिया में सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, वही गोद एक मासूम के लिए मौत का कारण बन गई।
चलती ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों की आंखों के सामने एक मां ने अपने ही डेढ़ महीने के नवजात बच्चे को ट्रेन की खिड़की से बाहर फेंक दिया। मासूम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इतना ही नहीं, महिला ने अपने तीन साल के दूसरे बच्चे को भी बाहर फेंकने की कोशिश की, लेकिन यात्रियों की सतर्कता ने उसकी जान बचा ली।
यह भयावह घटना बुधवार को ट्रेन संख्या 12021 हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस में राजखरसावां और महालीमरूप स्टेशन के बीच घटी। घटना के बाद पूरे ट्रेन डिब्बे में अफरा-तफरी, चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया।

एक पल में उजड़ गई मासूम की दुनिया
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेन तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। कोच में यात्री सामान्य तरीके से सफर कर रहे थे। तभी अचानक महिला अपनी सीट से उठी और अपनी गोद में सो रहे डेढ़ माह के मासूम को खिड़की की तरफ ले जाकर बाहर उछाल दिया।
घटना इतनी अचानक हुई कि लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। जब तक यात्रियों की नजर बाहर गई, तब तक मासूम रेलवे ट्रैक के किनारे जा गिरा था। कोच में बैठे यात्रियों की रूह कांप उठी। कई महिलाएं चीखने लगीं, जबकि कुछ लोग सदमे में खड़े रह गए।
लेकिन हैरानी और भय का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। नवजात को फेंकने के कुछ ही सेकंड बाद महिला ने अपने तीन साल के दूसरे बच्चे को भी पकड़कर खिड़की से बाहर फेंकने की कोशिश शुरू कर दी।
इस बार यात्रियों ने साहस दिखाया। कुछ युवकों और महिलाओं ने तुरंत महिला को पकड़ लिया और बच्चे को उसकी गिरफ्त से छुड़ाकर सुरक्षित किया। डिब्बे में मौजूद लोगों ने तत्काल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सूचना दी और महिला व उसके पति को निगरानी में रखा।
ट्रेन में मचा हड़कंप, यात्रियों के चेहरे पर दहशत
घटना के बाद पूरे कोच में मातम जैसा माहौल बन गया। यात्रियों के मुताबिक, कई लोग इस दृश्य को देखकर रो पड़े। छोटे-छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिलाएं अपने बच्चों को सीने से चिपकाकर बैठ गईं।
कुछ यात्रियों ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में इतनी भयावह घटना कभी नहीं देखी। लोगों के बीच सिर्फ एक ही सवाल था — आखिर कोई मां अपने ही कलेजे के टुकड़े के साथ ऐसा कैसे कर सकती है?
ट्रैक किनारे मिला मासूम का क्षत-विक्षत शव
घटना की सूचना मिलते ही आरपीएफ और जीआरपी की टीम सक्रिय हो गई। सिनी पोस्ट से जवानों को तत्काल मौके पर भेजा गया।
महालीमरूप और राजखरसावां स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर घंटों सर्च ऑपरेशन चलाया गया। काफी तलाश के बाद झाड़ियों के पास मासूम का शव बरामद किया गया। बच्चे की हालत इतनी भयावह थी कि वहां मौजूद जवानों और स्थानीय लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। रेलवे अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के चेहरे पर भी घटना को लेकर गंभीरता साफ दिखाई दे रही थी।
प्रेम विवाह, भागकर शादी और फिर तनाव भरी जिंदगी
पुलिस जांच में आरोपी महिला की पहचान पश्चिम सिंहभूम जिले के मझगांव क्षेत्र निवासी मुद्रावती गोप के रूप में हुई है। वहीं उसके पति का नाम शाहबुद्दीन बताया गया है, जो पश्चिम बंगाल का रहने वाला है।
जानकारी के मुताबिक, करीब चार साल पहले शाहबुद्दीन महिला को अपने साथ लेकर चला गया था। बाद में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद महिला का नाम बदलकर हसीना बेगम रखा गया और दोनों हैदराबाद में रहने लगे।
महिला के परिजनों ने पहले ही मझगांव थाने में शाहबुद्दीन के खिलाफ बेटी को भगाकर शादी करने का मामला दर्ज कराया था। बताया जा रहा है कि पुलिस के बढ़ते दबाव और पारिवारिक तनाव के कारण दंपती अपने बच्चों के साथ वापस मझगांव लौट रहा था। इसी दौरान ट्रेन में यह दर्दनाक घटना घट गई।
क्या मानसिक तनाव बना मासूम की मौत की वजह?
फिलहाल पुलिस ने आरोपी महिला को चाईबासा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया है। जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही है।
पुलिस इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि आखिर एक मां अपनी ही संतान की हत्या करने पर क्यों उतारू हो गई। शुरुआती जांच में पुलिस मानसिक तनाव, प्रसव के बाद अवसाद (Postpartum Depression), पारिवारिक दबाव, सामाजिक भय और घरेलू कलह जैसे पहलुओं पर भी जांच कर रही है।
हालांकि अभी तक किसी निष्कर्ष पर पुलिस नहीं पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि महिला की मानसिक स्थिति की भी जांच कराई जा सकती है।
“मां” शब्द पर लगा सबसे बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक भयावह सवाल भी है। जिस मां को ममता की मूर्ति कहा जाता है, उसी के हाथों मासूम की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है।
रेल डिब्बे में मौजूद यात्रियों के मन में अब भी वही खौफनाक दृश्य घूम रहा है। लोगों का कहना है कि मासूम की चीख तक सुनने का मौका नहीं मिला और उसकी जिंदगी खत्म हो गई।
इस घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक मासूम, जिसने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, वह अपनी मां के हाथों मौत के मुंह में चला गया। पूरे कोल्हान और चक्रधरपुर रेल मंडल में इस घटना की चर्चा है और हर जुबान पर एक ही सवाल — आखिर क्यों?










