“प्रकृति से प्रेरणा, जलवायु के लिए संकल्प, भविष्य के लिए संरक्षण”
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को सेल, मेघाहातुबुरु खदान के जनरल ऑफिस प्रांगण में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाप्रबंधक प्रभारी संजय कुमार सिंह ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण सुरक्षा की शपथ दिलाते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना केवल एक दिवस का अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है।
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “Inspired by Nature for Climate, For Your Future” रही, जिसका भावार्थ है—“प्रकृति से प्रेरित होकर जलवायु की रक्षा करें, ताकि आपका भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बन सके।” इसी संदेश को आत्मसात करते हुए सेल कर्मियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

पर्यावरण के हर नियम का पालन करने की ली शपथ
महाप्रबंधक प्रभारी संजय कुमार सिंह ने सभी कर्मियों को शपथ दिलाते हुए कहा कि वे खदानों में कार्य करते समय पर्यावरण से जुड़े प्रत्येक नियम का पालन करेंगे। साथ ही खान क्षेत्र एवं टाउनशिप को प्रदूषण मुक्त रखने तथा स्वच्छ एवं सुंदर वातावरण के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। यदि आज हम प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।
पूर्वजों ने दिया स्वच्छ पर्यावरण, हमने बढ़ाया प्रदूषण
अपने संबोधन में संजय कुमार सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण विरासत में दिया था, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और स्वार्थपूर्ण विकास की दौड़ में हमने प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि पिछले सौ से डेढ़ सौ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों और अनियंत्रित प्रदूषण ने धरती के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है। ओजोन परत कमजोर हो रही है, वातावरण में हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ रही है और वैश्विक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कई स्थानों पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। यदि समय रहते जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्लास्टिक छोड़ें, पौधों से जोड़ें जीवन
महाप्रबंधक ने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, कार्यालय और आसपास की खाली जमीन पर अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए। पौधे ही पृथ्वी के प्राकृतिक एयर कंडीशनर हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध बनाते हैं।

जूट बैग वितरण कर दिया पर्यावरण मित्र जीवन का संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच जूट के बैग वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य प्लास्टिक थैलियों के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना था।
सभी प्रतिभागियों से अपील की गई कि वे बाजार जाते समय कपड़े या जूट के बैग का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
40 हजार पौधे लगाने और उन्हें बचाने का लिया संकल्प
विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण वृक्षारोपण अभियान रहा। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर लगभग 40 हजार पौधे लगाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने का सामूहिक निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवित रखना और पेड़ बनने तक उनकी सुरक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण ही मानव अस्तित्व की सुरक्षा
कार्यक्रम में महाप्रबंधक नवीन कुमार सोनकुश्रे, योगेश प्रसाद राम, के.बी. थापा, मनोज कुमार, आफताब आलम, राजकुमार प्रसाद समेत अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी, जल संकट और जैव विविधता के नुकसान जैसी चुनौतियों का समाधान केवल प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित कर ही संभव है।

संदेश : भविष्य बचाना है तो प्रकृति को बचाना होगा
विश्व पर्यावरण दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक मजबूत संदेश लेकर आया कि “यदि पृथ्वी को हरा-भरा और जीवन योग्य बनाए रखना है तो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा।”
प्रकृति हमें जीवन देती है, जलवायु को संतुलित रखती है और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित बनाती है। इसलिए आज का संकल्प यही होना चाहिए—एक व्यक्ति, एक पौधा; एक परिवार, स्वच्छ पर्यावरण; और एक समाज, हरित भविष्य।









