संयुक्त यूनियनों ने दी आंदोलन तेज करने और चक्का जाम की चेतावनी
रिपोर्ट शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
सेल की लौह अयस्क खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने को लेकर प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियनों के बीच चल रहा विवाद और गहरा गया है। सोमवार को गुवा स्थित एचआरडी कार्यालय में प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों और संयुक्त यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की लंबी वार्ता हुई, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार वार्ता विफल होने पर संयुक्त यूनियनों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय का अंतिम फैसला आने तक किसी भी कीमत पर बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था लागू नहीं होने दी जाएगी। बैठक में सीजीएम चंद्रभूषण कुमार, महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, अर्णव डे, एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो, थाना प्रभारी नीतीश कुमार आदि अधिकारी और यूनियन प्रतिनिधि शामिल थे।

एसडीपीओ ने की समाधान निकालने की अपील
बैठक में किरीबुरू के एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों से न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करने तथा आपसी संवाद के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय से ही औद्योगिक शांति बनी रह सकती है।
यूनियनों का तर्क- मामला अभी विचाराधीन
संयुक्त यूनियनों के नेताओं ने बैठक में कहा कि वे न्यायालय और कानून व्यवस्था का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन बायोमेट्रिक हाजिरी का मामला मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम आदेश आने तक वर्षों से चली आ रही पुरानी हाजिरी व्यवस्था को ही जारी रखा जाना चाहिए।
यूनियन नेताओं ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकारी का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक नई व्यवस्था को लागू करना श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी होगी।

प्रबंधन पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप
बैठक के दौरान संयुक्त यूनियनों ने सेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि बिना श्रमिक संगठनों से सहमति बनाए और बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श के पंचिंग कार्ड एवं पुरानी उपस्थिति प्रणाली को समाप्त करने का प्रयास किया गया है। यूनियनों का आरोप है कि कर्मचारियों पर जबरन बायोमेट्रिक व्यवस्था थोपने की कोशिश की जा रही है, जिसे वे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।
आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी
वार्ता विफल होने के बाद यूनियन नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि प्रबंधन ने जबरन बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का प्रयास किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर सेल की खदानों में व्यापक आंदोलन, कार्य बहिष्कार और चक्का जाम जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
चारों खदानों में दिखा विरोध का व्यापक असर
उल्लेखनीय है कि सोमवार की पहली पाली से ही किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों में हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक मशीनों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके कारण कई स्थानों पर उत्पादन कार्य प्रभावित हुआ, वहीं लौह अयस्क की लोडिंग और परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा। श्रमिकों के सामूहिक विरोध ने यह संकेत दे दिया है कि यह विवाद अब केवल हाजिरी प्रणाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि श्रमिक अधिकारों और औद्योगिक संवाद का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

अब न्यायालय और अगली वार्ता पर टिकी निगाहें
फिलहाल सेल प्रबंधन और संयुक्त यूनियनों के बीच गतिरोध बरकरार है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष चल रही प्रक्रिया, न्यायालय के संभावित निर्णय और आगामी वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में लौह अयस्क उत्पादन और खनन कार्यों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।










