झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने सेल प्रबंधन को दी चेतावनी, कहा— “श्रम कानूनों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं”
रिपोर्ट संदीप गुप्ता।
गुवा में ठेका मजदूरों से अधिकारियों के सरकारी आवासों में निजी कार्य कराए जाने के आरोप ने श्रमिक राजनीति को गरमा दिया है। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने गुवा स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सेल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

मजदूरों की शिकायतों ने बढ़ाई हलचल
रामा पांडे ने कहा कि यूनियन को लगातार कई ठेका श्रमिकों से शिकायतें मिल रही हैं कि उनसे उनके निर्धारित कार्यस्थल के बजाय कुछ अधिकारियों के सरकारी आवासों में निजी कार्य कराया जा रहा है। यह न केवल श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि ठेका श्रम व्यवस्था की मूल भावना के भी खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि ठेका मजदूरों की नियुक्ति औद्योगिक कार्यों और सार्वजनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए होती है, न कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत सुविधा के लिए। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर अनियमितता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग बर्दाश्त नहीं”
यूनियन अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ठेका मजदूरों से घरेलू और निजी कार्य करवा रहे हैं। उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल की श्रेणी में बताया।
रामा पांडे ने कहा कि मजदूरों को कभी-कभी दबाव या प्रलोभन देकर इस तरह के कामों में लगाया जाता है। ऐसे हालात में मजदूर खुलकर विरोध नहीं कर पाते, जिससे शोषण की स्थिति और गहरी हो जाती है।
यूनियन ने रखी स्पष्ट मांग
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने मांग की है कि ठेका मजदूरों से केवल सेल के उत्पादन, रखरखाव और सार्वजनिक हित के कार्यों में ही सेवा ली जाए। अधिकारियों के निजी आवासों में किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत कार्य कराना तुरंत बंद किया जाए।
यूनियन ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर ऐसा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
रामा पांडे ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई और इस प्रथा पर रोक नहीं लगी, तो यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बयान के बाद गुवा खदान क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें सेल, गुवा प्रबंधन की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।













