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सुशील बारला ने आंदोलित ग्रामीणों की मांगें पूरी करने की उठाई आवाज

On: July 9, 2026 5:18 PM
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भारत आदिवासी पार्टी ने सेल प्रबंधन पर हठधर्मिता का आरोप लगाया, जिला प्रशासन से प्रभावित 10 गांवों के बेरोजगारों को रोजगार दिलाने और दुबिल के देशाऊली-कब्रिस्तान की घेराबंदी हटाने की मांग।

रिपोर्ट शैलेश सिंह 

भारत आदिवासी पार्टी के पश्चिम सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सेल लौह अयस्क खान, चिरिया से प्रभावित दुबिल समेत 10 गांवों के ग्रामीण रोजगार की मांग को लेकर माइंस के प्रवेश द्वार पर पिछले 12 दिनों से आंदोलनरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन की हठधर्मिता के कारण ग्रामीणों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

रोजगार की मांग को लेकर लगातार आंदोलन

सुशील बारला ने कहा कि राजस्व ग्राम दुबिल के बेरोजगार वर्षों से माइंस से निकलने वाले लाल पानी से प्रभावित रैयतों को रोजगार देने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

सीपीसीबी की रिपोर्ट का दिया हवाला

उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पत्र संख्या आईएनसी-25/2011 दिनांक 30 जुलाई 2011 के आलोक में 22 अक्टूबर 2011 को दुबिल एवं छोटानागरा का स्थल निरीक्षण किया था। जांच के दौरान दुबिल गांव में माइंस से बहने वाले लाल पानी के कारण खेती योग्य भूमि के बंजर होने की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों के बेरोजगारों को रोजगार नहीं दिया गया।

पूजा स्थल और कब्रिस्तान की घेराबंदी पर उठाए सवाल

जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन ने राजस्व ग्राम दुबिल के खाता संख्या-7, खेसरा संख्या-45, जहां गांव का देशाऊली स्थित है, तथा प्लॉट संख्या-232, जहां कब्रिस्तान है, वहां पिलर लगाकर घेराबंदी कर दी है। उनका कहना है कि हाल के सर्वे खतियान में भी उक्त भूमि का उल्लेख दर्ज है। उन्होंने इसे छोटानागपुर कास्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 50(7) का उल्लंघन बताते हुए कहा कि मंदिर, मस्जिद, पूजा स्थल, पवित्र उपवन, कब्रिस्तान और श्मशान जैसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता।

जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

सुशील बारला ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सेल प्रभावित दुबिल समेत 10 गांवों के बेरोजगारों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराया जाए तथा दुबिल के देशाऊली और कब्रिस्तान की गई घेराबंदी हटाने के लिए सकारात्मक पहल की जाए। उन्होंने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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