मनोहरपुर गेस्ट हाउस में ढाई घंटे चली हाई-लेवल बैठक, विधायक सोनाराम सिंकु की मौजूदगी में भी नहीं बनी सहमति
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सेल की चिरिया स्थित दुबिल माइंस के मुख्य गेट पर पिछले 15 दिनों से जारी ग्रामीणों की आर्थिक नाकेबंदी को समाप्त कराने के लिए शुक्रवार को मनोहरपुर रेलवे साइडिंग स्थित गेस्ट हाउस में हुई अहम वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। करीब ढाई घंटे तक चली इस बैठक में रोजगार, कब्रिस्तान की घेराबंदी और स्थानीय अधिकारों जैसे मुद्दों पर लंबी बहस हुई, लेकिन रोजगार को लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिलने से ग्रामीणों ने वार्ता को अस्वीकार कर दिया। इसके साथ ही आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर दी गई।

विधायक सोनाराम सिंकु की मौजूदगी में हुई अहम बैठक
दोपहर 3:05 बजे शुरू हुई बैठक में जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु की मौजूदगी में सेल प्रबंधन, माइंस ठेकेदार और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई।
बैठक में सेल की ओर से सीजीएम चंद्र भूषण कुमार, जीएम रवि रंजन, एजीएम एस.एस. राव और अजय पत्री उपस्थित थे। वहीं माइंस ठेकेदार की ओर से गोल्डी सिंह और तनवीर सिंह शामिल हुए। ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व दुलाल आइंद, सुनील हांसदा, गुरा मुर्मू, बीरसिंह हांसदा, दर्शन चंपिया समेत अन्य लोगों ने किया।
सेल का दावा—2022 तक 30 ग्रामीण कर रहे थे काम
वार्ता के दौरान सेल अधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2022 तक दुबिल गांव के लगभग 30 लोग माइंस में कार्यरत थे, लेकिन विभिन्न परिस्थितियों के कारण फिलहाल वे काम नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना था कि रोजगार देने की प्रक्रिया माइंस के संचालन और कार्य विस्तार पर निर्भर करेगी।
ठेकेदार ने कहा—काम बढ़ेगा तो स्थानीयों को प्राथमिकता देंगे
माइंस ठेकेदार के प्रतिनिधियों ने कहा कि अभी उनका काम पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है। जैसे-जैसे कार्य का विस्तार होगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्रामीणों का दो-टूक जवाब—”रामायण नहीं, रोजगार चाहिए”
सेल अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट ग्रामीणों ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा—
“हम यहां सेल का रामायण सुनने नहीं आए हैं। साफ बताइए कि कितने लोगों को रोजगार देंगे।”
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें ठेकेदार के माध्यम से तत्काल रोजगार दिया जाए और इसकी लिखित गारंटी भी दी जाए।

20 लोगों को तुरंत नौकरी, बाकी 150 को तीन महीने में लेने की मांग
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव रखा कि तत्काल 20 लोगों को रोजगार दिया जाए और माइंस चालू होने के तीन महीने के भीतर शेष लगभग 150 युवाओं को भी रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया जाए।
ग्रामीणों ने यहां तक कह दिया कि यदि माइंस स्थानीय लोगों को रोजगार देने में सक्षम नहीं है, तो उसे बंद कर देना चाहिए और पहले से बंद पड़ी अन्य माइंसों को चालू करने की दिशा में सरकार पहल करे।
सीजीएम बोले—’दो महीने माइंस चलने दीजिए’
सेल के सीजीएम चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि माइंस पूरी तरह चालू होने से पहले रोजगार की संख्या तय करना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा कि पहले दो महीने तक माइंस का संचालन होने दिया जाए। उसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सेल एक सरकारी उपक्रम है और हर निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।
कब्रिस्तान की घेराबंदी पर भी फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने दुबिल गांव के कब्रिस्तान की कथित घेराबंदी का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया और इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
सोनाराम सिंकु ने जताई नाराजगी
बैठक के दौरान विधायक सोनाराम सिंकु ने भी सेल प्रबंधन और ठेकेदार के बीच तालमेल की कमी पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि यदि सेल रोजगार देने की स्थिति में नहीं है, तो इस तरह की वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय युवाओं के हित में ठोस पहल करने की आवश्यकता बताई।
10–15 लोगों के रोजगार का प्रस्ताव भी नहीं आया काम
सूत्रों के अनुसार ठेकेदार की ओर से 10 से 15 लोगों को रोजगार देने का लिखित आश्वासन देने की कोशिश की गई, लेकिन सेल अधिकारियों ने सरकारी प्रक्रिया का हवाला देते हुए रोजगार संबंधी कोई लिखित प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया। इसी कारण वार्ता अंततः बेनतीजा समाप्त हो गई।

पुराने मजदूर की चेतावनी—’741 निकाले गए मजदूरों को पहले बहाल करो’
वार्ता शुरू होने से पहले माइंस के पूर्व मजदूर राजकुमार लोहार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में निकाले गए 741 मजदूरों को पहले काम पर वापस लिया जाए, अन्यथा वे भी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व माइंस ठेकेदार की कार्यशैली के कारण ही हालात बिगड़े और वर्षों से काम करने वाले मजदूर बेरोजगार हो गए।
ग्रामीणों का ऐलान—लिखित आश्वासन नहीं, तो आंदोलन जारी
ग्रामीण प्रतिनिधि दुलाल आइंद ने स्पष्ट कहा,
“सेल की ओर से हमें रोजगार को लेकर कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला। इसलिए हमारा आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।”
वहीं विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि सेल के सीजीएम ने प्रक्रिया के तहत कुछ लोगों के रोजगार का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजने की बात कही, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हुए। इसी कारण वार्ता का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका।
फिलहाल 15 दिनों से जारी आर्थिक नाकेबंदी बरकरार है और अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सेल प्रबंधन, जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस बढ़ते गतिरोध का समाधान कैसे निकालते हैं।













