मेघाहातुबुरू से हेमंत सरकार पर सीधा वार
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मेघाहातुबुरू स्थित सेल (SAIL) गेस्ट हाउस से हेमंत सोरेन सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है और जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

“पुलिस सुरक्षा छोड़, अवैध वसूली में व्यस्त”
मरांडी ने कहा कि झारखंड में कानून के रखवालों के सामने ही हत्याएं हो रही हैं। पुलिस अपराध रोकने के बजाय कोयला और बालू के अवैध कारोबार से वसूली में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची है।
“अवैध बालू के पैसे से भर रही मुख्यमंत्री की तिजोरी”
अवैध बालू खनन को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरे राज्य में बालू का अवैध खेल धड़ल्ले से चल रहा है और इसकी काली कमाई से सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार घिरी
मरांडी ने कहा कि:
पढ़े-लिखे नौजवान रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
गरीब जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान है।
सरकार जनहित के बजाय भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।
DMFT फंड में बंदरबांट का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और बंदरबांट का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
भाजपा नेताओं का शक्ति प्रदर्शन
मेघाहातुबुरू में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद, मंगल गिलुवा, अजीत सिंह, महेंद्र महाकुंड, श्याम गुप्ता, संजीव सिंह, नीरज राम, कनक मिश्रा, बंटी सरदार, वीरेंद्र मिश्रा, गोपी लागुरी, राजेश करजी, जावेद अख्तर, आसना बिरुवा सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।

‘हो’ भाषा और सरना धर्म कोड की मांग फिर हुई तेज
बाबूलाल मरांडी को सौंपा गया स्मरण पत्र
आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा की केंद्रीय समिति ने राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी के नेतृत्व में बाबूलाल मरांडी को स्मरण पत्र सौंपकर ‘हो’ समाज की वर्षों पुरानी संवैधानिक मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।
प्रमुख मांगें
* ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
* आदिवासियों के लिए अलग ‘सरना धर्म कोड’ लागू किया जाए।
“संसद में उठी मांग, अब केंद्र करे पहल”
महासभा का कहना है कि इन मुद्दों को लोकसभा और राज्यसभा के माध्यम से कई बार केंद्र सरकार के सामने रखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
“सम्मान और पहचान की लड़ाई जारी रहेगी”
राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी ने कहा कि ‘हो’ समाज अपनी भाषा और धार्मिक पहचान के सम्मान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लगातार संघर्ष कर रहा है और उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर कमल किशोर सिरका, माधव चन्द्र कोड़ा, उम्लन हेस्सा, धनुर्जय लागुरी और संतोष पांडा सहित समाज के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।













