ऊसरूईया नदी पर बन रहा पुल बना ग्रामीणों की चिंता, बरसात में दर्जनों गांवों का संपर्क अब भी कटने का खतरा
रिपोर्ट शैलेश सिंह
घटिया निर्माण की जांच और भुगतान पर रोक की उठी मांग
सारंडा। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में ऊसरूईया गांव के समीप नदी पर निर्माणाधीन पुल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सारंडा के दर्जनों गांवों की ‘लाइफ लाइन’ माने जाने वाले इस पुल के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं और गुणवत्ता से समझौता किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच वर्षों से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पुल आज तक पूरा नहीं हो सका। अधूरे निर्माण और कथित तकनीकी खामियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

पांच साल बाद भी अधूरा पुल
ग्रामीणों के अनुसार रांची के एक ठेकेदार द्वारा पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। बरसात के मौसम में लोगों को आज भी नदी पार करने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
‘नींव से ही गुणवत्ता से समझौता’ का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के निर्माण की शुरुआत से ही गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री और कार्य शैली को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मजदूरों ने भी लगाया कम मजदूरी का आरोप
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पुल निर्माण में लगे स्थानीय मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी गई। उनका कहना है कि लंबे समय तक काम कराने के बावजूद उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिला।

पूर्व सांसद ने भी किया था निरीक्षण
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के शुरुआती चरण में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर तत्कालीन सांसद गीता कोड़ा ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। ग्रामीणों का दावा है कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई थी और मामले को उच्च स्तर पर उठाने की बात कही थी।
अब पुल की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के बीच में बनाए गए ज्वाइंट ठीक तरीके से नहीं किए गए हैं। इसके अलावा बीम, एप्रोच सड़क और गार्डवाल के निर्माण को लेकर भी ग्रामीण गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि कई हिस्सों में कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिखता।
इन दावों का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन अभी नहीं हुआ है।
‘तकनीकी जांच कराई जाए’
ग्रामीणों और क्षेत्र के कुछ लोगों का कहना है कि पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि जांच से ही स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

भुगतान रोकने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक पुल निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ठेकेदार का अंतिम भुगतान रोक दिया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है यह पुल
ऊसरूईया नदी पर बन रहा यह पुल छोटानागरा, सोनापी, हतनाबरू, बढ़ुईआ, ऊसरूईया, कुदलीबाद, कोलाइबुरु, कुमडीह, बालिबा और थोलकोबाद सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में हर वर्ष बरसात के दौरान इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय, थाना, अस्पताल, हाट-बाजार, अनुमंडल और जिला मुख्यालय से लगभग कट जाता है।
बरसात में थम जाती है जिंदगी
ग्रामीण बताते हैं कि नदी का जलस्तर बढ़ते ही आवाजाही बंद हो जाती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, बच्चों का स्कूल जाना, किसानों का बाजार पहुंचना और दैनिक जरूरतों की पूर्ति तक प्रभावित हो जाती है।
वनोपज और कृषि उत्पाद भी बाजार तक नहीं पहुंच पाते, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों की मांग—जांच भी हो, निर्माण भी पूरा हो
ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पुल का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूरा कराया जाए।














