झाड़बेड़ा के पास नई सड़क हुई क्षतिग्रस्त, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
रिपोर्ट शैलेश सिंह
किरीबुरू–मनोहरपुर मुख्य मार्ग पर सारंडा घाटी स्थित झाड़बेड़ा गांव के समीप हाल ही में निर्मित मुख्य सड़क में आई बड़ी दरार ने सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क का यह हिस्सा अभी पूरी तरह नया है, लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसमें चौड़ी और गहरी दरार दिखाई देने लगी है। इससे स्थानीय लोगों और राहगीरों में भारी चिंता व्याप्त है।

जहां गार्डवाल बना, वहीं सड़क कैसे फटी?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर सड़क में बड़ी दरार आई है, वहां पहले से गार्डवाल (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण किया गया था। सामान्य परिस्थितियों में गार्डवाल का उद्देश्य सड़क को मजबूत आधार देना और भूस्खलन अथवा धंसाव से बचाना होता है।
ऐसे में गार्डवाल के बावजूद सड़क का इस तरह फट जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी सड़क में इस प्रकार की दरार नहीं आती।
हर गुजरते दिन बढ़ रहा खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क में आई दरार लगातार चिंता का कारण बनी हुई है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो सड़क का बड़ा हिस्सा कभी भी धंस सकता है या टूटकर अलग हो सकता है।
यह मार्ग किरीबुरू, मेघाहातुबुरू और मनोहरपुर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन भारी मालवाहक वाहन, बसें, एंबुलेंस और सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यात्रियों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए
बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। लगातार वर्षा के कारण दरार बढ़ने और सड़क के धंसने का खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होना चाहिए, बल्कि तत्काल तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
पथ निर्माण विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने पथ निर्माण विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाए कि सड़क निर्माण में कहीं घटिया सामग्री का उपयोग तो नहीं किया गया या तकनीकी मानकों की अनदेखी तो नहीं हुई।
यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अभियंताओं की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
करोड़ों की परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं
सरकार सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके। लेकिन यदि नई सड़कें कुछ ही दिनों में दरकने लगें तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।
सारंडा घाटी की यह घटना इस बात का संकेत है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना कितना आवश्यक है।
अब कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पथ निर्माण विभाग तत्काल क्षतिग्रस्त स्थल का निरीक्षण कर सड़क की मरम्मत कराए, आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करे तथा पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। लोगों का कहना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर भविष्य की संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाए।














