समान काम का समान वेतन, श्रमिकों का स्थायीकरण और सीएसआर में स्थानीय भागीदारी की उठी जोरदार मांग
रिपोर्ट शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने क्षेत्र के ठेका श्रमिकों के अधिकार, स्थानीय विकास और आदिवासी अस्मिता से जुड़े मुद्दों को लेकर जगन्नाथपुर के विधायक एवं झारखंड सरकार के उप मुख्य सचेतक सोनाराम सिंकु को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। महासभा ने मांग की कि वर्षों से लंबित श्रमिक हितों और आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण मांगों पर सरकार तत्काल प्रभावी पहल करे।
ज्ञापन में किरीबुरु एवं मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदानों में कार्यरत ठेका श्रमिकों की समस्याओं के साथ-साथ कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी और ‘हो’ भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

‘समान काम का समान वेतन’ लागू करने की मांग
महासभा ने कहा कि खदानों में वर्षों से कार्यरत ठेका श्रमिक नियमित कर्मचारियों की तरह ही कठिन और जोखिम भरा कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें समान कार्य के अनुरूप वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं।
संगठन ने मांग की कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को तत्काल लागू किया जाए, ताकि ठेका श्रमिकों के साथ हो रहे आर्थिक भेदभाव को समाप्त किया जा सके।
दस वर्ष से अधिक सेवा देने वाले श्रमिकों का हो स्थायीकरण
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि जो ठेका श्रमिक 10 वर्ष या उससे अधिक समय से लगातार खदानों में कार्यरत हैं, उनके स्थायीकरण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
महासभा का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद हजारों श्रमिक आज भी अस्थायी व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनके भविष्य और सामाजिक सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न बना हुआ है।
सीएसआर योजनाओं में स्थानीय संगठनों को मिले भागीदारी
महासभा ने खदानों द्वारा संचालित कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) योजनाओं में स्थानीय सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
प्रतिनिधियों का कहना था कि यदि स्थानीय संगठनों को योजना निर्माण और क्रियान्वयन में शामिल किया जाएगा तो विकास कार्य अधिक पारदर्शी होंगे और उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचेगा। इससे क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएं भी तैयार की जा सकेंगी।
‘हो’ भाषा को मिले संवैधानिक दर्जा
महासभा ने विधायक को एक अलग मांगपत्र सौंपते हुए ‘हो’ भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई।
संगठन का कहना है कि ‘हो’ भाषा आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। इसे संवैधानिक मान्यता मिलने से भाषा के संरक्षण, शिक्षा और साहित्य के विकास को नई दिशा मिलेगी।
सरना धर्म कोड लागू करने की दोहराई मांग
महासभा ने आदिवासी समाज के लिए अलग सरना धर्म कोड लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मुद्दे पर लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को अलग मान्यता मिलनी चाहिए, ताकि उनकी परंपराओं, संस्कृति और आस्था का उचित संरक्षण हो सके।
विधायक से सरकार तक आवाज पहुंचाने की अपील
महासभा के प्रतिनिधियों ने विधायक सोनाराम सिंकु से आग्रह किया कि वे झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के समक्ष इन सभी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाएं तथा इनके शीघ्र समाधान के लिए सकारात्मक पहल करें।
प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग से श्रमिकों के अधिकार, स्थानीय विकास और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक प्रगति संभव होगी।
ये रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान महासभा के गोपी लागुरी, माधव चन्द्र कोड़ा, सेरगेया अंगरिया, श्याम बिरुवा, शांतनु बिरुली, उम्बलेन हेस्सा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि श्रमिकों के अधिकारों, स्थानीय विकास और आदिवासी अस्मिता के प्रश्न पर संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।














