विधायक सोनाराम सिंकु बोले—मौलिक अधिकारों की लड़ाई के लिए शिक्षा सबसे जरूरी
जगन्नाथपुर। रिपोर्ट शैलेश सिंह।
जगन्नाथपुर रस्सैल उच्च विद्यालय प्लस टू परिसर में रविवार को कांग्रेस पार्टी के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भव्य सांस्कृतिक रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य करते हुए लोगों ने नगर का भ्रमण किया और रितुई गुंडुई शहीद स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम स्थल पर विधायक सोनाराम सिंकु, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रफाएल मुर्मू, बीडीओ अम्बिका कुमारी एवं सीओ मनोज मिश्रा ने बिरसा मुंडा, फूलो-झानो, पोटो हो, सिद्धू-कान्हू, ओत गुरु लाको बोदरा और जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।

लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
विश्व आदिवासी दिवस समारोह में आदिवासी संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली। विभिन्न लोकनृत्य दलों ने पारंपरिक गीत-संगीत एवं नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के दौरान मुंडा-मानकी, डाकुवा, दिउरी, पंचायत जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।

‘शिक्षा के बिना अंधकार ही अंधकार’—सोनाराम सिंकु
समारोह को संबोधित करते हुए विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि “अपने मौलिक अधिकारों के लिए एक और लड़ाई की आवश्यकता है, इसके लिए शिक्षा का होना जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के लिए जागरूकता, एकता और अपने अधिकारों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। हमारे पूर्वजों ने आजादी और अधिकारों के लिए संघर्ष किया, लेकिन समाज को उसका उचित सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए आज भी संघर्ष और जागरूकता की जरूरत है।
विधायक ने कहा कि “शिक्षा के बिना अंधकार ही अंधकार है। समाज के हर बच्चे को शिक्षित करना होगा। पिछड़ेपन को दूर करने के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है।” उन्होंने युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

नशामुक्त समाज का लिया आह्वान
विधायक ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति ही विकास की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज की बेटी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समाज के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता जरूरी है।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प
सोनाराम सिंकु ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ आदिवासी धर्म, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित रखने पर जोर दिया। उन्होंने समाज को नशा और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, पोटो हो, नारा हो, पांडू हो सहित अनेक वीर पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान से बनी है। इसलिए अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान को बचाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल आदिवासी समाज का पर्व नहीं, बल्कि सभी जाति और धर्म के लोगों के लिए गौरव, सम्मान और एकता का संदेश देने वाला दिवस है।












