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“जल, जंगल, जमीन” का नारा ही नहीं, जंगल बचाना हमारा ध्येय हो : लक्ष्मी सोरेन

On: August 12, 2026 12:47 AM
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विश्व आदिवासी दिवस पर मेघाहातुबुरु में आदिवासी संयुक्त मंच का विशेष आयोजन

जिला परिषद अध्यक्ष ने पौधरोपण कर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

रिपोर्ट शैलेश सिंह

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मेघाहातुबुरु सामुदायिक भवन प्रांगण में आदिवासी संयुक्त मंच, किरीबुरू-मेघाहातुबुरु की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सोरेन शामिल हुईं। उन्होंने पौधरोपण कर प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

सिर्फ नारा नहीं, जंगल बचाना बने प्राथमिकता

इस अवसर पर लक्ष्मी सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए “जल, जंगल, जमीन हमारा है” का नारा महज स्लोगन बनकर नहीं रहना चाहिए। हमारी वास्तविक प्राथमिकता जंगलों की रक्षा करना और उनका विस्तार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन सदियों से प्रकृति और जंगलों से जुड़ा रहा है। जंगल हमारी संस्कृति, परंपरा और पूजा-पाठ का अभिन्न हिस्सा हैं।

हर मौसम में जंगल देता है जीवन का सहारा

लक्ष्मी सोरेन ने कहा कि जब भी पूरे विश्व, देश या प्रदेश में विपरीत परिस्थितियां आती हैं, तब भी हमारे विशाल जंगल हमें हर मौसम में कुछ न कुछ खाने के लिए उपलब्ध कराते हैं। यही जंगल आदिवासी समाज को कठिन परिस्थितियों में भी भूखे मरने से बचाते हैं। इसलिए जंगल और पेड़-पौधों की रक्षा करना प्रत्येक आदिवासी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रकृति की धरोहर बचाने का सामूहिक संकल्प

उन्होंने कहा कि आदिवासी और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। आदिवासी समाज प्रकृति के बिना और प्रकृति आदिवासियों के संरक्षण के बिना सुरक्षित नहीं रह सकती। ऐसे में सभी को मिलकर प्राकृतिक धरोहरों, जंगलों और पेड़-पौधों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल करने का भी आह्वान किया।

अंगवस्त्र भेंट कर किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी संयुक्त मंच के पदाधिकारियों ने जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सोरेन को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद पौधरोपण कार्यक्रम में भी उन्होंने भाग लिया और उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम में मुखिया लिपि मुंडा, मुखिया पार्वती कीड़ो, मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, बीर सिंह मुंडा, उप मुखिया सुमन मुंडू, गोपी लागुरी, इलियास चांपिया, श्याम चरण टुडू सहित सैकड़ों आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी संयुक्त मंच ने विश्व आदिवासी दिवस को केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित न रखते हुए प्रकृति, पर्यावरण और जंगलों के संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया।

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