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दो साल से बंद ब्लड बैंक, आखिर कब मिलेगा सारंडा के मरीजों को खून?

On: September 12, 2026 8:39 PM
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दो साल से बंद ब्लड बैंक, आखिर कब मिलेगा सारंडा के मरीजों को खून?
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किरीबुरू अस्पताल में रक्त सुविधा ठप होने से गरीब ग्रामीणों और सेल कर्मियों की जान पर आफत, जनप्रतिनिधियों ने सीजीएम से की तत्काल सेवा बहाल करने की मांग

रिपोर्ट शैलेश सिंह 

सारंडा। सेल की किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल में करीब दो वर्षों से ब्लड बैंक का लाइसेंस नहीं रहने के कारण रक्त की सुविधा बंद है। इसका सीधा खामियाजा सारंडा के गरीब एवं गंभीर ग्रामीण मरीजों, सेल कर्मियों तथा आसपास की खदानों में कार्यरत श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। आपात स्थिति में रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीजों को टाटा स्टील के नोवामुंडी अस्पताल अथवा अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

अक्टूबर 2024 से बंद है ब्लड बैंक

जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी ने बताया कि किरीबुरू अस्पताल का ब्लड बैंक अक्टूबर 2024 से लाइसेंस के अभाव में बंद है। करीब दो वर्ष बीतने के बावजूद यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो पाना गंभीर चिंता का विषय है।

गरीब मरीजों पर सबसे ज्यादा मार

रक्त की व्यवस्था के लिए मरीजों को दूर के अस्पतालों में भेजे जाने से इलाज में देरी होती है। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के लिए बाहर जाकर इलाज कराना अतिरिक्त बोझ बन जाता है। गंभीर मरीजों के मामले में यह देरी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

जनप्रतिनिधियों ने सीजीएम से की मुलाकात

इसी गंभीर समस्या के समाधान की मांग को लेकर 12 सितंबर को जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, किरीबुरू पश्चिम पंचायत की मुखिया पार्वती कीड़ो, मेघाहातुबुरु उत्तरी पंचायत की मुखिया लिपि मुंडा, मेघाहातुबुरु दक्षिण पंचायत की मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, सामाजिक कार्यकर्ता संतोष पंडा एवं सोनाराम गोप ने संयुक्त रूप से किरीबुरू के सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर तथा अस्पताल प्रबंधन से अलग-अलग मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल ने मरीजों के व्यापक हित को देखते हुए ब्लड बैंक से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तत्काल पूरी कर रक्त सेवा अविलंब शुरू करने की मांग की।

ब्लड बैंक के लिए एलिजा मशीन और कक्ष में बदलाव जरूरी

अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि ब्लड बैंक को दोबारा चालू करने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। इनमें एलिजा मशीन की व्यवस्था तथा ब्लड बैंक के कक्ष में आवश्यक परिवर्तन प्रमुख हैं।

अक्टूबर के अंत तक बजट से काम कराने का भरोसा

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर ने भरोसा दिया कि आवश्यक कार्यों को बजट में शामिल कर अक्टूबर के अंत तक कराया जाएगा, ताकि ब्लड बैंक को पुनः चालू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पूरी हो सके।

जनप्रतिनिधियों का सवाल—आपात स्थिति में मरीज कहां जाएगा?

पंचायत प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि किरीबुरू-मेघाहातुबुरु अस्पताल आसपास की सेल खदानों का महत्वपूर्ण रेफरल अस्पताल है। सेल के दूसरे अस्पतालों से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में गंभीर मरीजों को तत्काल रक्त चढ़ाने की सुविधा ही उपलब्ध नहीं होगी तो आपात स्थिति में मरीज आखिर कहां जाएंगे?

खदानों में हमेशा बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

प्रतिनिधियों ने कहा कि सेल की खदानों में लगातार खनन गतिविधियां चलती हैं। पूरा क्षेत्र सारंडा की दुर्गम एवं खतरनाक घाटियों से घिरा हुआ है। यहां दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खदान दुर्घटना में घायल मरीज को तत्काल रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ जाए, तो क्या उसे दूर के अस्पताल तक पहुंचने तक जिंदगी और मौत के बीच छोड़ दिया जाएगा?

दो साल से बंद ब्लड बैंक, आखिर कब मिलेगा सारंडा के मरीजों को खून?

रक्त की सुविधा कोई विलासिता नहीं, जीवन बचाने की जरूरत

प्रतिनिधियों का कहना है कि ब्लड बैंक जैसी सुविधा किसी भी बड़े औद्योगिक क्षेत्र के अस्पताल के लिए बुनियादी आवश्यकता है। खासकर उस क्षेत्र में जहां बड़ी खदानें संचालित हैं और हजारों मजदूर एवं उनके परिवार रहते हैं, वहां रक्त की सुविधा का बंद रहना बेहद गंभीर विषय है।

उपायुक्त से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर किरीबुरू अस्पताल का ब्लड बैंक जल्द से जल्द चालू कराने की मांग की है।

डीएमएफटी के करोड़ों रुपये से सारंडा में बने 100 बेड का अस्पताल

जनप्रतिनिधियों ने यह भी मांग उठाई कि सारंडा की खदानों से सरकार को डीएमएफटी फंड सहित विभिन्न माध्यमों से करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में उस राशि का उपयोग सारंडा क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने में किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किरीबुरू अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई बाधा है तो सारंडा क्षेत्र में कम से कम 100 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल बनाया जाए, जिसमें ब्लड बैंक, आपातकालीन चिकित्सा, विशेषज्ञ चिकित्सक एवं गंभीर मरीजों के इलाज की तमाम सुविधाएं उपलब्ध हों।

सारंडा को चाहिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था

प्रतिनिधियों ने कहा कि खनिज संपदा से देश और राज्य को करोड़ों रुपये देने वाले सारंडा के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए आज भी दूसरे क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है। यह स्थिति बदलनी चाहिए। ब्लड बैंक को तत्काल शुरू करना और सारंडा में मजबूत स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना अब समय की मांग है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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