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रामा पाण्डे की अगुवाई में सेल प्रबंधन के सामने मजदूरों के 10 बड़े सवाल ! पूरा नहीं हुआ तो श्री रामा पांडेय किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में ही डालेंगे डेरा।

On: September 16, 2026 3:54 PM
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रामा पाण्डे की अगुवाई में सेल प्रबंधन के सामने मजदूरों के 10 बड़े सवाल ! पूरा नहीं हुआ तो श्री रामा पांडेय किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में ही डालेंगे डेरा।
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मेघाहातुबुरु में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की विशेष बैठक में चिकित्सा से ठेका श्रमिकों तक उठे गंभीर मुद्दे; प्रबंधन ने कई मामलों में जल्द समाधान का दिया भरोसा

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

मेघाहातुबुरु सेल की मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में मजदूरों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे की अगुवाई में यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने सेल प्रबंधन के साथ जनरल ऑफिस सभागार में विशेष बैठक की। बैठक में यूनियन ने कर्मचारियों, उनके आश्रितों और ठेका श्रमिकों की समस्याओं को सीधे प्रबंधन के समक्ष रखते हुए कई मामलों में तत्काल कार्रवाई की मांग की।

 

रामा पाण्डे

बैठक में चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, फिजियोथेरेपी सेवा, किरीबुरू जनरल अस्पताल के ब्लड बैंक, रेफरल व्यवस्था, एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस, आवास मरम्मती, सुरक्षा व्यवस्था, बिजली कटौती, ठेका श्रमिकों के अधिकार तथा मेघाहातुबुरु खदान में स्थायी आदेश सहित दस प्रमुख मुद्दों पर सवाल-जवाब हुआ।

बैठक में सीजीएम संजय कुमार सिंह, सीजीएम एचआर देवदत्ता सत्पथी, महाप्रबंधक योगेश प्रसाद राम, के.बी. थापा, अरविंद बिन्हा, नवीन कुमार सोनकुश्रे, सहायक महाप्रबंधक मानस राउत एवं चंदन घोष सहित झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे, महासचिव अफताब आलम, इंतखाब आलम, दयानंद कुमार, राजेश बनर्जी, अमित राउत, सोमनाथ साहू, शैलेश बारी, कुलदीप सिंह, जगजीत सिंह गिल, लाल, कमल रजक, राज नारायण शर्मा आदि मौजूद रहे।

रामा पाण्डे ने कहा—कर्मचारियों की समस्या का समाधान कागज पर नहीं, जमीन पर चाहिए

बैठक में रामा पाण्डे के नेतृत्व में यूनियन ने स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों से जुड़े मुद्दे लंबे समय से उठाए जा रहे हैं। केवल आश्वासन से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी।

यूनियन ने कहा कि चिकित्सा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में किसी कर्मचारी अथवा उसके आश्रित को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़े और खदान में काम करने वाले ठेका श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए।

दो पत्र के बाद भी फिजियोथेरेपी शुरू नहीं, यूनियन ने मांगा जवाब

रामा पाण्डे के नेतृत्व में यूनियन ने बताया कि 30 अप्रैल 2025 और 28 मार्च 2026 को फिजियोथेरेपी सेवा शुरू करने के संबंध में प्रबंधन को पत्र दिया गया था। इसके बावजूद अब तक सेवा शुरू नहीं हो सकी है।

यूनियन ने कहा कि मेघाहातुबुरु-किरिबुरु क्षेत्र में इसकी आवश्यकता है, जबकि सेल गुवा और बोलानी में यह सुविधा उपलब्ध है।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने बताया कि स्थायी फिजियोथेरेपिस्ट की व्यवस्था के लिए प्रयास चल रहा है। फिलहाल बोकारो से फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और रेफरल व्यवस्था पर यूनियन ने घेरा

यूनियन ने किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जनरल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल सुविधाओं की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संगठन ने कहा कि आवश्यकता के बावजूद कई मरीजों के रेफरल में परेशानी आती है, जिससे कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को बाहर निजी स्तर पर इलाज कराना पड़ता है।

विशेष रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी का मामला उठाते हुए यूनियन ने बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की मांग की।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने कहा कि मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखकर समाधान कराया जाएगा। स्त्री रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था जल्द करने का प्रयास किया जा रहा है।

अफताब आलम

ब्लड बैंक की एलिशा मशीन के लिए फंड स्वीकृत

बैठक में किरीबुरू जनरल अस्पताल के ब्लड बैंक की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। यूनियन ने कहा कि आवश्यक मशीन के अभाव में रक्त संबंधी जांच एवं आपातकालीन व्यवस्था प्रभावित होती है।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने बताया कि आवश्यक एलिशा मशीन खरीदने के लिए फंड स्वीकृत कर दिया गया है। मशीन उपलब्ध होने के बाद ब्लड बैंक की समस्या का समाधान किया जाएगा।

छुट्टी में कर्मचारी बीमार पड़े तो रेफरल क्यों नहीं?

यूनियन ने सवाल उठाया कि छुट्टी पर गए कर्मचारी या उनके आश्रित को अचानक इलाज की जरूरत पड़ने पर रेफरल सुविधा तत्काल मिलनी चाहिए। इसके लिए कर्मचारी को वेतन अग्रिम लेने या अपनी जेब से भारी खर्च करने की स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए।

यूनियन ने कहा कि मरीज की चिकित्सा आवश्यकता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और दूसरे अस्पताल में भर्ती मरीज की एडमिशन समरी के आधार पर भी आवश्यक रेफरल प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने कहा कि पहले यह सुविधा मिलती थी। अब यह क्यों बंद है, इसकी जानकारी लेकर सुविधा को बहाल कराने का प्रयास किया जाएगा।

‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज पर यूनियन का जोर, प्रबंधन सहमत

यूनियन ने दुर्घटना अथवा गंभीर बीमारी की स्थिति में ‘Life Saving First के सिद्धांत के तहत तत्काल निकटतम अस्पताल में उपचार शुरू कराने की बात रखी। संगठन ने कहा कि यदि वहां आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है तो मरीज को सक्षम अस्पताल में रेफर किया जाए।

यूनियन ने इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रभावी चिकित्सा व्यवस्था की मांग की।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने इस मुद्दे पर सहमति जताई और आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही।

एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस पर भी मिला आश्वासन

रामा पाण्डे ने यूनियन की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की मांग को फिर उठाया। यूनियन ने कहा कि आकस्मिक रेफरल में जीवन रक्षक सुविधाओं वाली एम्बुलेंस आवश्यक है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध कई एम्बुलेंस खराब स्थिति में हैं।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया।

आवास मरम्मती में पारदर्शिता की मांग

यूनियन ने सिविल विभाग द्वारा आवास मरम्मती के लिए निकाली जाने वाली निविदाओं की जानकारी कर्मचारियों को उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन ने कहा कि कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि किस आवास में कब काम शुरू हुआ और कब पूरा हुआ।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने कहा कि सेल आवासों की समस्याओं के समाधान के लिए कंबाइंड टेंडर निकालकर एक साथ मरम्मती कार्य कराने की व्यवस्था की जाएगी।

‘सुरक्षा सर्वप्रथम’—असुरक्षित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई की मांग

यूनियन ने माइनिंग, प्लांट और डाउनहिल सेक्शन के असुरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित कर सुरक्षा कार्य कराने की मांग की। साथ ही सेफ्टी कमेटी के पुनर्गठन और सभी श्रमिक संगठनों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग रखी गई।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने कहा कि हर जगह सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

रामा पाण्डे की अगुवाई में सेल प्रबंधन के सामने मजदूरों के 10 बड़े सवाल ! पूरा नहीं हुआ तो श्री रामा पांडेय किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में ही डालेंगे डेरा।
रामा पाण्डे

बिजली कटौती पर यूनियन ने जताई गंभीर चिंता

यूनियन ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार बिजली बाधित होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को परेशानी होती है। पहले बिजली कटौती की सूचना दी जाती थी, लेकिन अब नियमित सूचना नहीं मिलती।

बरसात और कोहरे के दौरान रात में अंधेरा रहने से सड़क दुर्घटनाओं की आशंका का मुद्दा भी उठाया गया।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।

ठेका श्रमिकों के शोषण पर रामा पाण्डे ने उठाई आवाज

बैठक का एक महत्वपूर्ण मुद्दा ठेका श्रमिकों से जुड़ा रहा। यूनियन ने आरोप लगाया कि कुछ ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को पर्याप्त PPE उपलब्ध नहीं कराया जाता है। कई मामलों में काम से बैठा देने अथवा काम पाने के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायत भी रखी गई।

रामा पाण्डे ने स्पष्ट किया कि ठेका श्रमिकों को उनके काम और अधिकारों के अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए तथा सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने कहा कि फाइन ओर स्टेकर और लम्प ओर स्टेकर जैसी मशीनों का संचालन अनस्किल्ड मजदूरों से कराया जाना उचित नहीं है। अगली निविदा से इन्हें स्किल्ड श्रेणी में लाकर समान काम के लिए समान वेतन की व्यवस्था के तहत काम कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

ड्यूटी रोस्टर एचओडी बनाएंगे, जितने दिन काम उतने दिन का वेतन

बैठक में ठेका श्रमिकों की ड्यूटी को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय की बात सामने आई। संबंधित विभाग के एचओडी द्वारा ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जाएगा। इससे मजदूर ने जितने दिन काम किया होगा, उसके अनुसार वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी।

यूनियन ने यह मुद्दा भी उठाया कि मजदूरों को नौकरी बचाने या काम पाने के लिए किसी अधिकारी के घर निजी कार्य करने की स्थिति में नहीं रहना चाहिए।

प्रबंधन ने ठेका श्रमिकों को आवास देने के मामले में गुवा और चिड़िया खदान की व्यवस्था का अध्ययन कर मेघाहातुबुरु में इसे लागू करने की संभावना पर भी काम करने का आश्वासन दिया।

स्थायी आदेश को लेकर भी प्रबंधन से दो टूक सवाल

यूनियन ने कहा कि मेघाहातुबुरु खदान में अभी तक पूर्ण स्थायी आदेश (Standing Order) लागू नहीं हो पाया है। किरीबुरू और गुवा की तर्ज पर मेघाहातुबुरु में भी पूर्ण स्थायी आदेश बनाने की मांग की गई।

प्रबंधन का जवाब: प्रबंधन ने इसे पूरा कराने का आश्वासन दिया।

रामा पाण्डे ने मांगी उच्च अधिकारियों से सीधी वार्ता

बैठक के अंत में रामा पाण्डे के नेतृत्व में यूनियन ने मांग की कि इन सभी गंभीर मामलों के स्थायी समाधान के लिए सेल के उच्च अधिकारियों के साथ विशेष वार्ता कराई जाए। यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

प्रबंधन ने उच्च अधिकारियों के साथ जल्द वार्ता कराने का आश्वासन दिया।

बैठक में यूनियन ने स्पष्ट किया कि समस्याओं का समाधान होने से खदान में शांतिपूर्ण औद्योगिक वातावरण कायम रहेगा तथा उत्पादन एवं उत्पादकता भी प्रभावित नहीं होगी। वहीं, अब कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों की नजर प्रबंधन की ओर से दिए गए इन आश्वासनों पर होने वाली वास्तविक कार्रवाई पर टिकी है।

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