ग्रामीण संवेदक संघ ने उपायुक्त को सौंपा पत्र, 31 अगस्त 2026 से प्रभावी संशोधित अनुसूचित दर के अनुसार पुनः प्राक्कलन कराने की मांग
रिपोर्ट शैलेश सिंह
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम ग्रामीण संवेदक संघ ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड से वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित निर्माण एवं विकास योजनाओं की निविदा प्रक्रिया को लेकर उपायुक्त को महत्वपूर्ण पत्र सौंपा है। संघ के अध्यक्ष सुनील सिरका ने उपायुक्त से मांग की है कि जिन DMFT योजनाओं की निविदा प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, उनका 31 अगस्त 2026 से पूरे झारखंड में प्रभावी संशोधित अनुसूचित दर (Schedule of Rates-SOR 2026) के अनुरूप पुनः प्राक्कलन कराया जाए। इसके बाद ही उन योजनाओं की निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए।

31 अगस्त से पूरे राज्य में लागू हुआ संशोधित अनुसूचित दर
ग्रामीण संवेदक संघ के अनुसार झारखंड सरकार के तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग, रांची में मुख्य अभियंता-सह-संयोजक, राज्य स्तरीय अनुसूचित दर निर्धारण समिति की अगुवाई में 31 अगस्त 2026 को राज्य स्तरीय अनुसूचित दर निर्धारण समिति की बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद Jharkhand Schedule of Rates Framing Standard Operating Procedure, 2020 में निर्धारित प्रावधानों के आलोक में संशोधित अनुसूचित दर को अनुमोदित किया गया। साथ ही 31 अगस्त 2026 से पूरे झारखंड में सभी विभागों में संशोधित अनुसूचित दर लागू करने का निर्णय लिया गया।
पुरानी दर पर टेंडर से संवेदकों के सामने आएगी मुश्किल
संघ का कहना है कि वर्तमान समय में निर्माण सामग्री, मजदूरी, परिवहन सहित निर्माण कार्य से जुड़ी विभिन्न लागतों में बदलाव हो चुका है। ऐसे में यदि 31 अगस्त 2026 से प्रभावी संशोधित SOR को नजरअंदाज कर पुरानी अनुसूचित दर के आधार पर DMFT योजनाओं की निविदा निकाली जाती है, तो कार्य निष्पादन के दौरान संवेदकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
संघ ने आशंका जताई है कि पुराने प्राक्कलन पर कार्य आवंटित होने के बाद बढ़ी हुई लागत और वास्तविक खर्च के बीच अंतर संवेदकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसका असर योजनाओं के निर्धारित समय में पूरा होने तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी पड़ने की संभावना है।

निविदा से पहले Re-Estimate कराने की मांग
ग्रामीण संवेदक संघ ने उपायुक्त से स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में DMFT फंड से कराए जाने वाले उन सभी निर्माण एवं विकास कार्यों, जिनकी निविदा प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हुई है, का नए SOR के अनुरूप Re-Estimate (पुनः प्राक्कलन) कराया जाए।
संघ का कहना है कि पुनः प्राक्कलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित योजनाओं की निविदा जारी की जानी चाहिए। इससे निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और कार्य आवंटित होने के बाद संवेदकों के सामने वित्तीय अथवा तकनीकी विवाद की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना भी कम होगी।
सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता का भी सवाल
संघ ने अपने पत्र में कहा है कि संशोधित SOR के अनुरूप प्राक्कलन तैयार करना केवल संवेदकों के हित से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन का भी सीधा संबंध है।
यदि वास्तविक लागत के अनुरूप प्राक्कलन तैयार किया जाता है तो संवेदकों को कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय आधार मिलेगा। इससे योजनाओं में अनावश्यक कटौती, कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने अथवा कार्य पूर्ण करने में देरी जैसी परिस्थितियों से बचने में मदद मिल सकती है।

भविष्य के विवाद से बचने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
ग्रामीण संवेदक संघ ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि DMFT फंड से वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित सभी लंबित निविदाओं की समीक्षा कराई जाए और जहां अभी तक निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, वहां संशोधित SOR के अनुसार पुनः प्राक्कलन कराने का निर्देश संबंधित विभागों को दिया जाए।
संघ ने कहा कि इससे संवेदकों और सरकारी विभागों के बीच भविष्य में होने वाले किसी भी प्रकार के विवाद, आर्थिक कठिनाई अथवा कार्य निष्पादन संबंधी प्रतिकूल परिस्थिति से बचा जा सकेगा।
कई कार्यपालक अभियंताओं को भी भेजी गई प्रतिलिपि
ग्रामीण संवेदक संघ ने अपने पत्र की प्रतिलिपि जिले के विभिन्न संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को भी भेजी है। इनमें लघु सिंचाई विभाग/जल संसाधन विभाग, चाईबासा, ग्रामीण कार्य विभाग विशेष प्रमंडल, चाईबासा, भवन निर्माण विभाग भवन प्रमंडल, चाईबासा तथा एनआरईपी, चाईबासा के कार्यपालक अभियंता शामिल हैं।
संघ अध्यक्ष सुनील सिरका ने उम्मीद जताई है कि संवेदकों के हितों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के सुचारु, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन को देखते हुए जिला प्रशासन इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करेगा।













