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हड़ताल शुरू होते ही पुलिस पहुंची, जबरन काम शुरू कराने का आरोप

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रंजाबुरू खदान में रोजगार की मांग को लेकर सारंडा विकास समिति का आंदोलन, थाना प्रभारी पर धमकी देने का आरोप

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

किरीबुरू। सेल गुवा खदान के अधीन रंजाबुरू खदान में स्थानीय रोजगार और कार्यों में भागीदारी को लेकर विवाद अब टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया ने माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी पर स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार नहीं देने का आरोप लगाते हुए आज दोपहर लगभग 12 बजे से खदान में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की। समिति का आरोप है कि हड़ताल शुरू होने के महज एक घंटे बाद ही गुवा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम आंदोलन स्थल पर पहुंची और जबरन काम शुरू करवा दिया।

हड़ताल के एक घंटे बाद पहुंची पुलिस

समिति अध्यक्ष राजू सांडिल ने बताया कि सारंडा के प्रभावित गांवों के बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा रहा था। लेकिन हड़ताल शुरू होने के कुछ ही देर बाद पुलिस टीम आंदोलन स्थल पर पहुंच गई और काम बंद कर चुके लोगों पर काम शुरू करने का दबाव बनाया।

राजू सांडिल के अनुसार थाना प्रभारी ने कहा कि पुलिस को इस तरह के आंदोलन की कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर जबरन काम शुरू करवा दिया और आंदोलनकारियों को जेल भेजने की धमकी दी।

‘हमने सभी संबंधित अधिकारियों को दी थी जानकारी’

राजू सांडिल ने कहा कि आंदोलन को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को पहले ही पत्र भेजा गया था। उन्होंने बताया कि वे ग्रामीण मुंडा और मानकी के साथ स्वयं जगन्नाथपुर एसडीओ को पत्र सौंप चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन द्वारा आंदोलन की जानकारी नहीं होने की बात कहना समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि समिति ने पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी थीं। ऐसे में आंदोलनकारियों पर दबाव बनाना और जेल भेजने की धमकी देना उचित नहीं है।

1800 स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार की मांग

समिति की प्रमुख मांगों में माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी में सीएसआर प्रभावित गांवों के 100×18, यानी कुल 1800 स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है। समिति का कहना है कि स्थानीय क्षेत्र की खदानों और परियोजनाओं में बाहरी लोगों को अवसर देने के बजाय प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

राजू सांडिल ने कहा कि सारंडा क्षेत्र के गांव खनन गतिविधियों से प्रभावित हैं, लेकिन यहां के युवक रोजगार से वंचित हैं। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने से ग्रामीणों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।

ओड़िशा से सुरक्षा कर्मी लाने का आरोप

राजू सांडिल ने माँ सरला कंपनी प्रबंधन पर आरोप लगाया कि कंपनी ओड़िशा से निजी सुरक्षा कर्मियों को लाकर खदान में रोजगार दे रही है। उनका कहना है कि एक ओर बाहरी लोगों को काम दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय बेरोजगारों को पूरी तरह रोजगार से वंचित रखा जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसे मामलों में भी पुलिस और प्रशासन का सहयोग स्थानीय लोगों को नहीं मिलेगा तो सारंडा के बेरोजगार आखिर कहां जाएंगे।

रेलवे साइडिंग का रेक लोडिंग काम देने की मांग

समिति ने रेलवे साइडिंग में रेक लोडिंग का कार्य सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया को देने की मांग की है। समिति का कहना है कि इस संबंध में कंपनी के साथ सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।

राजू सांडिल ने कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए जिन कार्यों पर सहमति बनी थी, उन्हें जमीन पर उतारने के बजाय कंपनी लगातार टालमटोल कर रही है।

ट्रांसपोर्टिंग और पानी छिड़काव का काम भी लंबित

समिति की अन्य मांगों में रंजाबुरू खदान से रेलवे साइडिंग तक ट्रांसपोर्टिंग कार्य को समिति के माध्यम से संचालित करना शामिल है। इसके अलावा खदान क्षेत्र की सड़कों पर पानी छिड़काव के लिए टैंकर संचालन का काम भी समिति को देने की मांग की गई है।

समिति के अनुसार इन मांगों को लेकर कंपनी के साथ लिखित सहमति बनी थी, लेकिन अब तक किसी भी मांग को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

‘समझौते के बावजूद नहीं हुआ अमल’

राजू सांडिल ने कहा कि मांग पत्र की पहली और चौथी मांग को माँ सरला प्रा. वर्क. कंपनी ने स्वीकार किया था, जबकि दूसरी और तीसरी मांग को सीटीओ मिलने के बाद बैठक कर नियम के अनुसार पूरा करने की बात लिखित रूप से कही गई थी।

लेकिन समिति का आरोप है कि समझौते के बाद भी एक भी मांग को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। इसी कारण ग्रामीणों को अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।

पुलिस कार्रवाई से आंदोलनकारियों में आक्रोश

हड़ताल स्थल पर पुलिस पहुंचने और कथित तौर पर जबरन काम शुरू करवाने की घटना से आंदोलनकारियों में नाराजगी है। समिति ने कहा कि रोजगार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करना ग्रामीणों का लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसे में पुलिस प्रशासन द्वारा दबाव बनाना और जेल भेजने की धमकी देना आंदोलन को दबाने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री और मंत्री से मिलकर न्याय की अपील करेंगे

राजू सांडिल ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से मुलाकात की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार से न्याय की अपील करने के साथ-साथ संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ने की अनुमति भी मांगी जाएगी। इसके बाद समिति आगे की रणनीति तय कर आंदोलन को फिर तेज करेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय बेरोजगारों के अधिकार और रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। समिति तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक लिखित समझौते के अनुरूप मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

प्रशासन और कंपनी के रुख पर नजर

रंजाबुरू खदान में हड़ताल, पुलिस हस्तक्षेप और स्थानीय रोजगार का मुद्दा अब गंभीर रूप ले चुका है। एक ओर समिति कंपनी पर वादाखिलाफी और बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा जबरन काम शुरू करवाने के आरोप ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन, सेल गुवा और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और स्थानीय बेरोजगारों की मांगों का समाधान किस तरह किया जाता है।

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