कब्रिस्तान निर्माण के इकरारनामे पर बवाल, बिचौलियों की कथित धांधली के खिलाफ ग्रामीण मुंडा और मुखिया ने खोला मोर्चा
उपायुक्त से लिखित शिकायत, फर्जी ग्रामसभा और फोटो के इस्तेमाल का आरोप; इकरारनामा रद्द कर पारदर्शी ग्रामसभा कराने की मांग
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगाँव प्रखंड अंतर्गत ग्राम बाराकाटा में विकास योजना के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ बिचौलियों ने कथित तौर पर फर्जी ग्रामसभा दिखाकर और फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल कर कब्रिस्तान निर्माण योजना का इकरारनामा करा लिया। इस मामले ने गांव में आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे ग्रामसभा की स्वायत्तता, पारदर्शिता और ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
इस कथित धांधली के खिलाफ ग्रामीण मुंडा प्रवीण पिंगुआ और ग्राम पंचायत धोबाधोबिन की मुखिया सोना सिंह पिंगुआ ने मोर्चा खोल दिया है। दोनों ने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित फर्जी इकरारनामे को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

कब्रिस्तान निर्माण योजना में कथित फर्जीवाड़े का आरोप
शिकायत के अनुसार, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, चाईबासा की ओर से ग्राम बाराकाटा में ‘भाग-II कब्रिस्तान निर्माण कार्य’ की योजना स्वीकृत की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में निर्धारित ग्रामसभा की पारदर्शिता और सामूहिक सहमति को दरकिनार किया गया।
आरोप है कि कुछ बिचौलियों ने ग्रामसभा आयोजित किए जाने का गलत तरीके से दावा किया और कथित तौर पर फर्जी तस्वीरें लगाकर योजना का इकरारनामा करा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्रामसभा की वास्तविक सहमति के बिना इस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई है, तो यह न केवल गंभीर अनियमितता है, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों की भी अनदेखी है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
ग्रामीण मुंडा और मुखिया ने उठाए सवाल, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीण मुंडा प्रवीण पिंगुआ और मुखिया सोना सिंह पिंगुआ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव की विकास योजनाओं से जुड़े निर्णय नियमानुसार, पारदर्शी तरीके से और ग्रामीणों की भागीदारी के साथ होने चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिचौलियों द्वारा कथित रूप से तैयार कराए गए इकरारनामे के जरिए योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित दस्तावेजों, ग्रामसभा के अभिलेखों, तस्वीरों और इकरारनामे की प्रक्रिया की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
तीन प्रमुख मांगें, ताकि गांव के अधिकारों की हो रक्षा
उपायुक्त को सौंपे गए शिकायत पत्र में ग्रामीण मुंडा और मुखिया ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
- कथित फर्जी इकरारनामा रद्द हो: विवादित इकरारनामे की जांच कर अनियमितता पाए जाने पर उसे तत्काल निरस्त किया जाए।
- दोबारा पारदर्शी ग्रामसभा हो: ग्राम बाराकाटा में नियमानुसार ग्रामसभा बुलाकर ग्रामीणों की वास्तविक भागीदारी और सहमति सुनिश्चित की जाए।
- लाभुक समिति का नए सिरे से गठन हो: नियमानुसार लाभुक समिति गठित कर योजना का इकरारनामा नए सिरे से कराया जाए, ताकि कार्य पारदर्शिता के साथ संचालित हो सके।
ग्रामीणों का मानना है कि इन कदमों से न केवल विवाद का समाधान होगा, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में गांव के लोगों की भूमिका और अधिकार भी सुनिश्चित हो सकेंगे।
विकास योजनाओं में बिचौलियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं
इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विकास योजनाएं गांव की जरूरतों को पूरा करने के लिए होती हैं, न कि किसी बिचौलिये के हित साधने के लिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि योजनाओं के नाम पर कथित धांधली, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और ग्रामीणों की सहमति की अनदेखी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रशासन को शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेकर दोषियों की पहचान करनी चाहिए और जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
अब उपायुक्त की कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
ग्राम बाराकाटा के इस मामले में अब जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों ने लिखित शिकायत के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए विवादित इकरारनामे की जांच और योजना की प्रक्रिया को नए सिरे से पारदर्शी बनाने की मांग की है।
शिकायत पत्र पर ग्रामीण मुंडा प्रवीण पिंगुआ और मुखिया सोना सिंह पिंगुआ के हस्ताक्षर मौजूद हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और कथित फर्जी ग्रामसभा एवं इकरारनामे के मामले में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
सवाल साफ है—यदि ग्रामसभा की सहमति के बिना योजना का इकरारनामा कराया गया है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी और बाराकाटा के ग्रामीणों को उनके अधिकार कब मिलेंगे?









