डॉक्टर, ब्लड बैंक और रेफरल सुविधा पर प्रबंधन का स्पष्ट जवाब नहीं; जर्जर सड़कों व आवासों की मरम्मत का भरोसा
निदेशक (खदान) विकास मनवती ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ की बैठक, अस्पताल का दौरा कर सीएमओ से करेंगे चर्चा
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के निदेशक (खदान) विकास मनवती ने सेल मेघाहातुबुरु के जनरल ऑफिस स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में विभिन्न श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक कर मजदूरों की समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर चर्चा की। बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, वर्षों से बंद ब्लड बैंक, रेफरल सुविधा, टाउनशिप की जर्जर सड़कें, सेल कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत, वातानुकूलित शव वाहन और लगभग 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव-रिवॉर्ड जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।

बैठक में प्रबंधन की ओर से कुछ समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन चिकित्सा सुविधाओं और कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय सामने नहीं आने से मजदूर नेताओं में असंतोष भी दिखाई दिया। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक को असफल करार देते हुए कहा कि मजदूरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर प्रबंधन का रवैया सकारात्मक नहीं रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर संयुक्त यूनियनों के माध्यम से आंदोलन किया जा सकता है।
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों पर असमर्थता जताई
बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मजदूर नेताओं ने अस्पताल में चिकित्सकों की कमी, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता तथा जरूरी चिकित्सा संसाधनों के अभाव की ओर प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया।
इस पर निदेशक (खदान) विकास मनवती ने कथित तौर पर कहा कि यहां डॉक्टर आने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नए विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता का वादा करना संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने अस्पताल में ड्रेसर उपलब्ध कराने की बात कही।
इस जवाब से अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधा की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंता पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। मजदूर नेताओं का सवाल है कि यदि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्याप्त चिकित्सा संसाधन ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो गंभीर बीमारी अथवा खदान में दुर्घटना के दौरान घायल होने वाले कर्मचारियों को समय पर समुचित इलाज कैसे मिलेगा?
ब्लड बैंक चालू करने और रेफरल व्यवस्था आसान बनाने की मांग
बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल के वर्षों से बंद ब्लड बैंक को दोबारा चालू करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों और दुर्घटना में घायल कर्मचारियों को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया।
मजदूर नेताओं ने कहा कि खनन क्षेत्र में दुर्घटना अथवा आपातकालीन चिकित्सा की स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में ब्लड बैंक की सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और त्वरित रेफरल व्यवस्था मरीजों की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।
निदेशक (खदान) ने किरीबुरू सेल अस्पताल की समस्याओं को गंभीरता से देखने के लिए अस्पताल का दौरा कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से बातचीत करने और उसके बाद आगे का निर्णय लेने की बात कही। हालांकि, ब्लड बैंक को दोबारा चालू करने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर बैठक में कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई।
जर्जर सड़कों और कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत का आश्वासन
मेघाहातुबुरु और आसपास की सेल टाउनशिप में जर्जर सड़कों तथा कर्मचारियों के पुराने आवासों की समस्याओं को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। मजदूर प्रतिनिधियों ने कहा कि खराब सड़कों और जर्जर आवासों के कारण कर्मचारियों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का स्थायी समाधान आवश्यक है।
इस पर विकास मनवती ने टाउनशिप की जर्जर सड़कों का निर्माण कराने तथा सेल कर्मचारियों के जर्जर आवासों से संबंधित समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया।
वहीं, सेल के खाली पड़े आवासों को निर्धारित किराये पर उपलब्ध कराने की मांग पर उन्होंने किसी को भी सेल आवास किराये पर देने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर प्रबंधन के रुख से उन लोगों को निराशा हुई, जो खाली आवासों के बेहतर उपयोग की मांग कर रहे थे।
बाहर इलाज कराने पर कैशलेस सुविधा और शव वाहन पर विचार
बैठक में सेल कर्मचारियों को कार्यक्षेत्र से बाहर बीमारी की स्थिति में इलाज कराने के दौरान होने वाली परेशानियों का मुद्दा भी उठाया गया। मांग की गई कि यदि कोई सेल कर्मचारी बाहर बीमार पड़ता है, तो उसे सेल से संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों के कारण उपचार में देरी न हो।
निदेशक (खदान) ने इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही। इसके अलावा, शवों को सम्मानपूर्वक ले जाने के लिए वातानुकूलित शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग पर भी विचार करने का आश्वासन दिया गया।
हालांकि, इन दोनों मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों को आगे प्रबंधन की पहल का इंतजार रहेगा।
15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव-रिवॉर्ड का मुद्दा भी उठा
बैठक में कर्मचारियों के लगभग 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव-रिवॉर्ड का मामला भी उठाया गया। मजदूर प्रतिनिधियों ने इस लंबित मुद्दे पर प्रबंधन से स्पष्ट पहल की अपेक्षा जताई।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि लंबे समय से लंबित वित्तीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैठक में इस मांग पर किसी निश्चित भुगतान तिथि अथवा समाधान की समयसीमा की घोषणा नहीं की गई।

ठेका श्रमिकों के मोबाइल पर प्रतिबंध जारी रहेगा
बैठक में खदानों के भीतर ठेका श्रमिकों को ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा भी चर्चा में आया। प्रबंधन ने शून्य दुर्घटना के लक्ष्य और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए इस प्रतिबंध को जारी रखने की बात कही।
इसके लिए व्यवस्था बताई गई कि ड्यूटी पर मौजूद शिफ्ट इंचार्ज अथवा सेल अधिकारी के पास मोबाइल फोन रहेगा। आपातकालीन स्थिति में ठेका श्रमिकों के परिजन संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकेंगे।
हालांकि, मजदूर नेताओं ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि खदान में सुरक्षा के नाम पर श्रमिकों पर प्रतिबंध लगाने से पहले मौजूदा वाहनों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थिति पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
रामा पांडेय ने बैठक को बताया असफल, प्रबंधन पर उठाए सवाल
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक के बाद प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे असफल बताया। उन्होंने कहा कि सेल कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया। उनके अनुसार, बैठक में सुरक्षा और उत्पादन पर अधिक जोर दिया गया, जबकि श्रमिकों की बुनियादी समस्याओं के समाधान को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली।
रामा पांडेय ने खदानों में पुराने वाहनों के संचालन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक ओर 20 से 22 वर्ष पुराने बोलेरो अथवा अन्य वाहन खदानों में चलने की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर ठेका श्रमिकों को ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या केवल श्रमिकों पर प्रतिबंध लगाना ही पर्याप्त है, या फिर वाहनों, चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्था को भी उतनी ही गंभीरता से दुरुस्त करने की जरूरत है?
दुर्घटना में घायल मजदूरों की जान बचाने के लिए क्या है व्यवस्था?
रामा पांडेय ने किरीबुरू सेल अस्पताल में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, वर्षों से बंद ब्लड बैंक तथा गंभीर मरीजों के इलाज की सीमित सुविधाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खदानों में दुर्घटना होने पर घायल श्रमिकों को तत्काल बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। ऐसे में अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक, जरूरी संसाधन, रक्त की उपलब्धता और प्रभावी रेफरल व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रबंधन की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरों की सुरक्षा का अर्थ केवल उत्पादन के दौरान नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि दुर्घटना होने पर घायल श्रमिक को समय पर इलाज उपलब्ध कराना और उसके परिवार को जरूरी सहायता सुनिश्चित करना भी है।
समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संयुक्त आंदोलन की चेतावनी
रामा पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि सेल प्रबंधन ने अस्पताल, ब्लड बैंक, रेफरल सुविधा, जर्जर सड़कों और आवासों, लंबित इंसेंटिव-रिवॉर्ड तथा ठेका श्रमिकों की समस्याओं पर ठोस पहल नहीं की, तो तमाम मुद्दों को लेकर संयुक्त यूनियनों के माध्यम से आंदोलन शुरू करने की रणनीति बनाई जाएगी।
बैठक के बाद अब निगाहें प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अस्पताल का निरीक्षण कर सीएमओ से चर्चा, सड़कों के निर्माण और जर्जर आवासों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, मजदूर संगठनों की प्रमुख मांग यही है कि बैठकों और आश्वासनों से आगे बढ़कर कर्मचारियों तथा ठेका श्रमिकों की बुनियादी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।








