चाईबासा में जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर उठे सवाल, सुनील सिरका ने एसडीओ से की औचक छापेमारी की मांग
थोक और खुदरा कीमतों में भारी अंतर से आम जनता परेशान
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू। पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा और आसपास के खुदरा बाजारों में आलू, प्याज और लहसुन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। थोक और खुदरा कीमतों में भारी अंतर को लेकर जमाखोरी, बिचौलियों की भूमिका और अत्यधिक मुनाफाखोरी के आरोप उठने लगे हैं। इस मुद्दे पर झारखंड आंदोलनकारी सह ग्रामीण संवेदक संघ, पश्चिम सिंहभूम के अध्यक्ष सुनील सिरका ने अनुमंडल पदाधिकारी, सदर चाईबासा को मांग पत्र सौंपकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

आलू, प्याज और लहसुन के दाम में बड़ा अंतर
सुनील सिरका ने अपने ज्ञापन में थोक और खुदरा बाजार की कीमतों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि थोक में अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध सब्जियों को खुदरा बाजार में काफी अधिक दाम पर बेचा जा रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
ज्ञापन में दिए गए मूल्य विवरण के अनुसार—
- आलू: थोक बाजार में 50 किलो की बोरी ₹350 यानी ₹7 प्रति किलो, जबकि खुदरा बाजार में ₹15 प्रति किलो।
- प्याज: थोक बाजार में 50 किलो की बोरी ₹2,300 यानी ₹46 प्रति किलो, जबकि खुदरा बाजार में ₹60 से ₹70 प्रति किलो।
- लहसुन: थोक बाजार में 30 किलो की बोरी ₹3,900 यानी ₹130 प्रति किलो, जबकि खुदरा बाजार में ₹240 से ₹300 प्रति किलो।
इन आंकड़ों के आधार पर आलू, प्याज और लहसुन की थोक तथा खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय अंतर सामने आता है। हालांकि, वास्तविक खुदरा मूल्य और मुनाफे का आकलन परिवहन, भंडारण, गुणवत्ता तथा अन्य लागतों की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
महंगाई की मार, गरीब परिवारों की बढ़ी मुश्किलें
सुनील सिरका का कहना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि बाजार में कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाई जा रही हैं या जमाखोरी के जरिए आपूर्ति प्रभावित की जा रही है, तो इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से बाजार की वास्तविक स्थिति की जांच कर यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि उपभोक्ताओं से मनमाने दाम न वसूले जाएं।
एसडीओ से तीन प्रमुख मांगें
आम जनता को राहत दिलाने के उद्देश्य से सुनील सिरका ने अनुमंडल पदाधिकारी से तीन प्रमुख कदम उठाने की मांग की है—
- औचक निरीक्षण और छापेमारी: चाईबासा तथा आसपास के खुदरा बाजारों में तत्काल जांच अभियान चलाकर कीमतों और बिक्री व्यवस्था की पड़ताल की जाए।
- दुकानों पर मूल्य सूची अनिवार्य: सभी खुदरा दुकानों में आधिकारिक मूल्य सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि ग्राहकों को कीमतों की सही जानकारी मिल सके।
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई: जांच में जमाखोरी, कालाबाजारी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों और बिचौलियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
आलू, प्याज और लहसुन जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अंतर का मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि बाजार में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो समय रहते प्रभावी कदम उठाकर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है।
सवाल यह है कि थोक और खुदरा कीमतों के बीच इतने बड़े अंतर की वास्तविक वजह क्या है और प्रशासन इसकी जांच के लिए कब कदम उठाएगा? आम जनता को उम्मीद है कि बाजार की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर आवश्यक वस्तुओं की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।










