नियुक्ति पत्र से लेकर वेतन पर्ची और PPE तक की व्यवस्था पर उठे सवाल, मुफ्त चिकित्सा सुविधा की भी मांग
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने सीजीएम (खान) को सौंपा मांग-पत्र, कहा—एक ही खान समूह में गुआ और मेघाहातुबुरु के लिए अलग-अलग नियम क्यों?
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु। सेल के मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में कार्यरत ठेका श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, मेघाहातुबुरु ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के महामंत्री अफताब आलम ने मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान, झारखंड खान समूह के मुख्य महाप्रबंधक (खान) को मांग-पत्र सौंपकर ठेका श्रमिकों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संघ का कहना है कि ठेका श्रमिक खदान के उत्पादन और उत्पादकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनके मूलभूत श्रम अधिकारों और सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि सभी मामलों की गंभीरता से जांच कर श्रम कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नियुक्ति पत्र नहीं मिलने का आरोप
संघ ने अपने मांग-पत्र में कहा है कि नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों के अनुरूप ठेका श्रमिकों को नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। आरोप लगाया गया कि मेघाहातुबुरु खदान में कार्यरत कई ठेका श्रमिकों को अब तक नियुक्ति पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है।
संघ ने मांग की है कि प्रत्येक ठेका श्रमिक को उसकी नियुक्ति, कार्य की प्रकृति, पारिश्रमिक और अन्य आवश्यक शर्तों से संबंधित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकार और रोजगार की स्थिति स्पष्ट रहे।
वेतन पर्ची नहीं देने पर भी सवाल
संघ ने ठेका श्रमिकों को वेतन पर्ची नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि वेतन पर्ची श्रमिक के लिए महज एक कागज नहीं, बल्कि उसके वेतन, कटौती और रोजगार संबंधी अधिकारों का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि जिन ठेकेदारों द्वारा श्रमिकों को वेतन पर्ची नहीं दी जा रही है, उनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और प्रत्येक श्रमिक को नियमानुसार वेतन पर्ची उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
‘सुरक्षा सर्वोपरि’ फिर PPE पर सवाल क्यों?
मांग-पत्र में ठेका श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। संघ ने आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा ठेका श्रमिकों को मानक के अनुरूप व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी PPE उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
संघ का कहना है कि खदान जैसे जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता श्रमिकों के जीवन को खतरे में डाल सकता है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में श्रमिकों को आवश्यक PPE उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
संघ ने प्रबंधन, सुरक्षा विभाग और सुरक्षा समिति से इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि प्रत्येक ठेका श्रमिक को कार्य की प्रकृति के अनुरूप निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हों।
गुआ में मुफ्त इलाज, मेघाहातुबुरु में क्यों नहीं?
ठेका श्रमिकों के लिए चिकित्सा सुविधा का मुद्दा भी संघ ने जोरदार तरीके से उठाया है। संघ का कहना है कि जिस खदान या संयंत्र में ठेका श्रमिक कार्यरत हैं, वहां सामाजिक सुरक्षा और संबंधित प्रावधानों के तहत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
संघ ने विशेष रूप से गुआ खदान और मेघाहातुबुरु खदान की व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि यदि झारखंड खान समूह की गुआ खदान में ठेका श्रमिकों को चिकित्सा सुविधा मिल सकती है तो मेघाहातुबुरु खदान में कार्यरत ठेका श्रमिकों को किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जनरल अस्पताल में समान सुविधा क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
संघ ने मांग की है कि गुआ की तर्ज पर मेघाहातुबुरु खदान के सभी पात्र ठेका श्रमिकों और उनके लिए लागू व्यवस्था के अनुसार चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए।
वेतन भुगतान में देरी को लेकर गंभीर आरोप
मांग-पत्र में ठेका श्रमिकों के वेतन भुगतान में कथित देरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संघ का आरोप है कि कई श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं मिलता और कुछ मामलों में अंतिम भुगतान तक लंबे समय से लंबित रहने की शिकायतें सामने आती हैं।
संघ ने कहा कि श्रमिक के लिए मजदूरी केवल आय का साधन नहीं बल्कि उसके और उसके परिवार के जीवन-यापन का आधार है। इसलिए काम लेने के बाद मजदूरी का भुगतान समय पर करना नियोक्ता और संबंधित ठेकेदार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
‘मजदूरी कोई दान नहीं, श्रमिक का अर्जित अधिकार’
संघ के महामंत्री अफताब आलम ने अपने पत्र में न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि मजदूरी किसी कर्मचारी पर किया जाने वाला उपकार या दान नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए श्रम के बदले अर्जित अधिकार है।
संघ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट), कटक के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि किए गए कार्य के बदले भुगतान नियोक्ता की जिम्मेदारी है और मजदूरी के समय पर भुगतान को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संघ ने प्रबंधन से आग्रह किया है कि यदि किसी ठेका श्रमिक का वैध वेतन या अंतिम भुगतान लंबित है तो उसकी जांच कर संबंधित ठेकेदार के माध्यम से तत्काल भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।
‘प्रिंसिपल एम्प्लॉयर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता’
संघ ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि ठेका श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रिंसिपल एम्प्लॉयर यानी प्रधान नियोक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण है। संगठन ने मांग की है कि यदि ठेकेदार स्तर पर श्रमिकों के वैध भुगतान या अन्य श्रम अधिकारों का पालन नहीं हो रहा है तो सेल प्रबंधन नियमानुसार अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करे।
बायोमेट्रिक उपस्थिति पर भी रोक लगाने की मांग
संघ ने मांगों का समाधान होने तक बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की प्रणाली को स्थगित रखने की मांग भी की है।
संघ का तर्क है कि पहले ठेका श्रमिकों से संबंधित नियुक्ति, वेतन पर्ची, सुरक्षा उपकरण, चिकित्सा सुविधा, वेतन भुगतान समेत सभी लंबित समस्याओं का नियमानुसार समाधान किया जाए। इसके बाद ही उपस्थिति प्रणाली को लेकर आगे की कार्रवाई हो।
श्रमिक हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं—संघ
अफताब आलम ने कहा कि ठेका श्रमिक भी खदान के उत्पादन और उत्पादकता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या उनके वैधानिक अधिकारों की अनदेखी उचित नहीं है।
संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर संबंधित ठेकेदारों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और श्रमिकों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान कराया जाए।
सहायक श्रमायुक्त को भी भेजी गई प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए मांग-पत्र की प्रतिलिपि सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय), चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
अब देखना यह है कि ठेका श्रमिकों की ओर से उठाए गए इन सवालों पर सेल प्रबंधन और श्रम विभाग क्या कार्रवाई करता है। खासकर नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, मानक PPE, मुफ्त चिकित्सा सुविधा और लंबित वेतन भुगतान जैसे मुद्दों पर प्रबंधन की अगली कार्रवाई को लेकर ठेका श्रमिकों की नजरें टिकी हैं।









