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कारो नदी में बह रहा ‘काला जहर’! औद्योगिक कचरे से प्रदूषण का गंभीर आरोप

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झारखंड-ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ ने नदी घाट का किया निरीक्षण, काले पानी का नमूना लेकर लैब जांच के लिए भेजने की तैयारी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

जीवनरेखा कारो नदी पर प्रदूषण का साया

किरीबुरू 2 अक्टूबर। झारखंड और ओडिशा की सीमा से जुड़े इलाकों की जीवनरेखा मानी जाने वाली कारो नदी इन दिनों कथित औद्योगिक प्रदूषण की चपेट में है। क्योंझर जिले के जोड़ा ब्लॉक अंतर्गत बोलानी क्षेत्र से होकर बहने वाली नदी में साफ पानी के बजाय काला एवं संदिग्ध रूप से दूषित पानी दिखाई देने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

नदी के पानी पर निर्भर ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के वन्यजीवों पर भी इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मजदूर संघर्ष संघ ने किया स्थल निरीक्षण

मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को झारखंड और ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ के पदाधिकारियों ने बोलानी ग्राम पंचायत सीमा से होकर बहने वाली कारो नदी के घाट का संयुक्त निरीक्षण किया। टीम ने नदी के पानी की स्थिति का जायजा लिया और काले पानी का नमूना एकत्र किया।

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, पानी के इस नमूने को उच्चस्तरीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि प्रदूषण के वास्तविक कारण एवं पानी में मौजूद संभावित हानिकारक तत्वों का पता लगाया जा सके।

औद्योगिक इकाइयों पर लगाया गंभीर आरोप

संघ ने आरोप लगाया कि कुछ औद्योगिक इकाइयां कथित तौर पर बिना समुचित उपचार के कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट एवं दूषित पानी को नदी में प्रवाहित कर रही हैं। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

संघ का कहना है कि यदि औद्योगिक अपशिष्ट नदी में छोड़ा जा रहा है, तो इससे पर्यावरण, जलीय जीवों और नदी पर निर्भर लोगों के जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जांच की मांग

मजदूर संघर्ष संघ ने राज्य सरकार तथा संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने और सरकारी स्तर पर नदी के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।

संघ ने कहा कि जांच में यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि नदी प्रदूषण के मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा।

जांच दल में ये रहे शामिल

संयुक्त निरीक्षण दल में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के महासचिव राजेंद्र सिंद्रिया और ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ के महासचिव सिबाशीष नंदा प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके अलावा दोनों राज्यों के अन्य पदाधिकारियों ने भी नदी की स्थिति का जायजा लिया।

गुवा में भी उठ चुकी है आवाज

इससे पूर्व झारखंड के गुवा क्षेत्र में भी झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने कारो नदी प्रदूषण को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने झारखंड सरकार से मामले की तत्काल जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

दो राज्यों से जुड़ी नदी, संकट भी सीमापार

बताया जाता है कि कारो नदी पड़ोसी सुंदरगढ़ जिले से निकलकर ओडिशा के जोड़ा ब्लॉक के बोलानी क्षेत्र से होकर झारखंड के गोईलकेरा क्षेत्र की ओर जाती है, जहां आगे यह कोयल नदी तंत्र से जुड़ती है।

ऐसे में नदी में प्रदूषण की समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकती। यदि जांच में प्रदूषण की पुष्टि होती है तो दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन और स्थायी समाधान जरूरी होगा।

अब वैज्ञानिक जांच से खुलेगा राज

कारो नदी के काले एवं संदिग्ध पानी का नमूना प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाने के बाद अब रिपोर्ट का इंतजार रहेगा। वैज्ञानिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में कौन-कौन से प्रदूषक मौजूद हैं और उनके स्रोत क्या हैं। स्थानीय लोगों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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