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हजारीबाग के SAI सेंटर की बेटी कीर्ति ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास

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रिकर्व तीरंदाजी में भारत को पहली बार मिला एशियाई स्वर्ण, दक्षिण कोरिया को हराकर कीर्ति शर्मा ने बढ़ाया देश का मान

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

हजारीबाग। भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में 2 अक्टूबर 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। इस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा रहीं हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव रटौली की बेटी और SAI STC पद्मा, हजारीबाग की प्रतिभाशाली तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने अपने शानदार प्रदर्शन से देशभर में अपनी पहचान बनाई है।

भारतीय टीम में अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड शामिल थीं। फाइनल में भारतीय तिकड़ी ने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का पहला स्वर्ण पदक है।

छोटे गांव से एशियाई खेलों के स्वर्ण मंच तक

कीर्ति शर्मा की सफलता केवल एक पदक की कहानी नहीं, बल्कि प्रतिभा, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और सही प्रशिक्षण के दम पर आगे बढ़ने की प्रेरणादायक कहानी है। हरियाणा के जींद जिले के रटौली गांव से निकलकर कीर्ति ने अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी के मंच तक अपनी पहचान बनाई।

13 जून 2022 को कीर्ति ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) प्रशिक्षण केंद्र, पद्मा हजारीबाग में एक उभरती हुई खिलाड़ी के रूप में कदम रखा था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही खिलाड़ी आने वाले वर्षों में एशियाई खेलों में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनेगी।

कोच उधम सिंह के मार्गदर्शन में निखरा हुनर

SAI केंद्र में कीर्ति को मुख्य कोच उधम सिंह का मार्गदर्शन मिला। नियमित अभ्यास, तकनीकी सुधार, फिटनेस, मानसिक मजबूती और प्रतियोगिताओं की तैयारी ने उनकी प्रतिभा को लगातार निखारा।

तीरंदाजी में लक्ष्य केवल निशाने पर तीर लगाना नहीं होता, बल्कि दबाव के बीच शरीर और दिमाग पर नियंत्रण रखते हुए सही समय पर सटीक निशाना साधना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। कीर्ति ने इसी अनुशासन को अपनी खेल यात्रा का आधार बनाया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी जगह मजबूत की।

दक्षिण कोरिया के खिलाफ दबाव में भी नहीं डिगा निशाना

एशियाई खेलों का फाइनल भारतीय टीम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। सामने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम थी, जो लंबे समय से महिला रिकर्व तीरंदाजी की शीर्ष शक्तियों में रही है।

भारतीय तिकड़ी ने हालांकि दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। मुकाबला बेहद करीबी रहा और निर्णायक क्षणों में भारतीय खिलाड़ियों ने संयम तथा सटीकता बनाए रखी। आखिरकार भारत ने 5-3 की जीत के साथ ऐतिहासिक स्वर्ण अपने नाम किया।

कीर्ति का तीर, भारत का गौरव

इस जीत में कीर्ति शर्मा की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली कीर्ति ने साबित किया कि प्रतिभा को यदि सही प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिले तो वह विश्वस्तरीय उपलब्धि में बदल सकती है।

एशियाई खेलों में व्यक्तिगत मुकाबले में भी कीर्ति ने प्रतिस्पर्धा की। आधिकारिक परिणामों के अनुसार उन्होंने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के शुरुआती दौर में वियतनाम की फुओंग थाओ को 7-1 से हराया, हालांकि अगले दौर में दक्षिण कोरिया की कांग चाए-यंग से 7-3 से मुकाबला हार गईं।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से अंतरराष्ट्रीय मंच तक लगातार सफलता

कीर्ति की उपलब्धियों का सिलसिला एशियाई खेलों से पहले भी शानदार रहा है। उनके खेल रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज हैं—

  • 2nd NTPC नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी टूर्नामेंट 2026 — 674 अंक के साथ स्वर्ण पदक।
  • वर्ल्ड कप स्टेज-4, मैड्रिड 2026 — 668 अंक के साथ चौथा स्थान।
  • एशिया कप स्टेज-1, बैंकॉक 2026 — टीम कांस्य पदक।
  • 38वें राष्ट्रीय खेल, देहरादून 2025 — टीम कांस्य पदक।
  • जूनियर नेशनल, बोलपुर 2025 — टीम स्वर्ण पदक।
  • ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप — टीम स्वर्ण, व्यक्तिगत रजत तथा मिक्स्ड टीम कांस्य पदक।

इन उपलब्धियों से साफ है कि एशियाई स्वर्ण अचानक मिली सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और लगातार बेहतर होते प्रदर्शन का परिणाम है।

SAI हजारीबाग बना प्रतिभा को तराशने का मजबूत मंच

कीर्ति शर्मा की सफलता से SAI STC हजारीबाग की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, अनुशासन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले प्रशिक्षण केंद्रों की अहमियत ऐसे अवसरों पर सामने आती है।

कीर्ति ने 2022 में जब SAI केंद्र में प्रवेश लिया था, तब वह एक उभरती हुई खिलाड़ी थीं। आज उसी खिलाड़ी का नाम एशियाई खेलों की स्वर्ण विजेता टीम के साथ जुड़ चुका है। यह उपलब्धि SAI STC हजारीबाग के लिए भी गौरव का विषय है।

केंद्र प्रभारी करण साधवानी ने दी बधाई

कीर्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि पर SAI STC हजारीबाग के केंद्र प्रभारी करण साधवानी सहित पूरे केंद्र परिवार ने खुशी जताई और कीर्ति को बधाई दी।

केंद्र की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा गया कि कीर्ति की सफलता देश के उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

SAI टीम ने कहा—कीर्ति पर पूरे केंद्र को गर्व

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर Senior Hockey Coach श्री विवेक चतुर्वेदी, Assistant Archery Coach श्री Md. Danish Ansari, Assistant Hockey Coach श्री आबिद अली, Junior Accountant श्री सन्नी सिंह एवं पूरी SAI STC Hazaribagh टीम ने कीर्ति शर्मा और उनकी स्वर्ण पदक विजेता टीम को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

एक तीरंदाज की सफलता, हजारों सपनों की उम्मीद

कीर्ति शर्मा की कहानी यह संदेश देती है कि किसी खिलाड़ी की शुरुआत भले ही छोटे गांव से हो, लेकिन उसके सपनों की कोई सीमा नहीं होती। गांव की पगडंडी से शुरू हुआ सफर जब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचता है तो उसके पीछे खिलाड़ी की मेहनत के साथ परिवार, प्रशिक्षक और संस्थागत सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

कीर्ति ने अपने सटीक निशाने से केवल स्वर्ण पदक ही हासिल नहीं किया, बल्कि रटौली गांव, जींद, हरियाणा और SAI STC हजारीबाग का नाम भी अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर चमका दिया है।

भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम का यह स्वर्ण भारत के लिए इस स्पर्धा में नया अध्याय है। और इस सुनहरे अध्याय में कीर्ति शर्मा का नाम हमेशा याद रखा जाएगा।

कीर्ति शर्मा को देश की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उनके उज्ज्वल खेल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

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